22 June 2013

!!! ऐसे करें हनुमानजी का पूजन !!!



कलयुग में सर्वाधिक हनुमानजी की ही पूजा की जाती है क्योंकि उन्हें कलयुग का जीवंत देवता माना गया है। परंपरागत रूप से हनुमान को बल, बुद्धि, विद्या, शौर्य और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। संकटकाल में हनुमानजी का ही स्मरण किया जाता है। वह संकटमोचन कहलाते हैं। देवी-देवताओं की पूजा मन को शांति तो प्रदान करती है साथ ही मनोकामनाओं को पूर्ण भी करती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान की भक्ति और आराधना के संबंध में कई प्रकार के नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति जल्दी ही भगवान की कृपा प्राप्त कर लेता है और सभी दुखों से स्वयं को दूर कर लेता है। वैसे तो सभी देवी-देवता जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन कलयुग में हनुमानजी शीघ्र कृपा करने वाले देवता माने गए हैं।

पूजन विधि

हनुमानजी का पूजन करते समय सबसे पहले कंबल या ऊन के आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करें। इसके पश्चात

हाथ में चावल व फूल लें व इस मंत्र से हनुमानजी का ध्यान करें-
 


अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं 
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।। 

ऊँ हनुमते नम: ध्यानार्थे पुष्पाणि सर्मपयामि।। 


इसके बाद चावल व फूल हनुमानजी को अर्पित कर दें।


आवाह्न - हाथ में फूल लेकर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए श्री हनुमानजी का आवाह्न करें


उद्यत्कोट्यर्कसंकाशं जगत्प्रक्षोभकारकम्। 
श्रीरामड्घ्रिध्याननिष्ठं सुग्रीवप्रमुखार्चितम्।। 
विन्नासयन्तं नादेन राक्षसान् मारुतिं भजेत्।। 


ऊँ हनुमते नम: आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।।


उन फूलों को हनुमानजी को अर्पित कर दें।


आसन- नीचे लिखे मंत्र से हनुमानजी को आसन अर्पित करें-


तप्तकांचनवर्णाभं मुक्तामणिविराजितम्। 
अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम्।। 


आसन के लिए कमल अथवा गुलाब का फूल अर्पित करें।


इसके बाद इन मंत्रों का उच्चारण करते हुए हनुमानजी के सामने किसी बर्तन अथवा भूमि पर तीन बार जल छोड़ें।


ऊँ हनुमते नम:, पाद्यं समर्पयामि।। 
अध्र्यं समर्पयामि। आचमनीयं समर्पयामि।। 


इसके बाद हनुमानजी की मूर्ति को गंगाजल से अथवा शुद्ध जल से स्नान करवाएं तत्पश्चात पंचामृत (घी, शहद, शक्कर, दूध व दही ) से स्नान करवाएं। पुन: एक बार शुद्ध जल से स्नान करवाएं।


अब इस मंत्र से हनुमानजी को वस्त्र अर्पित करें व वस्त्र के निमित्त मौली चढ़ाएं-


शीतवातोष्णसंत्राणं लज्जाया रक्षणं परम्। 
देहालकरणं वस्त्रमत: शांति प्रयच्छ मे।। 
ऊँ हनुमते नम:, वस्त्रोपवस्त्रं समर्पयामि। 


इसके बाद हनुमानजी को गंध, सिंदूर, कुंकुम, चावल, फूल व हार अर्पित करें। अब इस मंत्र के साथ हनुमानजी को धूप-दीप दिखाएं-


साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया। 
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्।।
भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने।। 
त्राहि मां निरयाद् घोराद् दीपज्योतिर्नमोस्तु ते।। 


ऊँ हनुमते नम:, दीपं दर्शयामि।। 


इसके बाद केले के पत्ते पर या किसी कटोरी में पान के पत्ते के ऊपर प्रसाद रखें और इस मंत्र के साथ हनुमानजी को अर्पित कर दें तत्पश्चात ऋतुफल अर्पित करें। (प्रसाद में चूरमा, भीगे हुए चने या गुड़ चढ़ाना उत्तम रहता है।) अब लौंग-इलाइचीयुक्त पान चढ़ाएं।


शर्कराखण्ड खाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च 
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्य प्रतिगृह्यताम्।। 

पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इस मंत्र को बोलते हुए हनुमानजी को दक्षिणा अर्पित करें-

ऊँ हिरण्यगर्भगर्भस्थं देवबीजं विभावसों:। 
अनन्तपुण्यफलदमत: शांति प्रयच्छ मे।। 

ऊँ हनुमते नम:, पूजा साफल्यार्थं द्रव्य दक्षिणां समर्पयामि।। 


इसके बाद एक थाली में कर्पूर एवं घी का दीपक जलाकर हनुमानजी की आरती करें।

इस प्रकार पूजन करने से हनुमानजी अति प्रसन्न होते हैं तथा साधक की हर मनोकामना पूरी करते हैं।



!!! पूजन विधि ( सरलतम विधि ) !!!


हनुमानजी का पूजन करते समय सबसे पहले कंबल या ऊन के आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। इसके पश्चात हाथ में चावल व फूल लें व इस मंत्र से हनुमानजी का

ध्यान करें-

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
ऊँ हनुमते नम: ध्यानार्थे पुष्पाणि सर्मपयामि।।


इसके बाद हाथ में लिया हुआ चावल व फूल हनुमानजी को अर्पित कर दें।

आवाह्न-

हाथ में फूल लेकर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए श्री हनुमानजी का आवाह्न करें एवं उन फूलों को हनुमानजी को अर्पित कर दें।

उद्यत्कोट्यर्कसंकाशं जगत्प्रक्षोभकारकम्।
श्रीरामड्घ्रिध्याननिष्ठं सुग्रीवप्रमुखार्चितम्।।
विन्नासयन्तं नादेन राक्षसान् मारुतिं भजेत्।।
ऊँ हनुमते नम: आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।।


आसन-

नीचे लिखे मंत्र से हनुमानजी को आसन अर्पित करें (आसन के लिए कमल अथवा गुलाब का फूल अर्पित करें।) अथवा चावल या पत्ते आदि का भी उपयोग हो सकता है |

तप्तकांचनवर्णाभं मुक्तामणिविराजितम्।
अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम्।।

इसके बाद इन मंत्रों का उच्चारण करते हुए हनुमानजी के सामने किसी बर्तन अथवा भूमि पर तीन बार जल छोड़ें।

ऊँ हनुमते नम:, पाद्यं समर्पयामि।।
अध्र्यं समर्पयामि। आचमनीयं समर्पयामि।।

इसके बाद हनुमानजी को गंध, सिंदूर, कुंकुम, चावल, फूल व हार अर्पित करें।
अब इस मंत्र के साथ हनुमानजी को धूप-दीप दिखाएं-

साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्।।
भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने।।
त्राहि मां निरयाद् घोराद् दीपज्योतिर्नमोस्तु ते।।
ऊँ हनुमते नम:, दीपं दर्शयामि।।


इसके बाद केले के पत्ते पर या किसी कटोरी में पान के पत्ते के ऊपर प्रसाद रखें और हनुमानजी को अर्पित कर दें तत्पश्चात ऋतुफल अर्पित करें। (प्रसाद में चूरमा, भीगे हुए चने या गुड़चढ़ाना उत्तम रहता है।)

इसके बाद एक थाली में कर्पूर एवं घी का दीपक जलाकर हनुमानजी की आरती करें। इस प्रकार पूजन करने से हनुमानजी अति प्रसन्न होते हैं तथा साधक की हर मनोकामना पूरी करतेहैं।



हनुमान जी की आरती



आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्टदलन रघुनाथ कला की॥१
जाके बल से गिरिवर काँपै। रोग-दोष जाके निकट न झाँपै॥२
अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥३
दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारि सीय सुधि लाये॥४
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥५
लंका जारि असुर सँहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥६
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्रान उबारे॥७
पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावन की भुजा उखारे॥८
बायें भुजा असुर दल मारे। दहिने भुजा संतजन तारे॥९
सुर नर मुनि आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे॥१०
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरति करत अंजना माई॥११
जो हनुमान जी की आरती गावै। बसि बैकुण्ठ परमपद पावै॥१२

!!! कामयाब हैं हनुमान जी के ये टोटके !!!

