17 November 2012

फेफडे से सम्बंधित इलाज



सुबह-सुबह थोडा सा व्यायाम या योगासान करने से हमारा पूरा दिन स्फर्र्ति और ताजगी भरा बना रहता है । यदि आपको दिनभर अत्यधिक मानसिक तनाव झेलना पडता है तो यह क्रिया करें, दिनभर चुस्त रहेंगे । इस क्रिया को करने वाले व्यक्ति से फेफडे और साँस से सम्बंधित बीमारियाँ सदैव दूर रहेंगी ।


क्रिया की विधिः समतल और हवादार स्थान पर किसी भी आसन जैसे पद्मासन या सुखासन में बैठकर इस क्रिया को किया जाता है । दोनों हाथ को दोनों घुटनों पर रखें । अब नाक के दोनों छ्रि्र से तेजी से गहरी सांस लें । फिर सांस को बिना रोके, बाहर छोड दें । इस तरह कई बार तेज गति से सांस लें और फिर उसी तेज गति से सांस छोडते हुए इस क्रिया को करें । इस क्रिया में पहले कम और बाद में धीरे-धीरे संख्या को बढाएँ ।



इस क्रिया से लाभः इस क्रिया के अभ्यास से फेफडे में स्वच्छ वायु भरने से फेफडे स्वास्थ्य और रोग दूर होते हैं । यह आमाशय तथा पाचक अंग को स्वास्थ्य रखता है । इससे पाचन शक्ति और वायु में वृद्धि होती है तथा शरीर में शक्ति और स्फर्र्ति आती है । इस क्रिया से सांस संबंधी कई बीमारियाँ दूर ही रहती हैं ।


सावधानी किसी व्यक्ति को दमा या सांस सम्बंधी कोई बीमारी हो तो वह अपने डाँक्टर से परामर्श कर ही इस क्रिया को करें ।



रंग-रुप भी निखरता है प्राणायाम से प्राणायाम ऐसी क्रिया है जिसके नियमित अभ्यास से बडी-बडी बीमारियाँ साधक से दूर रहती है । साथ ही व्यक्ति का रंग-रुप भी निखर जाता है । शीतली प्राणायाम के संबंध में ऐसा माना जाता है कि इसका नियमिति अभ्यास करने वाले व्यक्ति को कभी जहर नहीं चढता ।


शीतली प्राणायाम की विधिः शीतली प्राणायाम और सीत्कारी प्राणायाम लगभग एक जैसे ही हैं । अंतर केवल इतना है कि सीत्कारी प्राणायाम में जीभ गोलकर तालु से लगा ली जाती है और शीतली में जीभ को गोलकार बना लेते है और सीत्कार करते हुए मुँह द्वारा वायु को पेट में भर लेते हैं । इस प्रणायाम को खडे होकर, चलते हुए अथवा बैठकर भी कर सकते हैं । इसमें मूँह को गोल करके जीभ को भी गोल कर लिया जाता है और होंठ को बाहर निकालकर सांस लेते हैं । जितना संभव हो उतना समय सांस रोककर फिर सांस को बाहर निकाल दिया जाता है ।



शीतली प्राणायाम के लाभ;


इस प्रणायाम से पित्त, कफ, अपच जैसी बीमारियाँ बहुत जल्द समाप्त हो जाती है । योग शास्त्र के अनुसार लंबे समय तक इस प्रणायाम के नियमित अभ्यास से व्यक्ति पर जहर का भी असर नहीं होता ।

According to health care professionals, living with unhealthy lungs can cause an array of problems. Harmful particles in the air are often leading causes of sickness, while other activities such as smoking can make the problems even worse.
To help avoid respiratory problems, cleansing the lungs usingnatural remedies is simple. Following a three- to five-day cleansing program is often effective in keeping the lungs working properly.
Diet

Step 1


Remove all dairy products from your diet. Dairy products can impede the digestion process making detoxification slow and difficult.


Step 2
Drink one cup of herbal laxative tea before you go to bed the evening before you begin your lung cleanse. This will help remove toxins in your intestines and rid your system of. There are many brands of herbal laxative teas. "Get Regular" by Yogi is among the top choices.


Step 3


Squeeze two lemons into and eight- to 10- ounce glass of water and drink it before your first meal. Lemons help digest alkalizing foods, which help repair damaged lung tissue.


Step 4


Drink a 10-ounce glass of grapefruit juice with breakfast. Grapefruit juice contains natural antioxidants that promote a healthy respiratory system.


Step 5


Drink a 10-ounce glass of carrot juice between breakfast and your second meal. Carrot juice helps alkalize your blood and is high in beta-carotene. Beta-carotene produces Vitamin A.

Step 6


Discover the power of Noni juice. Noni juice is extracted from the Noni tree, which grows in Southeast Asia. It is is extremely high in potassium and aids in repairing damaged tissue. Mix 2 oz. of Noni juice with an eight-ounce glass of spring water. Noni juice can be purchased from most health-food stores. There are several brands out there, however, it is important to use pure Noni.

Step 7


Drink one cup of mucus-cleansing tea before dinner. Mucus-cleansing tea is rich in rose hips, ginger and peppermint, which are all strong fighters against congestion and mucus buildup. Cleansing tea is readily available in supermarkets and health-food stores.

Step 8


Drink a 12-ounce glass of of pure cranberry juice before bed. Cranberry juice is a powerful antioxidant and will aid in fighting bacteria in the lungs. Cranberries also aid in cleansing the blood.





Physical Care

Step 1


Enjoy a 20-minute sauna at least once a day during your lung cleanse. A sauna will help open your pores, allowing toxins to leave the body through perspiration. If you don't have access to a sauna, sit in a hot bath.


Step 2

Take a brisk walk at least once day. Maintain a rhythm, inhaling deeply an exhaling slowly without becoming dizzy.

Step 3


Do a mucus cleanse at least once a day or as-needed. Place five to 10 drops of eucalyptus oil into two quarts of simmering water. Drape a dry hand towel over the back of your head and slowly inhale the steam until the water cools. The oil's properties in the steam will help loosen mucus. Using a Netty pot will cleanse the sinuses and rid your lungs of unwanted mucus.





16 November 2012

तुलसी के गुणकारी उपयोग




१. तुलसी रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित करने की क्षमता रखती है !!

२. शरीर के वजन को नियंत्रित रखने हेतु भी तुलसी अत्यंत गुणकारी है !! इसके नियमित सेवन से भारी व्यक्ति का वजन घटता है एवं पतले व्यक्ति का वजन बढ़ता है यानी तुलसी शरीर का वजन आनुपातिक रूप से नियंत्रित करती है !!

३. तुलसी के रस की कुछ बूँदों में थोड़ा-सा नमक मिलाकर बेहोश व्यक्ति की नाक में डालने से उसे शीघ्र होश आ जाता है !!

४. चाय बनाते समय तुलसी के कुछ पत्ते साथ में उबाल लिए जाएँ तो सर्दी, बुखार एवं मांसपेशियों के दर्द में राहत मिलती है !!

५. १० ग्राम तुलसी के रस को ५ ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी एवं अस्थमा के रोगी को ठीक किया जा सकता है !!

६. तुलसी के काढ़े में थोड़ा-सा सेंधा नमक एवं पीसी सौंठ मिलाकर सेवन करने से कब्ज दूर होती है !!

७. दोपहर भोजन के पश्चात तुलसी की पत्तियाँ चबाने से पाचन शक्ति मजबूत होती है !!

८. १० ग्राम तुलसी के रस के साथ ५ ग्राम शहद एवं ५ ग्राम पिसी कालीमिर्च का सेवन करने से पाचन शक्ति की कमजोरी समाप्त हो जाती है !!

९. दूषित पानी में तुलसी की कुछ ताजी पत्तियाँ डालने से पानी का शुद्धिकरण किया जा सकता है !!

१०. रोजाना सुबह पानी के साथ तुलसी की ५ पत्तियाँ निगलने से कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों एवं दिमाग की कमजोरी से बचा जा सकता है !! इससे स्मरण शक्ति को भी मजबूत किया जा सकता है !!

११. ४-५ भुने हुए लौंग के साथ तुलसी की पत्ती चूसने से सभी प्रकार की खाँसी से मुक्ति पाई जा सकती है !!

१२. तुलसी के रस में खड़ी शक्‍कर मिलाकर पीने से सीने के दर्द एवं खाँसी से मुक्ति पाई जा सकती है !!

१३. तुलसी के रस को शरीर के चर्मरोग प्रभावित अंगों पर मालिश करने से दाग, एक्जिमा एवं अन्य चर्मरोगों से मुक्ति पाई जा सकती है !!

१४. तुलसी की पत्तियों को नींबू के रस के साथ पीस कर पेस्ट बनाकर लगाने से एक्जिमा एवं खुजली के रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है !!



*** रूद्राक्ष को कैसे पहचाने ***



1) प्रायः पानी में डूबने वाला रूद्राक्ष असली और जो पानी पर तैर जाए उसे नकली माना जाता है। लेकिन यह सच नहीं है। पका हुआ रूद्राक्ष पानी में डूब जाता है जबकी कच्चा रूद्राक्ष पानी पर तैर जाता है। इसलिए इस प्रक्रिया से रूद्राक्ष के पके या कच्चे होने का पता तो लग सकता है, असली या नकली होने का नहीं।

2) प्रायः गहरे रंग के रूद्राक्ष को अच्छा माना जाता है और हल्के रंग वाले
को नहीं। असलियत में रूद्राक्ष का छिलका उतारने के बाद उसपर रंग चढ़ाया जाता है। बाजार में मिलने वाली रूद्राक्ष की मालाओं को पिरोने के बाद पीले रंग से रंगा जाता है। रंग कम होने से कभी-कभी हल्का रह जाता है। काले और गहरे भूरे रंग के दिखने वाले रूद्राक्ष प्रायः इस्तेमाल किए हुए होते हैं, ऐसा रूद्राक्ष के तेल या पसीने के संपर्क में आने से होता है।

3) कुछ रूद्राक्षों में प्राकृतिक रूप से छेद होता है ऐसे रूद्राक्ष बहुत शुभ माने जाते हैं। जबकि ज्यादातर रूद्राक्षों में छेद करना पड़ता है।

4) दो अंगूठों या दो तांबे के सिक्कों के बीच घूमने वाला रूद्राक्ष असली है यह भी एक भ्रांति ही है। इस तरह रखी गई वस्तु किसी दिशा में तो घूमेगी ही। यह उस पर दिए जाने दबाव पर निर्भर करता है।

5) रूद्राक्ष की पहचान के लिए उसे सुई से कुरेदें। अगर रेशा निकले तो असली और न निकले तो नकली होगा।

6) नकली रूद्राक्ष के उपर उभरे पठार एकरूप हों तो वह नकली रूद्राक्ष है। असली रूद्राक्ष की उपरी सतह कभी भी एकरूप नहीं होगी। जिस तरह दो मनुष्यों के फिंगरप्रिंट एक जैसे नहीं होते उसी तरह दो रूद्राक्षों के उपरी पठार समान नहीं होते। हां नकली रूद्राक्षों में कितनों के ही उपरी पठार समान हो सकते हैं।


7) कुछ रूद्राक्षों पर शिवलिंग, त्रिशूल या सांप आदी बने होते हैं। यह प्राकृतिक रूप से नहीं बने होते बल्कि कुशल कारीगरी का नमूना होते हैं। रूद्राक्ष को पीसकर उसके बुरादे से यह आकृतियां बनाई जाती हैं। इनकी पहचान का तरीका आगे लिखूंगा।

8) कभी-कभी दो या तीन रूद्राक्ष प्राकृतिक रूप से जुड़े होते हैं। इन्हें गौरी शंकर या गौरी पाठ रूद्राक्ष कहते हैं। इनका मूल्य काफी अधिक होता है इस कारण इनके नकली होने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है। कुशल कारीगर दो या अधिक रूद्राक्षों को मसाले से चिपकाकर इन्हें बना देते हैं।

9) प्रायः पांच मुखी रूद्राक्ष के चार मुंहों को मसाला से बंद कर एक मुखी कह कर बेचा जाता है जिससे इनकी कीमत बहुत बढ़ जाती है। ध्यान से देखने पर मसाला भरा हुआ दिखायी दे जाता है।

10) कभी-कभी पांच मुखी रूद्राक्ष को कुशल कारीगर और धारियां बना अधिक मुख का बना देते हैं। जिससे इनका मूल्य बढ़ जाता है। प्राकृतिक तौर पर बनी धारियों या मुख के पास के पठार उभरे हुए होते हैं जबकी मानव निर्मित पठार सपाट होते हैं। ध्यान से देखने पर इस बात का पता चल जाता है।

इसी के साथ मानव निर्मित मुख एकदम सीधे होते हैं जबकि प्राकृतिक रूप से बने मुख पूरी तरह से सीधे नहीं होते।

11) प्रायः बेर की गुठली पर रंग चढ़ाकर उन्हें असली रूद्राक्ष कहकर बेच दिया जाता है। रूद्राक्ष की मालाओं में बेर की गुठली का ही उपयोग किया जाता है।

12) रूद्राक्ष की पहचान का तरीका- एक कटोरे में पानी उबालें। इस उबलते पानी में एक-दो मिनट के लिए रूद्राक्ष डाल दें। कटोरे को चूल्हे से उतारकर ढक दें। दो चार मिनट बाद ढक्कन हटा कर रूद्राक्ष निकालकर ध्यान से देखें। यदि रूद्राक्ष में जोड़ लगाया होगा तो वह फट जाएगा। दो रूद्राक्षों को चिपकाकर गौरीशंकर रूद्राक्ष बनाया होगा या शिवलिंग, सांप आदी चिपकाए होंगे तो वह अलग हो जाएंगे।

जिन रूद्राक्षों में सोल्यूशन भरकर उनके मुख बंद करे होंगे तो उनके मुंह खुल जाएंगे। यदि रूद्राक्ष प्राकृतिक तौर पर फटा होगा तो थोड़ा और फट जाएगा। बेर की गुठली होगी तो नर्म पड़ जाएगी, जबकि असली रूद्राक्ष में अधिक अंतर नहीं पड़ेगा।

यदि रूद्राक्ष पर से रंग उतारना हो तो उसे नमक मिले पानी में डालकर गर्म करें उसका रंग हल्का पड़ जाएगा। वैसे रंग करने से रूद्राक्ष को नुकसान नहीं होता है।


गला और छाती की बीमारी का इलाज



गले में किनती भी ख़राब से ख़राब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अच्छी दवा है हल्दी । जैसे गले में दर्द है, खरास है , गले में खासी है, गले में कफ जमा है, गले में टोनसीलाईटिस हो गया ; ये सब बिमारिओं में आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना और मुह खोल कर गले में डाल देना , और फिर थोड़ी देर चुप होके बैठ जाना तो ये हल्दी गले में निचे उतर जाएगी लार के साथ ; और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरुरत नही । ये छोटे बच्चो को तो जरुर करना ; बच्चो के टोन्सिल जब बहुत तकलीफ देते है न तो हम ऑपरेशन करवाके उनको कटवाते है ; वो करने की जरुरत नही है हल्दी से सब ठीक होता है ।


गले और छाती से जुडी हुई कुछ बीमारिया है जैसे खासी ; इसका एक इलाज तो कच्ची हल्दी का रस है जो गले में डालने से तुरन्त  ठीक हो जाती है चाहे कितनी भी जोर की खासी हो । 

दूसरी दवा है अदरक , ये जो अदरक है इसका छोटा सा टुकड़ा मुह में रख लो और ट़ाफी की तरह चुसो खासी तुरन्त  बंद  हो जाएगी । अगर किसी को खासते खासते चेहरा लाल पड़ गया हो तो अदरक का रस ले लो और उसमे थोड़ा पान का रस मिला लो दोनों एक एक चम्मच और उसमे मिलाना थोड़ा सा गुड या सेहद । अब इसको थोडा गरम करके पी लेना तो जिसको खासते खासते चेहरा लाल पड़ा है उसकी खासी एक मिनट में बंध हो जाएगी । 