हनुमान जी का एक नाम बजरंगबली है. बजरंगबली को चमत्कारिक सफलता देने वाला देवता माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि चैत्र मास की पूर्णिमा को ही राम भक्त हनुमान ने माता अंजनी के गर्भ से जन्म लिया था. हर देवता की जन्मतिथि एक होती है, लेकिन हनुमान जी की दो मनाई जाती हैं. हनुमान जी की जन्मतिथि को लेकर मतभेद हैं. कुछ हनुमान जयन्ती की तिथि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मानते हैं तो कुछ चैत्र शुक्ल पूर्णिमा. इसके बारे में ग्रंथों में दोनों के ही उल्लेख मिलते हैं, लेकिन इनके कारणों में भिन्नता है.
पहला जन्मदिवस है और दूसरा विजय अभिनन्दन महोत्सव. हनुमान जी के जन्म के बारे में एक कथा है कि -'अंजनी के उदर से हनुमान जी उत्पन्न हुए. भूखे होने के कारण वे आकाश में उछल गए और उदय होते हुए सूर्य को फल समझकर उसके समीप चले गए. उस दिन पर्व तिथि होने से सूर्य को ग्रसने के लिए राहु आया हुआ था. लेकिन हनुमान जी को देखकर उसने उन्हें दूसरा राहु समझा और भागने लगा. तब इन्द्र ने अंजनीपुत्र पर वज्र का प्रहार किया. इससे उनकी ठोड़ी टेढ़ी हो गई, जिसके कारण उनका नाम हनुमान पड़ा. जिस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ वो दिन चैत्र मास की पूर्णिमा थी.
हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्तों को हर परेशानी से बजरंगबली बचाते हैं. बजरंगबली को लेकर कई टोटके भी हैं. कहा जाता है कि इन टोटके से ‍विशेष रूप से धन प्राप्ति के लिए किया जा सकता है. इतना ही नहीं ये टोटके हर प्रकार का अनिष्ट भी दूर करते हैं.
टोटका 1 - कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें. संकट दूर होगा और धन की प्राप्ति होगी.
टोटका 2 - अगर धन लाभ की स्थितियां बन रही हो, लेकिन ‍फिर भी लाभ नहीं मिल रहा हो, तो हनुमान जयंती पर गोपी चंदन की नौ डलियां लेकर केले के वृक्ष पर टांग देनी चाहिए. याद रहे ये चंदन पीले धागे से ही बांधना है.
टोटका 3 - एक नारियल पर कामिया सिन्दूर, मौली, अक्षत अर्पित कर पूजन करें. फिर हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा आएं. इससे धन लाभ होगा.
टोटका 4 - पीपल के वृक्ष की जड़ में तेल का दीपक जला दें. फिर वापस घर आ जाएं और पीछे मुड़कर न देखें. इससे आपको धन लाभ के साथ ही हर बिगड़ा काम बन जाएगा.
गुप्त शत्रु से बचाएं हनुमान जी का ये टोटका
जब कोई शख्स तरक्की करता है, तो उसकी तरक्की से जल कर उसके अपने ही उसके शत्रु बन जाते हैं और उसे सहयोग देने की जगह पर वो उसके मार्ग को अवरूद्ध करने लग जाते हैं. ऐसे शत्रुओं से निपटना अत्यधिक कठिन होता है.
-  ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रात:काल सात बार हनुमान बाण का पाठ करें.
-  हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाएं.
-  पांच लौंग पूजा स्थान में देशी कपूर के साथ जलाएं.
-  फिर भस्म से तिलक करके बाहर जाए.
इस प्रयोग से जीवन में समस्त शत्रुओं परास्त होंगे. वहीं इस यंत्र के माध्यम से आप अपनी मनोकामनाओं की भी पूर्ति करने में सक्षम होंगे.
श्री हनुमान जी के चमत्कारी बारह नाम
हनुमान जी के बारह नाम का स्मरण करने से ना सिर्फ उम्र में वृद्धि होती है बल्कि समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति भी होती है. बारह नामों का निरंतर जप करने वाले व्यक्ति की श्री हनुमानजी महाराज दसों दिशाओं और आकाश-पाताल से रक्षा करते हैं.
केसरीनंदन बजरंग बली के 12 चमत्कारी नाम:
1)- ॐ हनुमान
2)- ॐ अंजनी सुत
3)- ॐ वायु पुत्र
4)- ॐ महाबल
5)- ॐ रामेष्ठ
6)- ॐ फाल्गुण सखा
7)- ॐ पिंगाक्ष
8)- ॐ अमित विक्रम
9)- ॐ उदधिक्रमण
10)- ॐ सीता शोक विनाशन
11)- ॐ लक्ष्मण प्राण दाता
12)- ॐ दशग्रीव दर्पहा
नाम की अलौकिक महिमा
- प्रात: काल सो कर उठते ही जिस अवस्था में भी हो बारह नामों को 11 बार लेनेवाला व्यक्ति दीर्घायु होता है.
- नित्य नियम के समय नाम लेने से इष्ट की प्राप्ति होती है.
- दोपहर में नाम लेने वाला व्यक्ति धनवान होता है. दोपहर संध्या के समय नाम लेने वाला व्यक्ति पारिवारिक सुखों से तृप्त होता है.
- रात्रि को सोते समय नाम लेने वाले व्यक्ति की शत्रु से जीत होती है.
- उपरोक्त समय के अतिरिक्त इन बारह नामों का निरंतर जप करने वाले व्यक्ति की श्री हनुमानजी महाराज दसों दिशाओं और आकाश पाताल से रक्षा करते हैं.
- लाल स्याही से मंगलवार को भोजपत्र पर ये बारह नाम लिखकर मंगलवार के दिन ही ताबीज बांधने से कभी ‍सिरदर्द नहीं होता. गले या बाजू में तांबे का ताबीज ज्यादा उत्तम है. भोजपत्र पर लिखने के काम आने वाला पेन नया होना चाहिए.
हनुमान जी का खास मंत्र
श्री हनुमंते नम:
अतुलित बलधामं, हेमशैलाभदेहं।
दनुजवनकृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुण निधानं, वानराणामधीशं।
रघुपतिप्रिय भक्तं, वातजातं नमामि।।

!!! हनुमान साधना के कुछ नियम !!!



हनुमान जी को प्रसन्न करना बहुत सरल है। राह चलते उनका नाम स्मरण करने मात्र से ही सारे संकट दूर हो जाते हैं। जो साधक विधिपूर्वक साधना से हनुमान जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं उनके लिए प्रस्तुत हैं कुछ उपयोगी नियम ...