और एक अच्छी दवा है , अनार का रस गरम करके पियो तो खासी तुरन्त ठीक होती है । काली मिर्च है गोल मिर्च इसको मुह में रख के चबालो , पीछे से गरम पानी पी लो तो खासी बंध हो जाएगी, काली मिर्च को चुसो तो भी खासी बंध हो जाती है ।

छाती की कुछ बिमारिया जैसे दमा, अस्थमा, ब्रोंकिओल अस्थमा, इन तीनो बीमारी का सबसे अच्छा दवा है गाय मूत्र ; आधा कप गोमूत्र पियो सबेरे का ताजा ताजा तो दमा ठीक होता है, अस्थमा ठीक होता है, ब्रोंकिओल अस्थमा ठीक होता है । और गोमूत्र पिने से टीबी भी ठीक हो जाता है , लगातार पांच छे महीने पीना पड़ता है । दमा अस्थमा का 

और एक अछि दावा है दालचीनी, इसका पाउडर रोज सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड या सेहद मिलाके गरम पानी के साथ लेने से दमा अस्थमा ठीक कर देती है ।


15 November 2012

श्री बालाजी महाराज




राजस्थान के सवाई माधोपुर और जयपुर की सीमा रेखा पर स्थित मेंहदीपुर कस्बे में बालाजी का एक अतिप्रसिद्ध तथा प्रख्यात मन्दिर है जिसे श्री मेंहदीपुर बालाजी मन्दिर के नाम से जाना जाता है । भूत प्रेतादि ऊपरी बाधाओं के निवारणार्थ यहां आने वालों का तांता लगा रहता है। तंत्र मंत्रादि ऊपरी शक्तियों से ग्रसित व्यक्ति भी यहां पर बनी दवा और तंत्र मंत्र के स्वस्थ होकर लौटते हैं ।

सम्पूर्ण भारत से आने वाले लगभग एक हजार रोगी और उनके स्वजन यहां नित्य ही डेरा डाले रहते हैं ।

बालाजी का मन्दिर मेंहदीपुर नामक स्थान पर दो पहाड़ियों के बीच स्थित है , इसलिए इन्हें घाटे वाले बाबा जी भी कहा जाता है । इस मन्दिर में स्थित बजरंग बली की बालरूप मूर्ति किसी कलाकार ने नहीं बनाई, बल्कि यह स्वयंभू है । यह मूर्ति पहाड़ के अखण्ड भाग के रूप में मन्दिर की पिछली दीवार का कार्य भी करती है । इस मूर्ति को प्रधान मानते हुए बाकी मन्दिर का निर्माण कराया गया है । इस मूर्ति के सीने के बाईं तरफ़ एक अत्यन्त सूक्ष्म छिद्र है, जिससे पवित्र जल की धारा निरंतर बह रही है । यह जल बालाजी के चरणों तले स्थित एक कुण्ड में एकत्रित होता रहता है, जिसे भक्त्जन चरणामृत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं । यह मूर्ति लगभग 1000 वर्ष प्राचीन है किन्तु मन्दिर का निर्माण इसी सदी में कराया गया है । मुस्लिम शासनकाल में कुछ बादशाहों ने इस मूर्ति को नष्ट करने की कुचेष्टा की, लेकिन वे असफ़ल रहे । वे इसे जितना खुदवाते गए मूर्ति की जड़ उतनी ही गहरी होती चली गई । थक हार कर उन्हें अपना यह कुप्रयास छोड़ना पड़ा । ब्रिटिश शासन के दौरान सन 1910 में बालाजी ने अपना सैकड़ों वर्ष पुराना चोला स्वतः ही त्याग दिया । भक्तजन इस चोले को लेकर समीपवर्ती मंडावर रेलवेस्टेशन पहुंचे, जहां से उन्हें चोले को गंगा में प्रवाहित करने जाना था । ब्रिटिश स्टेशन मास्टर ने चोले को निःशुल्क ले जाने से रोका और उसका लगेज करने लगा, लेकिन चमत्कारी चोला कभी मन भर ज्यादा हो जाता और कभी दो मन कम हो जाता । असमंजस में पड़े स्टेशन मास्टर को अंततः चोले को बिना लगेज ही जाने देना पड़ा और उसने भी बालाजी के चमत्कार को नमस्कार किया । इसके बाद बालाजी को नया चोला चढाया गया । यज्ञ हवन और ब्राह्मण भोज एवं धर्म ग्रन्थों का पाठ किया गया । एक बार फ़िर से नए चोले से एक नई ज्योति दीप्यमान हुई । यह ज्योति सारे विश्व का अंधकार दूर करने में सक्षम है । बालाजी महाराज के अलावा यहां श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल कप्तान ( भैरव ) की मूर्तियां भी हैं । प्रेतराज सरकार जहां द्ण्डाधिकारी के पद पर आसीन हैं वहीं भैरव जी कोतवाल के पद पर । यहां आने पर ही सामान्यजन को ज्ञात होता है कि भूत प्रेतादि किस प्रकार मनुष्य को कष्ट पहुंचाते हैं और किस तरह सहज ही उन्हें कष्ट बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है । दुखी कष्टग्रस्त व्यक्ति को मंदिर पहुंचकर तीनों देवगणों को प्रसाद चढाना पड़ता है । बालाजी को लड्डू प्रेतराज सरकार को चावल और कोतवाल कप्तान (भैरव) को उड़द का प्रसाद चढाया जाता है । इस प्रसाद में से दो लड्डू रोगी को खिलाए जाते हैं और शेष प्रसाद पशु पक्षियों को डाल दिया जाता है । ऐसा कहा जाता है कि पशु पक्षियों के रूप में देवताओं के दूत ही प्रसाद ग्रहण कर रहे होते हैं । प्रसाद हमेशा थाली या दोने में रखकर दिया जाता है । लड्डू खाते ही रोगी व्यक्ति झूमने लगता है और भूत प्रेतादि स्वयं ही उसके शरीर में आकर बड़बड़ाने लगते है । स्वतः ही वह हथकडी और बेड़ियों में जकड़ जाता है । कभी वह अपना सिर धुनता है कभी जमीन पर लोट पोट कर हाहाकार करता है । कभी बालाजी के इशारे पर पेड़ पर उल्टा लटक जाता है । कभी आग जलाकर उसमें कूद जाता है । कभी फ़ांसी या सूली पर लटक जाता है । मार से तंग आकर भूत प्रेतादि स्वतः ही बालाजी के चरणों में आत्मसमर्पण कर देते हैं अन्यथा समाप्त कर दिये जाते हैं । बालाजी उन्हें अपना दूत बना लेते हैं । संकट टल जाने पर बालाजी की ओर से एक दूत मिलता है जोकि रोग मुक्त व्यक्ति को भावी घटनाओं के प्रति सचेत करता रहता है । बालाजी महाराज के मन्दिर में प्रातः और सायं लगभग चार चार घंटे पूजा होती है । पूजा में भजन आरतियों और चालीसों का गायन होता है । इस समय भक्तगण जहां पंक्तिबद्ध हो देवताओं को प्रसाद अर्पित करते हैं वहीं भूत प्रेत से ग्रस्त रोगी चीखते चिल्लाते उलट पलट होते अपना दण्ड भुगतते हैं ।

हजारों वर्षों से जीवित है सात महामानव


श्लोक : 'अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः॥'

अर्थात् : अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सभी चिरंजीवी हैं।

यह दुनिया का एक आश्चर्य है। विज्ञान इसे नहीं मानेगा, योग और आयुर्वेद कुछ हद तक इससे सहमत हो सकता है, लेकिन जहाँ हजारों वर्षों की बात हो तो फिर योगाचार्यों के लिए भी शोध का विषय होगा। इसका दावा नहीं किया जा सकता और इसके किसी भी प्रकार के सबूत नहीं है। यह आलौकिक है। किसी भी प्रकार के चमत्कार से इन्कार ‍नहीं किया जा सकता। सिर्फ शरीर बदल-बदलकर ही हजारों वर्षों तक जीवित रहा जा सकता है। यह संसार के सात आश्चर्यों की तरह है।