वर्तमान युग में हनुमान साधना तुरंत फल देती है। इसी कारण ये जन-जन के देव माने जाते हैं। इनकी पूजा-अर्चना अति सरल है, इनके मंदिर जगह-जगह स्थित हैं अतः भक्तों को पहुंचने में कठिनाई भी नहीं आती है। मानव जीवन का सबसे बड़ा दुख भय'' है और जो साधक श्री हनुमान जी का नाम स्मरण कर लेता है वह भय से मुक्ति प्राप्त कर लेता है।

हनुमान साधना के कुछ नियम यहां उद्धृत हैं। जिनका पालन करना अति आवश्यक है :

हनुमान साधना में शुद्धता एवं पवित्रता अनिवार्य है। प्रसाद शुद्ध घी का बना होना चाहिए।
हनुमान जी को तिल के तेल में मिल हुए सिंदूर का लेपन करना चाहिए।
हनुमान जी को केसर के साथ घिसा लाल चंदन लगाना चाहिए।
पुष्पों में लाल, पीले बड़े फूल अर्पित करने चाहिए। कमल, गेंदे, सूर्यमुखी के फूल अर्पित करने पर हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

नैवेद्य में प्रातः पूजन में गुड़, नारियल का गोला और लडू, दोपहर में गुड़, घी और गेहूं की रोटी का चूरमा अथवा मोटा रोट अर्पित करना चाहिए। रात्रि में आम, अमरूद, केला आदि फलों का प्रसाद अर्पित करें।

साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन अति अनिवार्य है।

जो नैवेद्य हनुमान जी को अर्पित किया जाता है उसे साधक को ग्रहण करना चाहिए।

मंत्र जप बोलकर किए जा सकते हैं। हनुमान जी की मूर्ति के समक्ष उनके नेत्रों की ओर देखते हुए मंत्रों के जप करें।

साधना में दो प्रकार की मालाओं का प्रयोग किया जाता है। सात्विक कार्य से संबंधित साधना में रुद्राक्ष माला तथा तामसी एवं पराक्रमी कार्यों के लिए मूंगे की माला।
साधना पूर्ण आस्था, श्रद्धा और सेवा भाव से की जानी चाहिए।

मंगलवार हनुमान जी का दिन है। इस दिन अनुष्ठान संपन्न करना चाहिए। इसके अतिरिक्त शनिवार को भी हनुमान पूजा का विधान है।

हनुमान साधना से ग्रहों का अशुभत्व पूर्ण रूप से शांत हो जाता है। हनुमान जी और सूर्यदेव एक दूसरे के स्वरूप हैं, इनकी परस्पर मैत्री अति प्रबल मानी गई है। इसलिए हनुमान साधना करने वाले साधकों में सूर्य तत्व अर्थात आत्मविश्वास, ओज, तेजस्विता आदि विशेष रूप से आ जाते हैं। यह तेज ही साधकों को सामान्य व्यक्तियों से अलग करता है।
हनुमान जी की साधना में जो ध्यान किया जाता है उसका विशेष महत्व है। हनुमान जी के जिस विग्रह स्वरूप का ध्यान करें वैसी ही मूर्ति अपने मानस में स्थिर करें और इस तरह का अभ्यास करें कि नेत्र बंद कर लेने पर भी वही स्वरूप नजर आता रहे।

18 June 2013

श्री हनुमान सहस्र नामावली
. हनुमते नमः
. श्रीप्रदाय नमः
. वायुपुत्राय नमः
. रुद्राय नमः
. अनघाय नमः
. अजराय नमः
. अमृत्यवे नमः।
. वीरवीराय नमः
. ग्रामवासाय नमः
१० . जनाश्रयाय नमः
११ . धनदाय नमः
१२ . निर्गुणाय नमः
१३ . अकायाय नमः
१४ . वीराय नमः
१५ . निधिपतये नमः
१६ . मुनये नमः
१७ .  पिंगालक्षाय
१८ . वरदाय नमः
१९ . वाग्मिने नमः
२० . सीताशोकविनाशनाय नमः
२१ . शिवाय नमः
२२ . सर्वस्मै नमः
२३ . परस्मै नमः
२४ . अव्यक्ताय नमः
२५ . व्यक्ताव्यक्ताय नमः
२६ . रसाधराय नमः
२७ . पिंगकेशाय
२८ . पिंगरोम्णे
२९ . श्रुतिगम्याय नमः
३० . सनातनाय नमः
३१ . अनादये नमः
३२ . भगवते नमः
३३ . देवाय नमः
३४ . विश्वहेतवे नमः
३५ . निरामयाय नमः
३६ . आरोग्यकर्त्रे नमः
३७  . विश्वेशाय नमः
३८ . विश्वनाथाय नमः
३९ . हरीश्वराय नमः
४० . भर्गाय नमः
४१ . रामाय नमः
४२ . रामभक्ताय नमः
४३ . कल्याणप्रकृतये नमः
४४ . स्थिराय नमः
४५ . विश्वम्भराय नमः
४६ . विश्वमूर्तये नमः
४७ . विश्वाकाराय नमः
४८ . विश्वपाय नमः
४९ . विश्वात्मने नमः
५० . विश्वसेव्याय नमः
५१ . विश्वस्मै नमः
५२ . विश्वहराय नमः
५३ . रवये नमः
५४ . विश्वचेष्टाय नमः
५५ . विश्वगम्याय नमः
५६ . विश्वध्येयाय नमः
५७ . कलाधराय नमः
५८ . प्लवंगमाय नमः
५९ . कपिश्रेष्ठाय नमः
६० . ज्येष्ठाय नमः
६१ . वैद्याय नमः
62. वनेचराय नमः
६३  . बालाय नमः
६४ . वृद्धाय नमः
६५ . यूने नमः
६६ . तत्त्वाय नमः
६७ . तत्त्वगम्याय नमः
६८ . सख्ये नमः
६९ . अजाय नमः
७० . अञ्जनासूनवे नमः
७१ . अव्यग्राय नमः
७२ . ग्रामख्याताय नमः
७३ . धराधराय नमः
७४ . भूर्लोकाय नमः
७५ . भुवर्लोकाय नमः
७६ . स्वर्लोकाय नमः
७७ . महर्लोकाय नमः
७८ . जनलोकाय नमः
७९ . तपोलोकाय नमः
८० . अव्ययाय नमः
८१ . सत्याय नमः
८२ . ओंकारगम्याय
८३ . प्रणवाय नमः
८४ . व्यापकाय नमः
८५ . अमलाय नमः
८६ . शिवधर्मप्रतिष्ठात्रे नमः
८७ . रामेष्टाय नमः
८८ . फ़ाल्गुनप्रियाय नमः
८९ . गोष्पदीकृतवारीशाय नमः
९० . पूर्णकामाय नमः
९१ . धरापतये नमः
९२ . रक्षोन्घाय नमः
९३ . पुण्डरीकाक्षाय नमः
९४ . शरणागतवत्सलाय नमः
९५ . जानकीप्राणदत्रे नमः
९६ . रक्षःप्राणापहारकाय नमः
९७ . पूर्णाय नमः
९८ . सत्यायः नमः
९९ . पीतवाससे नमः
१०० . दिवाकरसमप्रभाय नमः १०१ . देवोद्यानविहारिणे नमः
१०२ . देवताभयभयन्जनाय नमः 

१०३ . भक्तोदयाय नमः
१०४ . भक्तलब्धाय नमः
१०५ . भक्तपालनतत्पराय नमः
१०६ . द्रोणहर्त्रे नमः
१०७ . शक्तिनेत्रे नमः
१०८ . शक्तिराक्षसमारकाय नमः
१०९ . अक्षन्घाय नमः
११० . रामदूताय नमः
१११ . शाकिनीजीवहारकाय नमः
११२ . बुबुकारहतारातये नमः
११३ . गर्वपर्वतमर्दनाय नमः
११४ . हेतवे नमः
११५ . अहेतवे नमः
११६ . प्रांशवे नमः
११७ . विश्वभर्त्रे नमः
११८ . जगद् गुरवे नमः
११९ . जगन्नेत्रे नमः
१२० . जगन्नाथाय नमः
१२१ . जगदीशाय नमः
१२२ . जनेश्वराय नमः
१२३ . जगद्धिताय नमः
१२४ . हरये नमः
१२५ . श्रीशाय नमः
१२६ . गरुडस्मयभन्जनाय नमः
१२७ . पार्थध्वजाय नमः
१२८ . वायुपुत्राय नमः
१२९ . अमितपुच्छाय नमः
१३० . अमितविक्रमाय नमः
131.   ब्रह्मपुच्छाय नमः
१३२ . परब्रह्मपुच्छाय नमः
१३३ . रामेष्टकारकाय नमः
१३४ . सुग्रीवादियुताय नमः
१३५ . ज्ञानिने नमः
१३६ . वानराय नमः
१३७ . वानरेश्वराय नमः
१३८ . कल्पस्थायिने नमः
१३९ . चिरन्जीविने नमः
१४० . तपनाय नमः
१४१ . सदाशिवाय नमः
१४२ . सन्नतये नमः
१४३ . सन्दतये नमः
१४४ . भुक्तिमुक्तिदाय नमः
१४५ . कीर्तिदायकाय नमः
१४६ . कीर्तये नमः
१४७ . कीर्तिप्रदाय नमः
१४८ . समुद्राय नमः
१४९ . श्रीप्रदाय नमः
१५० . शिवाय नमः
१५१ . भक्तोदयाय नमः
१५२ . भक्तगम्याय नमः
१५३ . भक्तभाग्यप्रदायकाय नमः
१५४ . उदधिक्रमणाय नमः
१५५ . देवाय नमः
१५६ . संसारभयनाशनाय नमः
१५७ . वार्धिबन्धनकृते नमः
१५८ . विश्वजेत्रे नमः
१५९ . विश्वप्रतिष्ठिताय नमः
१६० . लंकारये नमः
१६१ . कालपुरुषाय नमः
१६२ . लकंशग्रहभन्जनाय नमः
१६३ . भूतावासाय नमः
१६४ . वासुदेवाय नमः
१६५ . वसवे नमः
१६६ . त्रिभुवनेश्वराय नमः
१६७ . श्रीरामरुपाय नमः
१६८ . कृष्णाय नमः
१६९ . लंकाप्रासादभन्जकाय नमः
१७० . कृष्णाय नमः
१७१ . कृष्णस्तुताय नमः
१७२ . शान्ताय नमः
१७३ . शान्तिदाय नमः
१७४ . विश्वपावनाय नमः
१७५ . विश्वभोक्त्रे नमः
१७६ . मारन्घाय नमः
१७७ . ब्रह्मचारिणे नमः
१७८  . जितेन्द्रियाय नमः
१७९ . ऊर्ध्वगाय नमः
१८० .  लांगुलिने
१८१ . मालिने नमः
१८२ . लांगूलाहतराक्षसाय नमः
१८३ . समीरतनुजाय नमः
१८४ . वीराय नमः
१८५ . वीरताराय नमः
१८६ . जयप्रदाय नमः
१८७ . जगन्मंगलदाय नमः
१८८ . पुण्याय नमः
१८९ . पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः
१९० . पुण्यकीर्तये नमः
१९१ . पुण्यगतये नमः
१९२ . जगत्पावनापावनाय नमः
१९३ . देवेशाय नमः
१९४ . जितमाराय नमः
१९५ . रामभक्तिविधायकाय नमः
१९६ . ध्यात्रे नमः
१९७ . ध्येयाय नमः
१९८ . लयाय नमः
१९९ . साक्षिणे नमः
२०० . चेतसे नमः
२०१ . चैतन्यविग्रहाय नमः
२०२ . ज्ञानदाय नमः
२०३ . प्राणदाय नमः
204. प्राणाय नमः
२०५ . जगत्प्राणाय नमः
२०६ . समीरणाय नमः
२०७ . विभीषणप्रियाय नमः
२०८ . शूराय नमः
२०९ . पिप्पलाश्रयसिद्धिदाय नमः
२१० . सिद्धाय नमः
२११ . सिद्धाश्रयाय नमः
२१२ . कालाय नमः
२१३ . महोक्षाय नमः
२१४ . कालाजान्तकाय नमः
२१५ . लंकेशनिधनाय नमः
२१६ . स्थायिने नमः
२१७  . श्रीपरीवाराय नमः।
२१८. श्रिताय नमः।
२१९. . रुद्राय नमः
२२०  . कामदुहे नमः
२२१ . प्रलयान्तकाय नमः
२२२ . कपिलाय नमः
२२३ . कपिशाय नमः
२२४ . पुण्यराशये नमः
२२५ . द्वादशराशिगाय नमः
२२६ . सर्वाश्रयाय नमः
२२७ . अप्रमेयात्मने नमः
२२८ . रेवत्यादिनिवारकाय नमः
२२९ . लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः
२३० . सीताजीवनहेतुकाय नमः
२३१ . रामध्येयाय नमः
२३२ . हृषिकेशाय नमः
२३३ . विष्णुभक्ताय नमः
२३४ . जटिने नमः
२३५ . बलिने नमः
२३६ . देवारिदर्पन्घे नमः
२३७ . होत्रे नमः
२३८ . धात्रे नमः
२३९ . कर्त्रे नमः
२४० . जगत्प्रभवे नमः
२४१ . नगरग्रामपालाय नमः
२४२. शुद्धाय नमः
२४३ . बुद्धाय नमः
२४४ . निरत्रपाय नमः
२४५ . निरन्जनाय नमः
२४६ . निर्विकल्पाय नमः
२४७ . गुणातीताय नमः
२४८ . भयंकराय नमः
२४९ . हनुमते नमः
२५० . दुराराध्याय नमः
२५१ . तपःसाध्याय नमः
२५२ . महेश्वराय नमः
२५३ . जानकीधनशोकोत्थतापहर्त्रे नमः
२५४ . परात्परस्मै नमः
२५५ . वाड्.मयाय नमः
२५६ . सदसद्रूपाय नमः
२५७ . कारणाय नमः
२५८ . प्रकृतेः परस्मै नमः
२५९ . भाग्यदाय नमः
२६० . निर्मलाय नमः
२६१ . नेत्रे नमः
२६२ . पुच्छलंकाविदाहकाय नमः
२६३ . पुच्छबद्धयातुधानाय नमः
२६४ . यातुधानरिपुप्रियाय नमः
२६५ . छायापहारिणे नमः
२६६ . भूतेशाय नमः
२६७ . लोकेशाय नमः
२६८ . सन्दतिप्रदाय नमः
२६९ . प्लवंगमेश्वराय नमः
२७० . क्रोधाय नमः
२७१ . क्रोधसंरक्तलोचनाय नमः
२७२ . सौम्याय नमः
२७३ . गुरवे नमः
२७४ . काव्यकर्त्रे नमः
२७५ . भक्तानां वरप्रदाय नमः
२७६ . भक्तानुकम्पिने नमः
२७७ . विश्वेशाय नमः
२७८ . पुरुहूताय नमः
२७९ . पुरंदराय नमः
२८० . क्रोधहर्त्रे नमः