हिंदू इतिहास और पुराण अनुसार ऐसे सात व्यक्ति हैं, जो चिरंजीवी हैं। यह सब किसी न किसी वचन, नियम या शाप से बंधे हुए हैं और यह सभी दिव्य शक्तियों से संपन्न है। योग में जिन अष्ट सिद्धियों की बात कही गई है वे सारी शक्तियाँ इनमें विद्यमान है। यह परामनोविज्ञान जैसा है, जो परामनोविज्ञान और टेलीपैथी विद्या जैसी आज के आधुनिक साइंस की विद्या को जानते हैं वही इस पर विश्वास कर सकते हैं। आओ जानते हैं कि हिंदू धर्म अनुसार कौन से हैं यह सात जीवित महामानव।

1. बलि : राजा बलि के दान के चर्चे दूर-दूर तक थे। देवताओं पर चढ़ाई करने राजा बलि ने इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया था। बलि सतयुग में भगवान वामन अवतार के समय हुए थे। राजा बलि के घमंड को चूर करने के लिए भगवान ने ब्राह्मण का भेष धारण कर राजा बलि से तीन पग धरती दान में माँगी थी। राजा बलि ने कहा कि जहाँ आपकी इच्छा हो तीन पैर रख दो। तब भगवान ने अपना विराट रूप धारण कर दो पगों में तीनों लोक नाप दिए और तीसरा पग बलि के सर पर रखकर उसे पाताल लोक भेज दिया।

2. परशुराम : परशुराम राम के काल के पूर्व महान ऋषि रहे हैं। उनके पिता का नाम जमदग्नि और माता का नाम रेणुका है। पति परायणा माता रेणुका ने पाँच पुत्रों को जन्म दिया, जिनके नाम क्रमशः वसुमान, वसुषेण, वसु, विश्वावसु तथा राम रखे गए। राम की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें फरसा दिया था इसीलिए उनका नाम परशुराम हो गया।
भगवान पराशुराम राम के पूर्व हुए थे, लेकिन वे चिरंजीवी होने के कारण राम के काल में भी थे। भगवान परशुराम विष्णु के छठवें अवतार हैं। इनका प्रादुर्भाव वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ, इसलिए उक्त तिथि अक्षय तृतीया कहलाती है। इनका जन्म समय सतयुग और त्रेता का संधिकाल माना जाता है।

3. हनुमान : अंजनी पुत्र हनुमान को भी अजर अमर रहने का वरदान मिला हुआ है। यह राम के काल में राम भगवान के परम भक्त रहे हैं। हजारों वर्षों बाद वे महाभारत काल में भी नजर आते हैं। महाभारत में प्रसंग हैं कि भीम उनकी पूँछ को मार्ग से हटाने के लिए कहते हैं तो हनुमानजी कहते हैं कि तुम ही हटा लो, लेकिन भीम अपनी पूरी ताकत लगाकर भी उनकी पूँछ नहीं हटा पाता है।

4. विभिषण : रावण के छोटे भाई विभिषण। जिन्होंने राम की नाम की महिमा जपकर अपने भाई के विरु‍द्ध लड़ाई में उनका साथ दिया और जीवन भर राम नाम जपते रहें।

5. ऋषि व्यास : महाभारतकार व्यास ऋषि पराशर एवं सत्यवती के पुत्र थे, ये साँवले रंग के थे तथा यमुना के बीच स्थित एक द्वीप में उत्पन्न हुए थे। अतएव ये साँवले रंग के कारण 'कृष्ण' तथा जन्मस्थान के कारण 'द्वैपायन' कहलाए। इनकी माता ने बाद में शान्तनु से विवाह किया, जिनसे उनके दो पुत्र हुए, जिनमें बड़ा चित्रांगद युद्ध में मारा गया और छोटा विचित्रवीर्य संतानहीन मर गया।

कृष्ण द्वैपायन ने धार्मिक तथा वैराग्य का जीवन पसंद किया, किन्तु माता के आग्रह पर इन्होंने विचित्रवीर्य की दोनों सन्तानहीन रानियों द्वारा नियोग के नियम से दो पुत्र उत्पन्न किए जो धृतराष्ट्र तथा पाण्डु कहलाए, इनमें तीसरे विदुर भी थे। व्यासस्मृति के नाम से इनके द्वारा प्रणीत एक स्मृतिग्रन्थ भी है। भारतीय वांड्मय एवं हिन्दू-संस्कृति व्यासजी की ऋणी है।

6. अश्वत्थामा : अश्वथामा गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र हैं। अश्वस्थामा के माथे पर अमरमणि है और इसीलिए वह अमर हैं, लेकिन अर्जुन ने वह अमरमणि निकाल ली थी। ब्रह्मास्त्र चलाने के कारण कृष्ण ने उन्हें शाप दिया था कि कल्पांत तक तुम इस धरती पर जीवित रहोगे, इसीलिए अश्वत्थामा सात चिरन्जीवियों में गिने जाते हैं। माना जाता है कि वे आज भी जीवित हैं तथा अपने कर्म के कारण भटक रहे हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र एवं अन्य तीर्थों में यदा-कदा उनके दिखाई देने के दावे किए जाते रहे हैं। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर के किले में उनके दिखाई दिए जाने की घटना भी प्रचलित है।

7. कृपाचार्य : शरद्वान् गौतम के एक प्रसिद्ध पुत्र हुए हैं कृपाचार्य। कृपाचार्य अश्वथामा के मामा और कौरवों के कुलगुरु थे। शिकार खेलते हुए शांतनु को दो शिशु प्राप्त हुए। उन दोनों का नाम कृपी और कृप रखकर शांतनु ने उनका लालन-पालन किया। महाभारत युद्ध में कृपाचार्य कौरवों की ओर से सक्रिय थे।


परमात्मा का स्वरुप


संसार में जितने ईश्वर में विश्वास करने वाले लोंग हैं परमात्मा के भिन्न भिन्न स्वरूपों को मानते हैं | कुछ अपने ही ईश्वर को लेकर झगडा भी करते हैं कुछ सब सही हैं यह कहे कर ईश्वर अर्थात परमात्मा के स्वरुप पर चिंतन व चर्चा नहीं करते | पर सत्य तो एक ही होता हैं, परमात्मा भी एक स्वरुप हैं और उस सत्य स्वरुप का पता चल जाए तो दुनिया के झगडे ही खत्म हो जाए | एक स्वरुप इस लिए हैं क्यों की सृष्टि भी एक हैं यदि ईश्वर भिन्न होता तो सृष्टि भी बट जाती | पर अब प्रश्न ये उठता हैं के उस ईश्वर को जाने कैसे ? पर वेद की भी क्यों माने यदि बुद्धि से स्वीकार ईश्वर का स्वरुप हमें समझ नहीं आता | तो परमात्मा को जानने के लिए हम एक स्तरीय परिभाषा को लेकर चलते हैं फिर उस परिभाषा को ज्ञान से मापते हैं तर्क कर के देखते हैं के दोष तो नहीं हैं | परिभाषा ऐसी हो जो सबको स्वीकार हो यानी वह परमात्मा के गुण, स्वाभाव इत्यादि के बारे में हमें बताती हो | यदि हर संभावित तर्क से अपनी ही मान्य परिभाषा में की समीक्षा करते हैं | सारे रहस्य खुल जाएंगे यदि हम परमात्मा के वास्तविक स्वरुप को समझ सके |

अब ईश्वर विषय में ऐसे विद्वान की बात लेकर चले जो अद्वतीय आस्तिक हो | हम महर्षि दयानंद को लेकर चलते हैं | उन्होंने आर्यो को निर्देशित नियमो में दूसरे नियम में ही ईश्वर के स्वरुप के बारे में बताया हैं | जो इस प्रकार हैं “ईश्वर सच्चिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वांतर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करने योग्य है।“

अब शायद ही कोई व्यक्ति हो जिसे आपत्ति हो परमात्मा के इन गुणों पर | पर फिर भी हम एक एक करके ऋषि द्वारा बताये इन सारे गुणों पर चर्चा करेंगे | यह सारे गुण उसके स्वरुप से जुड़े हुए हैं और आपस में भी सम्बंधित हैं | यह सारे गुण उस परमात्मा के पूर्ण होने की भी बात हमें बताते हैं | आइये हम उसके स्वरुप को पूर्ण करने वाले गुणों पर चर्चा प्रारंभ करे |