२८१ . तमोहर्त्रे नमः
२८२ . भक्ताभयवरप्रदाय नमः
२८३ . अगन्ये नमः
२८४ . विभावसते नमः
२८५ . भास्वते नमः
२८६ . यमाय नमः
२८७ . निॠतये नमः
२८८ .   वरुणाय नमः
२८९ . वायुगतिमते नमः
२९० . वायवे नमः
२९१ . कौबेराय नमः
२९२ . ईश्वराय नमः
२९३. श्रीपरीवाराय नमः।
२९४. श्रिताय नमः।
२९५ . रुद्राय नमः
२९६. कामदुहे नमः
२९७ . गुरवे नमः
२९८ . काव्याय नमः
२९९ . शनैश्चराय नमः
३०० . राहवे नमः  
३०१  . केतव नमः
३०२ . मरुते नमः
३०३ . होत्रे नमः
३०४ . दात्रे नमः
३०५ . हर्त्रे नमः
३०६ . समीरजाय नमः
३०७ . मशकीकृतदेवारये नमः
३०८ . दैत्यारये नमः
३०९ . मधुसूदनाय नमः
३१० . कामाय नमः
३११ . कपये नमः
३१२ . कामपालाय नमः
३१३ . कपिलाय नमः
३१४ . विश्वजीवनाय नमः
३१५ . भागीरथीपदाम्भोजाय नमः
३१६ . सेतुबन्धविशारदाय नमः
३१७ . स्वाहायै नमः
३१८ . स्वधायै नमः
३१९ . हविषे नमः
३२० . कव्याय नमः
३२१ . हव्यवाहप्रकाशकाय नमः
३२२ . स्वप्रकाशाय नमः
३२३ . महावीराय नमः
३२४ . लघवे नमः
३२५ . ऊर्जितविक्रमाय नमः
३२६ . उड्डीनोड्डीनगतिमते नमः
३२७ . सन्दतये नमः
३२८ . पुरुषोत्तमाय नमः
३२९ . जगदात्मने नमः
३३० . जगद्योनये नमः
३३१ . जगदन्ताय नमः
३३२ . अनन्तकाय नमः
३३३ . विपाप्मने नमः
३३४ .   निश्कलंकाय नमः
३३५ . महते नमः
३३६ . महदहंकृतये नमः
३३७ . खाय नमः
३३८ . वायवे नमः
३३९ . पृथिव्यै नमः
३४० . अद्भ्यो नमः
३४१ . वह्नये नमः
३४२ . दिक्पालाय नमः
३४३ . क्षेत्रज्ञाय नमः
३४४ . क्षेत्रहर्त्रे नमः
३४५ . पल्वलीकृतसागराय नमः
३४६ . हिरण्मयाय नमः
३४७ . पुराणाय नमः
३४८ . खेचराय नमः
३४९ . भूचराय नमः
३५० . अमराय नमः
३५१ . हिरण्यगर्भाय नमः
३५२ . सूत्रात्मने नमः
३५३   राजराजाय नमः
३५४ . विशांपतये नमः
३५५ . वेदान्तवेद्याय नमः
३५६ . उदीन्थाय नमः
३५७ . वेदवेदांगपारगाय नमः
३५८ . प्रतिग्रामस्थितये नमः
३५९ . सद्यः स्फ़ूर्तिदात्रे नमः
३६० . गुणाकराय नमः
३६१ . नक्षत्रमालिने नमः
३६२ . भूतात्मने नमः
३६३ . सुरभये नमः
३६४ . कल्पपादपाय नमः
३६५ . चिन्तामणये नमः
३६६ . गुणनिधये नमः
३६७ . प्रजाधाराय नमः
३६८ . अनुत्तमाय नमः
३६९ . पुण्यश्लोकाय नमः
३७० . पुरारातये नमः
३७१ . ज्योतिष्मते नमः
३७२ . शर्वरीपतये नमः
३७३ . किल्   किलारावसंत्रस्तभूतप्रेतपिचाशाचकाय नमः
३७४ . ऋणत्रयहराय नमः
३७५ . सूक्ष्माय नमः
३७६ . स्थूलाय नमः
३७७ . स्थूलाय नमः
३७८ . पुंसे नमः
३७९ . अपस्मारहराय नमः
३८० . स्मर्त्रे नमः
३८१ . श्रुतये नमः
३८२ . गाथायै नमः
३८३ . स्मृतये नमः
३८४ . मनवे नमः
३८५ . स्वर्गद्वाराय नमः
३८६ . प्रजाद्वाराय नमः
३८७ . मोक्षद्वाराय नमः
३८८ . यतीश्वराय नमः
३८९ . नादरुपाय नमः
३९० . परस्मै ब्रह्मणे नमः
३९१ . ब्रह्मणे नमः
३९२ . ब्रह्मपुरातनाय नमः
३९३ . एकस्मै नमः
३९४ . अनेकस्मै नमः
३९५  . जनाय नमः
३९६ . शुक्लाय नमः
३९७ . स्वंयज्योतिषे नमः
३९८ . अनाकुलाय नमः
३९९ . ज्योतिर्ज्योतिषे नमः
४०० . अनादये नमः
४०१ . सात्त्विकाय नमः
४०२ . राजसाय नमः
४०३ . तमाय नमः
४०४ . तमोहर्त्रे नमः
४०५ . निरालम्बाय नमः
४०६ . निराकाराय नमः
४०७ . गुणाकराय नमः
४०८ . गुणाश्रयाय नमः
४०९ . गुणमयाय नमः
४१० . बृहत्कर्मणे नमः
४११ . बृहद्यशसे नमः
४१२ . बृहद्धनवे नमः
४१३ . बृहत्पादाय नमः
४१४ . बृहन्मूर्घ्ने नमः
४१५ . बृहत्स्वनाय नमः
४१६ . बृहत्कर्णाय नमः
४१७ . बृहन्नासाय नमः
४१८ . बृहद्बाहवे नमः
४१९ . बृहत्तनवे नमः
४२० . बृहज्जानवे नमः
४२१ . बृहत्कार्याय नमः
४२२ . बृहत्पुच्छाय नमः
४२३ . बृहत्कराय नमः
४२४ . बृहन्दतये नमः
४२५ . बृहत्सेव्याय नमः
४२६ . बृहल्लोकफ़लप्रदाय नमः
४२७ . बृहच्छक्तये नमः
४२८ . बृहद्वान्छाफ़लदाय नमः
४२९ . बृहदीश्वराय नमः
४३० . बृहल्लोकनुताय नमः
४३१ . द्रष्ट्रे नमः
४३२ . विद्यादात्रे नमः
४३३ . जगद् गुरवे नमः
४३४ . देवाचार्याय नमः
४३५ . सत्यवादिने नमः
४३६ . ब्रह्मवादिने नमः
४३७ . कलाधराय नमः
४३८ . सप्तपातालगामिने नमः
४३९ . मलयाचलसंश्रयाय नमः
४४० . उत्तराशास्थिताय नमः 
४४१ . श्रीदाय नमः
४४२ . दिव्यौषधिवशाय नमः
४४३ . खगाय नमः
४४४ . शाखामृगाय नमः
४४५ . कपीन्द्राय नमः
४४६ . पुराणश्रुतिचन्चुराय नमः
४४७ . चतुरब्राह्मणाय नमः
४४८ . योगिने नमः
४४९ . योगगम्याय नमः
४५० . परस्मै नमः
४५१ . अवरस्मै नमः
४५२ . अनादिनिधनाय नमः
४५३ . व्यासाय नमः
४५४ . वैकुण्ठाय नमः
४५५ . पृथिवीपतये नमः
४५६ . अपराजिताय नमः
४५७ . जितारातये नमः
४५८ . सदानन्दाय नमः
४५९ . दयायुताय नमः
४६० . गोपालाय नमः
४६१ . गोपतये नमः
४६२ . गोप्त्रे नमः
४६३ . कलिकालपराशराय नमः
४६४ . मनोवेगिने नमः
४६५ . सदायोगिने नमः
४६६ . संसारभयनाशनाय नमः
४६७ . तत्त्वदात्रे नमः