सच्चिदानंदस्वरूप : यह शब्द सत् + चित् + आनंद से बना हैं | सत् कहते हैं जो हमेशा रहे समय के बंधन में ना बंधने वाला | चित् कहते हैं चिताने वाला यानी प्रकृति और जीवो का मिलन कराने वाला वही हैं यह ये भी बताता हैं के वह सत्य जानता हैं लोगो के किये हुए कर्मो को जानता हैं और न्याय रखते हुए उपयुक्त कर्माशय युक्त जीवात्मा को उपयुक्त शरीर दिलाता हैं | वह आनंद स्वरुप भी हैं यानी वह परमात्मा राग द्वेष इर्ष्या भाव इत्यादि से मुक्त हैं | जो उसकी उपासना नहीं कर्ता उस से भी वह आनंद स्वरुप परमात्मा प्रेम कर्ता हैं उसकी अमृतवर्षा सबके लिए समान हैं | हमारा मन जितना शुद्ध होगा, जितना ही हम उस चेतना के आनंद स्वरुप को पाने का प्रयास करेंगे उतना ही हम लाभ उठा सकेंगे | अब कोई मनुष्य शरीर में रहते काल से परे नहीं हो सकताए अतः सत् गुण मनुष्य पर लागू नहीं होता, जीवात्मा जरुर अनादी हैं काल के अंत के बाद भी रहेगी पर वह कुछ कर नहीं सकती प्रकृति के बिना इसलिए परमात्मा जैसा सामर्थ्य उसमे नहीं | जीव विज्ञान(क्लोनिंग) या गर्भाधान संस्कार के माध्यम से रासायनिक प्रक्रियाये जरुर कर सकता हैं मनुष्य, पर उसके बाद उसे परमात्मा से उत्तम जीवात्मा के लिए प्रार्थना करनी ही पड़ेगी सो चित् गुण भी परमात्मा जैसा नहीं प्राप्त कर सकता | हां आनंद स्वरुप तो मनुष्य समाधी अवस्था में हो सकता हैं और उसके बाद जब मोक्ष को प्राप्त होता हैं तो निश्चित समय के लिए उसी आनंद में रहता हैं |

निराकार : जिसका कोई आकार ना हो उसे निराकार कहते हैं | अब यह गुण समझने के लिए हम विपरीत बात मान कर समझते हैं | हम परमात्मा का आकार मान लेते हैं और देखते हैं ऐसा मानने से क्या दोष आते हैं | एक निश्चित आकार की चेतना का प्रभाव भी निश्चित सीमा में रहेगा | उसका ज्ञान भी सिमित रहेगा या जितना भी रहेगा वहा सिर्फ अपनी सत्ता में लगा सकता हैं जहा तक वह हैं | उसकी न्याय सत्ता भी प्रभावित होगी, उसके निकट अधिक न्याय होगा और जैसे-२ दुरी बढती जाएगी उसका न्याय कम होगा क्यों की वह वहा पर हैं ही नहीं | सम्पूर्ण सृष्टि के निर्माण का सामर्थ्य भी उसमे नहीं होगा वह सिर्फ सिमित आकार के साथ सिमित निर्माण ही कर सकेगा | यानी सारे गुण विपरीत सिद्ध होते हैं यदि हम परमात्मा को निराकार नहीं मानते | वह अन्यायकारी, सिमित सामर्थ्य वाला सिमित ज्ञान वाला इत्यादि सिद्ध होता हैं | इसलिए परमात्मा निराकार ही हैं तभी वह पूर्ण हैं | अब निराकार कैसा होता हैं यह समझना जरुरी हैं | वह ब्रह्म हैं अर्थात सबसे बड़ा हैं सूर्य चंद्र ही नहीं सारा या सारे ब्रह्माण्ड उसमे आते हैं | हम सब उस असीम चेतना के भीतर हैं और वह हमारे भीतर हैं यानी जिसे हम शुन्य कहते हैं वह भी परमात्मा की चेतना से भरा हुआ हैं यही उसका निराकार स्वरुप हैं |

सर्वशक्तिमान : यानी सबसे ताकतवर, उसकी शक्ति के समान किसी का सामर्थ्य नहीं | कोई मनुष्यधारी उसकी सर्वशक्तिमत्ता के पास पहुच सकता | जो वह सबसे अधिक शक्ति सामर्थ्यावाला ना हो तो वह सूर्य आदि ग्रहों का चंद्र आदि पिंडो का निर्माण भी ना कर सके | वह ग्रहों से लेकर समस्त परमाणुओ तक को अपनी शक्ति से संतुलित रखता हैं | कोई मनुष्य ऐसा नहीं कर सकता |

न्यायकारी : जो जिस योग्य हैं उसे वह कल्याण हेतु प्रदान करने वाला, न्याय करने वाला परमात्मा ही हैं | सभी मनुष्यों को चाहिए के परमात्मा के न्याय के गुण को धारण करे और समस्त जगत में न्याय के साथ, न्याय के लिए ही जीवन व्यतीत करे | ना अन्याय करे ना होने दे यही धर्म को धारण कराता हैं | आप को संशय ये हो सकता हैं के दुनिया में जो गलत कार्य होते हैं क्या वह परमात्मा की इच्छा से होते हैं ? नहीं कदापि नहीं, वह सदैव लोगो को अपने गुणों का आनंद देता रहता हैं हमारा अन्तःकरण मलिन होने से हम उसके आदेशो का पालन नहीं कर पाते | और जीव कर्म करने को पूर्णतः स्वतंत्र हैं पर कर्मफल पाने को परतंत्र हैं | जो अन्याय होता दीखता हैं उसका कारण पशुतुल्य मनुष्य हैं और न्यायव्यवस्था में उन्हें दंड देने वाला परमात्मा हैं |

दयालु : देखिये न्यायकारी के बाद दयालु कहा गया हैं | वह अभयदान कर्ता हैं, दोषी को दंड देने वाला और न्याय करने वाले पर दया करने वाला हैं | उसका यह गुण सभी मनुष्यों को अपने अंदर लेना चाहिए

अजन्मा : प्रकृति से युक्त होने को जन्म कहते हैं | जो जन्म लेता हैं उसकी मृत्यु भी निश्चित हैं और जो मृत्यु को प्राप्त हो जाए वह परमात्मा नहीं हो सकता | वह परमात्मा तो सदैव से प्रकृति का त्याग करे हुए हैं और क्यों की वहा त्याग करे हुए हैं इसीलिए उसने जीवात्माओ के जन्ममरण व्यवस्था हेतु सृष्टि का निर्माण किया | अतः वह परमात्मा अजन्मा हैं |

अनंत : जो अजन्मा हैं उसका कोई अंत भी नहीं इसलिए वह अनंत हैं | उसका कोई परिमाण करना संभव नहीं इसलिए भी वहा अनंत हैं यानी हर दिशा में बस फैला हुआ हैं बिना किसी अंत के |

निर्विकार : उसमे कोई विकार नहीं | जो भी मनुष्य शरीर धारण कर्ता हैं वह विकारों से नहीं बच सकता | रोग से शोक तक भिन्न विकार उसमे रहते ही हैं | जब योगी समाधी में जाता हैं तब जीवात्मा उस निर्विकार परमात्मा के आनंद का अनुभव करती हैं | जो वह निर्विकार ना हो तो आनंद में ना रह सके | आनंद सुख और दुःख से भिन्न हैं | आनंद युक्त प्रेम मनुष्य के काम (इच्छा) युक्त प्रेम से भिन्न होता हैं |

अनादि : वह सदैव से था सदैव रहेगा इसलिए वह परमात्मा अनादी हैं | परमात्मा के अतिरिक्त जीवात्मा और प्रकृति भी अनादी हैं | पर जब जीवात्मा शरीर धारण करती हैं तो उसके शरीर की मृत्यु निश्चित होती हैं और प्रकृति का जब परमात्मा स्वरुप बदलता हैं तो प्रकृति का वापस अपने मूल स्वरुप में आना भी निश्चित हैं |

अनुपम : उसके सामान कोई नहीं हो सकता | यह गुण बताता हैं की वह एक ही हैं और उसके जैसा दूसरा कोई नहीं |

सर्वाधार : सबको धारण करने वाला सर्वाधार परमात्मा हैं | उसका धारण किया हुआ शरीर यही हैं के प्रकृति और जगत सब उसके अंदर हैं और वहा ब्रह्म स्वरुप सबसे बड़ा हैं | यह उसके निराकार गुण की भी पुष्टि करता हैं जो वहा निराकार ना होता तो सर्वाधार ना होता |

सर्वेश्वर : अर्थात सबका ईश्वर परमात्मा हैं यानी के ईश्वर एक हैं | जो वह सर्वेश्वर ना हो तो पुरे जगत में अव्यवस्था फ़ैल जाए | सृष्टि कभी क्रम में आ ही ना पाए क्यों के २ सृष्टिकर्ता माने तो जगत में भिन्न-२ नियमों को पावेंगे पर विज्ञान अर्थात प्रकृति से निर्मित सरचनाओ के नियम समस्त ब्रह्माण्ड में एक ही हैं इसलिए सबका ईश्वर एक परमात्मा हैं |

सर्वव्यापक : इसका पर्याय संस्कृत में विष्णु होता हैं | जो वह हर जगह ना हो तो हर जगह निर्माण या प्रलय भी ना करा सके | वह सातवे आसमान पर नहीं अपितु सारे आसमान उसके अंदर समाहित हैं | उसका सर्वव्यापक होने का गुण भी उसे सर्वज्ञानी होना सार्थक कर्ता हैं |

सर्वांतर्यामी : यानी सब कुछ जानने वाला | सर्वज्ञानी सिर्फ परमात्मा हैं | वह इतना सूक्ष्म हैं के अंदर भी हैं और बाहर भी तो आप कुछ सोचते हैं उसे तुरंत ही ज्ञात हो जाता हैं उसकी उपस्तिथि के कारण | अतः हमें सदैव सर्व कल्याणकारी चिंतन (यानी यज्ञ का) चिंतन करना चाहिए | और जो वह सर्वान्तर्यामी ना होता तो सृष्टि का निरमंड भी ना कर पाता | इसीलिए वह सबका गुरु कहा गया हैं उसे सभी पदार्थो की विद्या आती हैं इसीलिए आर्यो के प्रथम नियम में सत्य विद्या का मूल परमेश्वर बताया गया हैं | जो चेतना होती हैं वह सदैव ज्ञान से युक्त होती हैं और वो चेतना जो हर जगह हैं वह सर्वज्ञानी ही हैं |

अजर : वह आयु को प्राप्त नहीं होता | उसे बुढ़ापा नहीं आता वह सदा एक सा रहता हैं यह उसके सर्वव्यापक गुण की पुष्टि कर्ता हैं | उसको काल से भिन्न कर्ता हैं उसका अजरता का गुण और परमात्मा अपना गुण कभी नहीं छोड़ता |

अमर : जो वह अजर हैं सो वह अमर हैं | कभी मर नहीं सकता, सदा से हैं सदा रहेगा |

अभय : जो वहा अजर हैं और अमर हैं तो वहा अभय भी हैं क्यों की उसके पास भय का कोई कारण नहीं | और जो वहा अभय ना होता तो निर्विकार भी ना होता |

नित्य : वह निश्छल अविनाशी हैं इसलिए नित्य कहा गया हैं | कोई उसका विनाश नहीं कर सकता विनाश और निर्माण का कारण वहा परमात्मा हैं |

पवित्र : उस से अधिक पवित्र कोई नहीं | उसका स्वाभाव साधू हैं, वह दयालु हैं, वहा न्यायकारी हैं पवित्रता को पूर्ण करने के सारे गुण उसमे हैं और इस प्रकार जैसे वह परमात्मा हैं कोई पवित्र नहीं |

सृष्टिकर्ता : उपरोक्त गुण उसे सृष्टिकर्ता सिद्ध करते हैं जो उसमे इतना सामर्थ्य हैं और जो वह पवित्र हैं तो वह आलसियो की तरह अपने सामर्थ्य का प्रयोग ना करने का अधर्म नहीं कर सकता और इसीलिए उसने अपने सामर्थ्य और जीवात्मा के सामर्थ्य को प्रकृति की उपस्तिथि की उपयोगिता को सार्थक करते हुए सृष्टि का निर्माण किया |

समस्त वेदादि शास्त्र इन्ही गुणों से युक्त परमात्मा की बात करते हैं | ये जो परमात्मा जो तर्क से भी सिद्ध हैं और वेद के प्रमाण से भी सिद्ध हैं उसी की उपासना से मनुष्य का कल्याण हैं | सो तो उसके असंख्य गुण हमें वेद बाटते हैं पर इतने ही गुण में हम उसके स्वरुप को समझ सकेंगे | आप को यदि अभी भी कोई संशय रह गया हो तो आप परमात्मा के यह गुण उसमे लगा के देखिये जिसे आप साक्षात परमात्मा मान रहे हैं | यदि वह इन गुणों को पूर्ण करे तो वह परमात्मा हैं परन्तु कोई मनुष्य इन सभी गुणों को पूर्ण नहीं कर सकता | जो शरीर धारी हैं वह जीवात्मा हैं और जीवात्मा ही माता के गर्भ में नौ मास उल्टा लटकती हैं ताकि उस परमात्मा के योग के माध्यम से साक्षात्कार कर सके और मोक्ष को प्राप्त कर सके | जितने भी आप्त हुए हैं उन सभी ने उसकी उपासना उसके श्रेष्ठ नाम “ओ३म्” से की हैं | सभी महर्षि अग्नि, वायु, अंगिरा आदित्य, ब्रह्मा, कणाद, मनु, जैमिनी, दयानंद इत्यादि एवं सभी धर्मं संस्थापक राजाओ ने राम, कृष्ण, शंकर इत्यादि एवं सभी आचार्यो ने एवं आचार्य चाणक्य, आचार्य शंकर इत्यादि ने “ओ३म्” नाम की एक मात्र निराकार ईश्वर की उपासना की हैं | हम सभी को उसी की उपासना करते हुए अपना मनुष्य जीवन सार्थक करना चाहिए |

जब अचानक आने लगें चक्कर तो क्या करें और क्या न करें....


थोड़ी देर तक बैठे रहने के बाद आप जैसे ही उठते हैं, आपके आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है, आपको चक्कर आने लगते हैं। ऐसा लगता होगा कि आपके चारो ओर की चीजें तेजी से घूम रही हैं। आज हम चक्कर आने की बीमारी के निदान के बारे में आपको बताएंगे। चक्कर आना या सिर घूमना एक सामान्य समस्या है। यह स्वयं में एक बीमारी भी है और अनेक बीमारियों का एक लक्षण भी।

कारण

चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन दिमाग से जुड़ी या कान से जुड़ी समस्याएं अधिकांश इसका मुख्य कारण होती है। इसके अलावा ब्लडप्रेशर में परिवर्तन, स्पॉन्डिलोसिस, शरीर में खून की कमी, खून में ग्लूकोज की मात्रा बहुत बढऩे या कम होने और अत्यधिक शारीरिक व मानसिक तनाव से भी मरीज को चक्कर का अनुभव हो सकता है।


चक्कर आने पर तुरंत करें ये घरेलू उपाय

-नारियल का पानी रोज पीने से भी चक्कर आने बंद हो जाते है।

- 20 ग्राम मुनक्का घी में सेंककर सेंधा नमक डालकर खाने से चक्कर आने बंद हो जाते है।

- सिर चकराने पर आधा गिलास पानी में दो लौंग डालकर उसे उबाल लें और फिर उस पानी को पी लें। इस पानी को पीने से लाभ मिलता है।

-10 ग्राम आंवला, 3 ग्राम काली मिर्च और 10 ग्राम बताशे को पीस लें। 15 दिनों तक रोजाना इसका सेवन करें चक्कर आना बंद हो जाएगा।

- रोजाना जूस पीने से चक्कर आने बंद हो जाएंगे। लेकिन ध्यान रखें कि जूस में किसी प्रकार का मीठा या मसाला नहीं डालें। जूस की जगह चाहें तो ताजे फल भी खा सकते हैं।


चक्कर आते हैं तो क्या खाएं.....