४६८ . तत्त्वज्ञाय नमः
४६९ . तत्त्वाय नमः
४७० . तत्त्वप्रकाशकाय नमः
४७१ . शुद्धाय नमः
४७२ . बुद्धाय नमः
४७३ . नित्यमुक्ताय नमः
४७४ . भक्तराजाय नमः
४७५ . जयद्रथाय नमः
४७६ . प्रलयाय नमः
४७७ . अमितमायाय नमः
४७८ . मायातीताय नमः
४७९ . विमत्सराय नमः
४८०. मायाभर्जितरक्षसे नमः
४८१ . मायानिर्मितविष्टपाय नमः
४८२ . मायाश्रयाय नमः
४८३ . निर्लेपाय नमः
४८४ . मायानिर्वर्तकाय नमः
४८५ . सुखाय नमः
४८६ . सुखिने नमः
४८७ . सुखप्रदाय नमः
४८८ . नागाय नमः
४८९ . महेशकृतसंस्तवाय नमः
४९० . महेश्वराय नमः
४९१ . सत्यसंधाय नमः
४९२ . शरभाय नमः
४९३ . कलिपावनाय नमः
४९४ . सहस्त्रकन्धरबलविध्वंसनविचक्षणाय नमः
४९५ . सहस्त्रबाहवे नमः
४९६ . सहजाय नमः
४९७ . द्विबाहवे नमः
४९८ . द्विभुजाय नमः
४९९ . अमराय नमः
५०० . चतुर्भुजाय नमः
५०१ . दशभुजाय नमः
५०२ . हयग्रीवाय नमः
५०३ . खगाननाय नमः
५०४    कपिवक्त्राय नमः
५०५. कपिपतये नमः  
५०६ . नरसिंहाय नमः
५०७ . महाद्युतये नमः
५०८ . भीषणाय नमः
५०९ . भावगाय नमः
५१० . वन्द्याय नमः
५११ . वराहाय नमः
५१२ . वायुरुपधृषे नमः
५१३ . लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः
५१४ . पराजितदशाननाय नमः
५१५ . पारिजातनिवासिने नमः
५१६ . वटवे नमः
५१७ . वचनकोविदाय नमः
५१८ . सुरसास्यविनिर्मुक्ताय नमः
५१९ . सिंहिकाप्राणहारकाय नमः
५२० . लंकालंकारविध्वंसिने नमः
५२१ . वृषदंशकरुपधृषे नमः
५२२ . रात्रिसंचारकुशलाय नमः
५२३ . रात्रिचरगृहाग्निदाय नमः
५२४ . किंकरान्तकराय नमः
५२५ . जम्बुमालिहन्त्रे नमः ५२६ . उग्रारुपधृषे नमः
५२७ . आकाशचारिणे नमः
५२८ . हरिगाय नमः
५२९ . मेघनादरणोत्सुकाय नमः
५३० . मेघगम्भीरनिनदाय नमः
५३१ . महारावणकुलान्तकाय नमः
५३२ . कालनेमिप्राणहारिणे नमः
५३३ . मकरीशापमोक्षदाय नमः
५३४ . रसाय नमः
५३५ . रसज्ञाय नमः
५३६ . सम्मानाय नमः
५३७ . रुपाय नमः
५३८ . चक्षुषे नमः
५३९ . श्रुतये नमः
५४० . वचसे नमः
५४१ . घ्राणाय नमः
५४२ . गन्धाय नमः
५४३ . स्पर्शनाय नमः
५४४ . स्पर्शाय नमः
५४५ . अहंकारमानगाय नमः
५४६ . नेतिनेतीतिगम्याय नमः
५४७ . वैकुण्ठभजनप्रियाय नमः
५४८ . गिरीशाय नमः
५४९ . गिरिजाकान्ताय नमः
५५० . दुर्वाससे नमः
५५१ . कवये नमः
५५२ . अंगिरसे नमः
५५३ . भृगवे नमः
५५४ . वसिष्ठाय नमः।
५५५ . च्यवनाय नमः
५५६ . नारदाय नमः
५५७ . तुम्बराय नमः
५५८ . अमलाय नमः
५५९ . विश्वक्षेत्राय नमः
५६० . विश्वबीजाय नमः
५६१ . विश्वनेत्राय नमः
५६२ . विश्वपाय नमः
५६३ . याजकाय नमः
५६४ . यजमानाय नमः
५६५ . पावकाय नमः
५६६. पितृभ्यो नमः
५६७ . श्रद्धायै नमः
५६८ . बुद्धयै नमः
५६९ . क्षमायै नमः
५७० . तन्द्रायै नमः
५७१ . मन्त्राय नमः
५७२ . मन्त्रयित्रे नमः
५७३ . स्वराय नमः
५७४ . राजेन्द्राय नमः
५७५ . भूपतये नमः
५७६ . रुण्डमालिने नमः
५७७ . संसारसारथये नमः
५७८ . नित्यसम्पूर्णकामाय नमः
५७९ . भक्तकामदुहे नमः
५८० . उत्तमाय नमः
५८१ . गणपाय नमः
५८२ . केशवाय नमः
५८३ . भ्रात्रे नमः
५८४ . पित्रे नमः
५८५ . मात्रे नमः
५८६ . मारुतये नमः
५८७ . सहस्त्रमूर्घ्ने नमः
५८८ . अनेकास्याय नमः
५८९ . सहस्त्राक्षाय नमः
५९० . सहस्त्रपादे नमः
५९१ . कामजिते नमः
५९२ . कामदहनाय नमः
५९३ . कामाय नमः
५९४ . कामफ़लप्रदाय नमः
५९५ . मुद्रापहारिणे नमः
५९६ . रक्षोघ्नाय नमः
५७९ . क्षितिभारहराय नमः
५९२ . कामदहनाय नमः
५९३ . कामाय नमः
५९४ . कामफ़लप्रदाय नमः
५९५ . मुद्रापहारिणे नमः
५९६ . रक्षोघ्नाय नमः
५९७ . क्षितिभारहराय नमः
५९८ . बलाय नमः
५९९ . नखदंष्ट्रायुधाय नमः
६०० . विष्णवे नमः
   ६०१ . भक्ताभयवरप्रदाय नमः
६०२ . दर्पन्घे नमः
६०३ . दर्पदाय नमः
६०४ . दंष्ट्राशतमूर्तये नमः
६०५ . अमूर्तिमते नमः
६०६ . महानिधये नमः
६०७ . महाभागाय नमः
६०८ . महाभर्गाय नमः
६०९ . महार्द्धिदाय नमः
६१० . महाकाराय नमः
६११ . महायोगिने नमः
६१२ . महातेजसे नमः
६१३ . महाद्युतये नमः
६१४ . महासनाय नमः
६१५ . महानादाय नमः
६१६ . महामन्त्राय नमः
६१७ . महामतये नमः
६१८ . महागमाय नमः
६१९ . महोदाराय नमः
६२० . महादेवात्मकाय नमः
६२१ . विभवे नमः
६२२ . रौद्रकर्मणे नमः
६२३ . क्रूरकर्मणे नमः
६२४ . रत्नाभाय नमः
६२५ . कृतागमाय नमः
६२६ . अम्भोधिलंघनाय नमः
६२७ . सिंहाय नमः
६२८ . सत्यधर्मप्रमोदनाय नमः
६२९ . जितामित्राय नमः
६३० . जयाय नमः
६३१ . सोमाय नमः
६३२ . विजयाय नमः
६३३ . वायुनन्दनाय नमः
६३४ . जीवदात्रे नमः
६३५ . सहस्त्रांशवे नमः
६३६ . मुकुन्दाय नमः
६३७ . भूरिदक्षिणाय नमः
६३८ . सिद्धार्थाय नमः
६३९ . सिद्धिदाय नमः
६४० . सिद्धसंकल्पाय नमः
६४१ . सिद्धिहेतुकाय नमः
६४२ . सप्तपातालचरणाय नमः
६४३ . सप्तर्षिगणवन्दिताय नमः