- हरी सब्जियों का अधिक मात्रा में सेवन करें।

- अंगूर, अनार, आम, सेब, संतरा, मौसमी आदि फलों का सेवन करें या रस पिएं।

- आंवले, फालसे, शहतूत का शरबत पीने से उष्णता नष्ट होने से चक्कर आने की विकृति नष्ट होती है।

-रात को 4-5 बादाम जल में डालकर रखें। प्रात: उनके छिलके उतार करके, बादाम पीसकर, दूध में मिलाकर सेवन करें।

-प्रतिदिन सुबह-शाम दूध का सेवन करें। दूध में घी डालकर पिएं।

- सेब या गाजर का मुरब्बा प्रतिदिन खाएं और दूध पिएं।

- दूध में बादाम का तेल डालकर पिएं।

- जिन लोगों को चक्कर आते हैं उन्हें दोपहर के भोजन के 2 घंटे पहले और शाम के नाश्ते में फलों का जूस पीना चाहिए।

क्या न खाएं

- जंक फूड, चाय व कॉफी से परहेज करें।

- अधिक मसालेदार न खाएं।

- नॉनवेज और ज्यादा ऑइली खाने से भी बचें।



इस रविवार ऐसे लगाएं एक दीपक, नहीं सताएगा अकाल मृत्यु का डर


स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी यानी धनरतेरस (इस बार 11 नवंबर, रविवार) के प्रदोषकाल में यमराज के निमित्त दीप और नैवेद्य समर्पित करने पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। यमदीप दान प्रदोषकाल यानी शाम के समय करना चाहिए। इसकी विधि इस प्रकार है-

विधि

मिट्टी का एक बड़ा दीपक लें और उसे स्वच्छ जल से धो लें। इसके बाद साफ रुई लेकर दो लंबी बत्तियां बना लें। उन्हें दीपक में एक-दूसरे पर आड़ी इस प्रकार रखें कि दीपक के बाहर बत्तियों के चार मुहं दिखाई दें। अब उसे तिल के तेल से भर दें और साथ ही उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें।

इस प्रकार तैयार किए गए दीपक का रोली, चावल एवं फूल से पूजन करें। उसके बाद घर के मुख्य दरवाजे के बाहर थोड़ी सी खील अथवा गेहूं की एक ढेरी बनाएं और नीचे लिखे मंत्र को बोलते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यह दीपक उस पर रख दें-


मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदनात् सूर्यज: प्रीयतामिति।।

इसके बाद हाथ में फूल लेकर नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए यमदेव को दक्षिण दिशा में नमस्कार करें-
ऊँ यमदेवाय नम:। नमस्कारं समर्पयामि।।

अब यह फूल दीपक के समीप छोड़ दें और हाथ में एक बताशा लें तथा नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए उसे भी दीपक के पास रख दें-

ऊँ यमदेवाय नम:। नैवेद्यं निवेदयामि।।

अब हाथ में थोड़ा सा जल लेकर आचमन के निमित्त नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए दीपक के समीप छोड़ दें-
ऊँ यमदेवाय नम:। आचमनार्थे जलं समर्पयामि।

अब पुन: यमदेव को ऊँ यमदेवाय नम: कहते हुए दक्षिण दिशा में नमस्कार करें।
इस तरह दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।


13 November 2012

-इस्लामिक आतंकवाद को कैसे नेस्तनाबूद किया जाए?


सुब्रमण्यम स्वामी जी द्वरा लिखित लेख ‘How to wipe out Islamic terror? ’का हिन्दी अनुबाद---इस्लामिक आतंकवाद को कैसे नेस्तनाबूद किया जाए? जुलाई 13,2011 को मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए बम धमाकों के बाद हिन्दूओं को निर्णायक रूप से अपनी अन्तरात्मा को झकझोरने की जरूरत है

भारत का विनाश करने के लिए, मुसलिम आतंकवादियों द्वारा हिन्दूओं का हलाल तरीके से आए दिन खूनबहाया जाना, हिन्दूओं द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता


आतंकवाद गैर कानूनी तरीके से ताकत के दुरूपयोग का वो हथियार है, जिससे आम जनता को भयभीत कर, उसे आतंकवादियों की इच्छा के विपरीत काम करने से रोकने व आतंकवादियों की नजाजय मांगो को समर्थन देने के लिए मजबूर करने के लिए उपयोग किया जाता है भारत में हर महीने लगभग 40 आतंकवादी हमले होते हैं


इसीलिए हाल ही में अमेरिका के ‘आतंकवाद विरोधी केन्द्र’ के प्रकाशन ‘A Chronology of International Terrorism ’ में बताया गया है कि आज तक जितने आतंकवादी हमले भारत पर हुए हैं उतने आतंकवादी हमले दुनिया के किसी भी देश नेनहीं झेले हैं

वेशक प्रधानमन्त्री माओवादी हिंसा को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बतायें लेकिन मेरा मानना है कि आजइस्लामिक आतंकवाद देश के लिएसबसे गम्भीर खतरा है


अगर बर्तमान गृहमन्त्री,प्रधानमन्त्री और UPA अध्यक्ष को आज हटा दिया जाए तो माओवादी हिंसा को एकमहीन में उसी तरह समाप्त किया जा सकता है जिस तरह मैंने 1991 में बरिष्ठ मन्त्री के पदपर रहते हुए तमिलनाडु में LTTE व MGR ने 1980 में नक्सलवादियों को किया
मुसलिम आतंकवाद देश के लिए एकअलग तरह का खतरा है


मुसलिम आतंकवाद हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्यों है? इसके वारे में 2012 के बाद किसी के मन में कोई शंका नहीं रहेगी
2012 में तालिवान पाकिस्तान पर कब्जा कर लेंगे व अमेरिका अफगानिस्तान छोड़कर भाग जाएगा उसके बाद इस्लाम अपने अधूरे काम को पूरा करने के लिए हिन्दूत्व से सीधी लड़ाई लड़ेगा


अलकायदा का नया सरगना, जो कि ओसामाविन लादेन का उताधिकारी है पहले ही घोषणा कर चुका है कि मुसलिम आतंकवादियों का सबसेबड़ा लक्ष्य भारत है न कि अमेरिका कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दू बहुल भारत को ‘इस्लामी विजय का एक अधूरा अध्याय’ मानते हैं


हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि दुनिया के वाकी सभी वो देश, जिन पर इस्लाम ने विजय प्राप्त की ,इस्लामी आक्रमण के दो दशकों के भीतर 100% इस्लाम में परिवर्तित हो गए भारत एक अपबाद है


800 वर्षों के अत्याचारी बरबर मुसलिम शासन के बाद भी अविभाजित भारत में 75% हिन्दू अबादी थी कट्टरपंथी मुसलमानों को यही बात आज तक सता रही है कि मुसलमानों द्वारा किए गए वेहिसाब जुल्मों के बाबजूद वो मुसलिम आतंकवादी हिन्दूओं का मनोबल तोड़ने में क्यों सफल न हो पाए


हर दंगे के बाद नियुक्त किए गए जांच आयोगों की रिपोर्टों के अधार पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि 1947 से लेकर आज तक जितने भी हिन्दू- मुसलिम दंगे हुए हैं उन सबकी शुरूआत कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा ही की गई ---यहां तक कि गुजरात दंगों की शुरूआत भी कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा गोधरा में 56 हिन्दू महिलाओं और बच्चों को जिन्दा जलाकर की गई


आज की परिभाषा के अनुसार मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए ये सबके सब हमले आतंकवादी गतिविधियां हैं वेशक भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं लेकिन फिर भी कट्टरपंथी हिंसक मुसलमान हिन्दूओं पर जानलेवा हमले करने का दुश साहस करते हैं


भारत के अन्य मुसलमान इन हमलों को या तो मौन स्वीकृति देते हैं या फिर इनमें कूद पड़ते हैं या फिर हिन्दूओं के मारेजाने का तमाशा देखते हैं