६४४ . सप्ताब्धिलंघनाय नमः
६४५ . वीराय नमः
६४६ . सप्तद्वीपोरुमण्डलाय नमः
६४७ . सप्तांगराज्यसुखदाय नमः
६४८ . सप्तमातृनिषेविताय नमः
६४९ . सप्तस्वर्लोकमुकुटाय नमः
६५० . सप्तहोत्रे नमः
६५१ . स्वाराश्रयाय नमः
६५२ . सप्तच्छन्दोनिधये नमः
६५३ . सप्तच्छन्दसे नमः
६५४ . सप्तजनाश्रयाय नमः
६५५ . सप्तसामोपगीताय नमः
६५६ . सप्तपातालसंश्रयाय नमः
६५७ . मेधादाय नमः
६५८ . कीर्तिदाय नमः
६५९ . शोकहारिणे नमः
६६० . दौर्भाग्यनाशनाय नमः
६६१ . सर्वरक्षाकराय नमः
६६२ . गर्भदोषघ्ने नमः
६६३ . पुत्रपौत्रदाय नमः
६६४ . प्रतिवादिमुखस्तम्भाय नमः
६६५ . रुष्टचित्तप्रसादनाय नमः
६६६ . पराभिचारशमनाय नमः
६६७ . दुःखन्घे नमः
६६८ . बन्धमोक्षदाय नमः
६६९ . नवद्वारपुराधाराय नमः
६७० . नवद्वारनिकेतनाय नमः
६७१ . नरनारायणस्तुत्याय नमः
६७२. नवनाथमहेश्वराय नमः
६७३  . मेखलिने नमः
६७४ . कवचिने नमः
६७५ . खड् गिने नमः
६७६ . भ्राजिष्णवे नमः
६७७ . जिष्णुसारथये नमः
६७८ . बहुयोजनविस्तीर्णपुच्छाय नमः
६७९ . पुच्छहतासुराय नमः
६८० . दुष्टग्रहनिहन्त्रे नमः
६८१ . पिशाचग्रहघातकाय नमः
६८२ . बालग्रहविनाशिने नमः
६८३ . धर्मनेत्रे नमः
६८४ . कृपाकराय नमः
६८५ . उग्रकृत्याय नमः
६८६ . उग्रवेगाय नमः
६८७ . उग्रनेत्राय नमः  
६८८ . शतक्रतवे नमः
६८९ . शतमन्युनुताय नमः
६९० . स्तुत्याय नमः
६९१ . स्तुतये नमः
६९२ . स्तोत्रे नमः
६९३ . महाबलाय नमः
६९४ . समग्रगुणशालिने नमः
६९५ . व्यग्राय नमः
६९६ . रक्षोविनाशकाय नमः
६९७ . रक्षोऽग्निदाहाय नमः
६९८ . ब्रह्मेशाय नमः
६९९ . श्रीधराय नमः
७०० . भक्तवत्सलाय नमः
७०१ . मेघनादाय नमः
७०२ . मेघरुपाय नमः
७०३ . मेघवृष्टिनिवारकाय नमः
७०४ . मेघजीवनहेतवे नमः
७०५ . मेघश्यामाय नमः
७०६ . परात्मकाय नमः
७०७ . समीरतनयाय नमः
७०८ . योद्ध्रे नमः
७०९ . नृत्यविद्याविशारदाय नमः
७१० . अमोघाय नमः
७११ . अमोघदृष्टये नमः
७१२ . इष्टदाय नमः
७१३ . अरिष्टनाशनाय नमः
७१४ . अर्थाय नमः
७१५ . अनर्थापहारिणे नमः
७१६ . समर्थाय नमः
७१७ . रामसेवकाय नमः
७१८ . अर्थिवन्द्याय नमः
७१९ . असुरारातये नमः
७२०. पुण्डरीकाक्षाय नमः
७२१  . आत्मभुवे नमः
७२२ . संकर्षणाय नमः
७२३ . विशुद्धात्मने नमः
७२४ . विद्याराशये नमः
७२५ . सुरेश्वराय नमः
७२६ . अचलोद्धारकाय नमः
७२७ . नित्याय नमः
७२८ . सेतुकृते नमः
७२९ . रामसारथये नमः
७३० . आनन्दाय नमः
७३१. परमानन्दाय नमः
७३२ . मत्स्याय नमः
७३३ . कूर्माय नमः
७३४ . निराश्रयाय नमः
७३५ . वाराहाय नमः
७३६ . नारसिंहाय नमः
७३७ . वामनाय नमः
७३८ . जगदग्निजाय नमः
७३९ . रामाय नमः
७४० . कृष्णाय नमः
७४१ . शिवाय नमः
७४२ . बुद्धाय नमः
७४३ . कल्किने नमः
७४४ . रामाश्रयाय नमः
७४५ . हरये नमः
७४६ . नन्दिने नमः
७४७ . भृंगिणे नमः
७४८ . चण्डिने नमः
७४९ . गणेशाय नमः
७५० . गणसेविताय नमः
७५१ . कर्माध्यक्षाय नमः
७५२ . सुराध्यक्षाय नमः
७५३ . विश्रामाय नमः
७५४ . जगतीपतये नमः
७५५ . जगन्नाथाय नमः
७५६ . कपीशाय नमः
७५७ . सर्वावासाय नमः
७५८ . सदाश्रयाय नमः
७५९ . सुग्रीवादिस्तुताय नमः
७६० . दान्ताय नमः
७६१ . सर्वकर्मणे नमः
७६२ . प्लवंगमाय नमः
७६३ . नखदारितरक्षसे नमः
७६४ . नखयुद्धविशारदाय नमः
७६५ . कुशलाय नमः
७६६ . सुधनाय नमः
७६७ . शेषाय नमः
७६८ . वासुकये नमः
७६९ . तक्षकाय नमः
७७० . स्वर्णवर्णाय नमः
७७१ . बलाढयाय नमः
७७२ . पुरुजेत्रे नमः
७७३ . अघनाशनाय नमः
७७४ . कैवल्यरुपाय नमः
७७५ . कैवल्याय नमः
७७६ . गरुडाय नमः
७७७ . पन्नगोरगाय नमः
७७८ . किल् किल् रावहतारातये नमः
७७९ . गर्वपर्वतभेदनाय नमः
७८० . वज्रांगाय नमः
७८१ . ॐ वज्रदंष्ट्राय नमः
७८२ . भक्तवज्रनिवारकाय नमः
७८३ . नखायुधाय नमः
७८४ . मणिग्रीवाय नमः
७८५ . ज्वालामालिने नमः
७८६ . भास्कराय नमः
७८७ . प्रौढप्रतापाय नमः
७८८ . तपनाय नमः
७८९ . भक्ततापनिवारकाय नमः
७९० . शरणाय नमः
७९१ . जीवनाय नमः
७९२ . भोक्त्रे नमः
७९३ . नानाचेष्टाय नमः
७९४ . अचन्चलाय नमः
७९५ . स्वस्तिमते नमः
७९६ . स्वास्तिदाय नमः
७९७ . दुःखशातनाय नमः
७९८ . पवनात्मजाय नमः
७९९ . पावनाय नमः
८०० . पवनाय नमः
८०१ . कान्ताय नमः
८०२ . भक्तागःसहनाय नमः
८०३ . बलिने नमः
८०४ . मेघनादरिपवे नमः
८०५ . मेघनादसंहतराक्षसाय नमः
८०६ . क्षराय नमः
८०७ . अक्षराय नमः
८०८ . विनीतात्मने नमः
८०९ . वानरेशाय नमः
८१० . संता गतये नमः
८११ . श्रीकण्ठाय नमः
८१२ . शितिकण्ठाय नमः
८१३ . सहायाय नमः
८१४ . सहनायकाय नमः
८१५ . अस्थूलाय नमः
८१६ . अनणवे नमः
८१७ . भर्गाय नमः
८१८ . दिव्याय नमः
८१९ . संसृतिनाशनाय नमः
८२० . अध्यात्मविद्यासाराय नमः
८२१ . अध्यात्मकुशलाय नमः
८२२ . सुधिये नमः
८२३ . अकल्मषाय नमः
८२४ . सत्यहेतवे नमः
८२५ . सत्यदाय नमः
८२६ . सत्यगोचराय नमः
८२७ . सत्यगर्भाय नमः
८२८ . सत्यरुपाय नमः
८२९ . सत्याय नमः
८३० . सत्यपराक्रमाय नमः
८३१ . अन्जनाप्राणलिंगाय नमः
८३२ . वायुवंशोद्भवाय नमः
८३३ . शुभाय नमः
८३४ . भद्ररुपाय नमः
८३५ . रुद्ररुपाय नमः
८३६ . सुरुपाय नमः
८३७ . चित्ररुपधृषे नमः
८३८ . मैनाकवन्दिताय नमः
८३९ . सूक्ष्मदर्शनाय नमः
८४० . विजयाय नमः
८४१ . जयाय नमः
८४२ . क्रान्तदिड्.मण्डलाय नमः
८४३ . रुद्राय नमः
८४४ . प्रकटीकृतविक्रमाय नमः
८४५ . कम्बुकण्ठाय नमः
८४६ . प्रसन्नात्मने नमः
८४७ . हृस्वनासाय नमः
८४८ . वृकोदराय नमः
८४९ . लम्बौष्ठाय नमः
८५० . कुण्डलिने नमः
८५१ . चित्रमालिने नमः
८५२ . योगविदां वराय नमः
८५३ . विपश्चिते नमः
८५४ . कवये नमः
८५५ . आनन्दविग्रहाय नमः
८५६ . अनल्पशासनाय नमः
८५७ . फ़ाल्गुनीसूनवे नमः
८५८ . अव्यग्राय नमः
८५९ . योगात्मने नमः
८६० . योगतत्पराय नमः
८६१ . योगविदे नमः
८६२ . योगकर्त्रे नमः
८६३ . योगयोनये नमः
८६४ . दिगम्बराय नमः
८६५ . अकारादिहकारान्तवर्णनिर्मितविग्रहाय नमः
८६६ . उलूखलमुखाय नमः
८६७ . सिद्धसंस्तुताय नमः
८६८ . प्रमथेश्वराय नमः
८६९ . श्लिष्टजंघाय नमः
८७० . श्लिष्टजानवे नमः
८७१ . श्लिष्टपाणये नमः
८७२ . शिखाधराय नमः
८७३ . सुशर्मणे नमः
८७४ . अमितशर्मणे नमः
८७५ . नारायणपरायणाय नमः  
८७६ . जिष्णवे नमः
८७७ . भविष्णवे नमः
८७८ . रोचिष्णवे नमः
८७९ . ग्रसिष्णवे नमः
८८० . स्थाणवे नमः
८८१ . हरिरुद्रानुसेकाय नमः
८८२ . कम्पनाय नमः
८८३ . भूमिकम्पनाय नमः
८८४ . गुणप्रवाहाय नमः
८८५ . सूत्रात्मने नमः
८८६ . वीतरागस्तुतिप्रियाय नमः
८८७ . नागकन्याभयध्वंसिने नमः
८८८ . रुक्मवर्णाय नमः
८८९ . कपालभृते नमः
८९० . अनाकुलाय नमः
८९१ . भवोपायाय नमः
८९२ . अनपायाय नमः
८९३ . वेदपारगाय नमः
८९४ . अक्षराय नमः
८९५ . पुरुषाय नमः  
८९६ . लोकनाथाय नमः
८९७ . ऋक्षप्रभवे नमः
८९८ . दृढाय नमः
८९९ . अश्टागं योग फ़लभुजे नमः।
९०० . सत्यसंधाय नमः
९०१ . पुरुष्टुताय नमः
९०२ . श्मशानस्थाननिलयाय नमः।
९०३ . प्रेतविद्रावणक्षमाय नमः
९०४ . पन्चाक्षरपराय नमः
९०५ . पन्चमातृकाय नमः
९०६ . रन्जनध्वजाय नमः
९०७ . योगिनीवृन्दवन्द्यश्रियै नमः
९०८ . शत्रुन्घाय नमः
९०९ . अनन्तविक्रमाय नमः
९१० . ब्रह्मचारिणे नमः
९११ . इन्द्रियरिपवे नमः
९१२ . धृतदण्डाय नमः
९१३ . दशात्मकाय नमः
९१४ . अप्रपन्चाय नमः
९१५ . सदाचाराय नमः
९१६ . शूरसेनाविदारकाय नमः
९१७ . वृद्धाय नमः
९१८ . प्रमोदाय नमः
९१९ . आनन्दाय नमः
९२० . सप्तद्वीपपतिन्धराय नमः
९२१ . नवद्वारपुराधाय नमः
९२२ . प्रत्यग्राय नमः
९२३ . सामगायकाय नमः
९२४ . षट्चक्रधान्मे नमः
९२५ . स्वर्लोकाभयकृते नमः
९२६  . मानदाय नमः
९२७ . मदाय नमः
९२८ . सर्ववश्यकराय नमः
९२९ . शक्तये नमः
९३० . अनन्ताय नमः
९३१ . अनन्तमंगलाय  
९३२ . अष्टमूर्तये नमः
९३३ . नयोपेताय नमः
९३४ . विरुपाय नमः
९३५ . सुरसुन्दराय नमः
९३६ . धूमकेतव नमः
९३७ . महाकेतवे नमः
९३८ . सत्यकेतवे नमः
९३९ . महारथाय नमः
९४० . नन्दिप्रियाय नमः
९४१ . स्वतन्त्राय नमः
९४२ . मेखलिने नमः
९४३ . डमरुप्रियाय नमः
९४४ . लौहांगाय नमः
९४५ . सर्वविदे नमः
९४६ . धन्विने नमः
९४७ . खण्डलाय नमः
९४८ . शर्वाय नमः
९४९ . ईश्वराय नमः
९५० . फ़लभुजे नमः
९५१ . फ़लहस्ताय नमः
९५२ . सर्वकर्मफ़लप्रदाय नमः
९५३ . धर्माध्यक्षाय नमः
९५४ . धर्मपालाय नमः
९५५ . धर्माय नमः
९५६ . धर्मप्रदाय नमः
९५७ . अर्थदाय नमः
९५८ . पन्चविंशतितत्त्वज्ञाय नमः
९५९ . तारकाय नमः
९६० . ब्रह्मतत्पराय नमः
९६१ . त्रिमार्गवसतये नमः
९६२ . भीमाय नमः
९६३ . सर्वदुःखनिबर्हणाय नमः
९६४ . ऊर्जस्वते नमः
९६५ . निष्कलाय नमः
९६६ . शूलिने नमः
९६७ . मौलिने नमः
९६८ . गर्जन्निशाचराय नमः
९६९ . रक्ताम्बरधराय नमः
९७० . रक्ताय नमः
९७१ . रक्तमाल्याय नमः
९७२ . विभूषणाय नमः
९७३ . वनमालिने नमः
९७४ . शुभांगाय नमः
९७५ . श्वेताय नमः |
९७६ . श्वेताम्बराय नमः
९७७ . यूने नमः
९७८ . जयाय नमः
९७९ . अजयपरीवाराय नमः
९८० . सहस्त्रवदनाय नमः
९८१ . कपये नमः
९८२ . शाकिनीडाकिनीयक्षरक्षोभूतप्रभन्जकाय नमः
९८३ . सद्योजाताय नमः
९८४ . कामगतये नमः
९८५ . ज्ञानमूर्तये नमः
९८६ . यशस्कराय नमः
९८७ . शम्भुतेजसे नमः
९८८ . सार्वभौमाय नमः
९८९ . विष्णुभक्ताय नमः
९९० . प्लवंगमाय नमः
९९१  . चतुर्नवतिमन्त्रज्ञाय नमः
९९२ . पौलस्त्यबलदर्पघ्ने नमः
९९३ . सर्वलक्ष्मीप्रदाय नमः
९९४ . श्रीमते नमः
९९५ . अंगदप्रियाय नमः
९९६ . ईडिताय नमः
९९७ . स्मृतिबीजाय नमः
९९८ . सुरेशानाय नमः
९९९ . संसारभयनाशनाय नमः
१००० . उत्तमाय नमः

।। इति मन्त्रमहार्णवे श्रीहनुमत्सहस्त्रनामावलिः सम्पूर्णा ||