भारत में अत्याचारी बाबर से लेकर कातिल औरंगजेब तक और औरंगजेब से लेकर आज तक हिन्दूओं का कत्लयाम ही मुसलमानों का ईतिहास है
हिन्दूओं पर मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए जाने हमलों के प्रति उदासीन रहने में ,भूतकाल में दारा सिकोह व वर्तमान में एम जे अकबर वसलमान हैदर जैसे लोग,जो मुसलिम आतंकवाद के विरूद्ध खुलकर वोलने से नहीं डरते हैं,अपबाद हैं .कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा किए जाने वाले हमलों के लिए हिन्दू ही दोशी हैं


कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा हिन्दूओं को निशाना बनाए जाने के लिए मैं मुसलमानों  के बजाए हिन्दूओं को ही दोष देता हूं में इन हमलों का दोष उन हिन्दूओं को देता हूं जिन्होंने सनातन धर्म में बाताई गई आत्मा और परमात्मा की अबधारणा को चरम पर ले जाते हुए खुद को अपने आप तक सीमित कर लिया


लाखों हिन्दू विना किसी सरकारी सहयोग के अपने आप को व्यबस्थित कर कुम्भ मेले में ईकट्ठे हो सकते हैं ,लेकिन मेले के बाद ये सब हिन्दू कशमीर, मऊ, मेल्विशरम और मलप्पुरम व अन्य विधर्मियों के बहुमत वाले इलाकों में हिन्दू मिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान के तहत मुसलमानों द्वारा निशाना बनाए जा रहे हिन्दूओं की पीड़ा से वेखबर,हमले के शिकार हिन्दूओं की सहायता के लिए विना कोई संगठित कदम उठाए घर की ओर लौट जाते हैं


उधाहरण के लिए अगर आधे हिन्दू भी जाति ,भाषा व क्षेत्र केविभाजनों से उपर उठकर बोट करें तो एक सच्चे हिन्दू राजनीतिक दल को दो तिहाई बहुमत मिलेगा


आज धर्मनिर्पेक्षतावादी ,उग्रहिन्दूओं द्वारा मुसलमानों व अन्य अल्पसंख्यकों पर किए गए छुट-पुट हमलों की बात करते हैं
लेकिन इन में से अधिकतर हमले कांग्रेस सरकारों द्वारा नियोजित रूपसे करवाए गए, न कि संगठितहिन्दूओं द्वारा जबकि ISI व पाकिस्तानकी सेना द्वारा प्रयोजित वनियोजित हमलों को छोड़ दें तो मुसलमानों द्वारा किए गए अधिकतर हमले गैर राज्य उपद्रवियों द्वारा किए गए
कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दूओं को निरूत्साहित करने के लिए हिन्दूओं को निशाना बनाकर हमले करते हैं ताकि हिन्दू अपने उन अधिकारों को छोड़ दें जो कि उन्हें नहीं छोड़ने चाहिए


इन हमलों का मूल उद्देशय भारतीय संस्कृति को कमजोर कर अन्त में भारत को समाप्त करना है


ये 1000 वर्ष से लड़े जा रहे हिन्दू विरोधी-भारत विरोधी युद्ध का वो अधूरा उद्देश्य हैजिसकी बात ओसामाविन लादेन अक्कसर करता है
असल में मुसलिम आतंकवाद वही हथियार है जिसका उपयोग सुहरावर्दी और जिन्ना द्वारा 1946 में हिन्दूओं को पाकिस्तान बनाने की मांग मानने को मजबूर करने के लिए वंगाल में किया गया


कांग्रेस पार्टी ने हिन्दूओं का प्रतिनिधि बनकर मुसलिम आतंकवाद के आगे घुटने टेकते हुए देश के भारत का 25% हिस्सा धर्मनिर्पेक्ष थाली में सजाकर मुसलिम आतंकवादी जिन्ना के हबाले कर दिया अब ये मुसलमान वाकी बचे 75% हिस्से पर आतंकवाद को हथियार बनाकर कब्जा करना चाहते हैं हिन्दू विरोधी ताकतें हम ये नहीं कहते कि इस्लाम को छोड़कर किसी और ने हिन्दूओं को निसाना नहीं बनाया
आजादी के बाद के 6 दशकों में अंग्रेजो के सम्राज्यबाद से प्रभावित इवी रामास्वामी के नेतृत्ववाले, द्रविड़यन अन्दोलन ने तर्कशीलता के नामपर हिन्दू धर्म को तर्कहीन करार देने की कोशिश की और हिन्दूधर्म का प्रचार करने वाले पुजारियों को आतंकित कर हिन्दू धर्मका प्रचार करने से रोकने की कुचेष्ठा की
आंदोलन के संगठनात्मक हाथ,द्रविड़ कझगम (डी के) ने 50 वर्ष तक इसलिए राबण की पूजा की ताकि हिन्दूओं द्वारा भगवान राम की अराधना करने का उपहास उड़ाया जा सके व माता सीता के अपहरण को जायज ठहराकर हिन्दूओं को अपमानित किया जा सके
लेकिन जैसे ही द्रविड़ कझगम(DK) को ये पता चला कि रावण एक ब्राह्मण भगवान होने के साथ-साथ शिव का एक पवित्र भक्त भी था,तो इसने राबणकी पूजा करनी बन्द कर दी
रामायण के अपमान की इस नीचता को छोड़ने के बाद DK ने अब उस भारत विरोधी LTTE का समर्थन करना शुरू करदिया जिसने श्रीलंका में तमिल–हिन्दू नेताओं को मारने में विशेसज्ञता हासिल करली है
वे शक अब LTTE के नाश के बाद DK अनाथ हो गई है
गृह-युद्ध की स्थिति 1960 के दशक में ईसाई मिशनरियों ने नागा लोगों को भारत केविरूद्ध भड़काया जिसके परिणामस्वारूप अब नागा भी भारत से नागालैंड को अलग करवाकर भारत को और विभाजित करना चाहते हैं

1980 के दशक में विदेश में प्रक्षिक्षण प्राप्त भारत विरोधी ईसाई आतंकवादियों ने मणिपुर मेंहिन्दूओं को निशाना बनाया
ईसाई आतंकवादियों द्वारा मणिपुर में रहने वाले लोगों को धमकी दी गई कि या तो भारत का विरोध करो या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ
1986 से खासकर 1990 के दशक में कशमीर में इस्लामिक आतंकवादियों ने हिन्दूओं को निशाना बनाकर उनकी मां-बहन वेटियों को अपनानित करने के साथ-साथ हिन्दूओं का बड़े पैमाने पर कत्लयाम कर उन्हें कशमीर घाटी छोड़ने को मजबूर किया

अब बड़े स्तर पर इस बातको माना जाने लगा है कि मुसलिम आतंकवादी हिन्दूओं को निशाना बनाकर हमले कर रहे हैं व भारत के मुसलमान इन हमलों को मौन स्वीकृति दे रहेहैं


मुसलिम आतंकवादियों के विदेशी संरक्षक अब आतंकवादी हमलों को कुछ इस तरह का अन्जाम दे रहे हैं ताकि मुसलमानों को हिन्दूओं के विरूद्ध राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाया जा सके जिससे भारत में सर्विया और वोसनिया की तरह गृह युद्ध छेड़ा जा सके
मुसलमानों को 'उदारवादियों' और 'चरमपंथियों में विभाजित नहीं किया जा सकता है क्योंकि जब भी चरमपंथी मुसलमानों केविरूद्ध कदम उठाए जाते हैं तबतथाकथित उदारवादी उनकी ढ़ाल बनकर खड़े हो जाते हैं
पाकिस्तान की असैन्य सरकार ने पतंगवाजी पर सिर्फ इसलिए प्रतिबन्ध लगा दिया क्योंकि तालिवान पतंगवाजी को हिन्दूओं का खेलमानते हैं

मलेशिया और कजाकिस्तान की उदारबादी सरकारें हिन्दू-मन्दिरों को गिरा रहीं हैं


*सामूहिक प्रतिक्रिया *  इसलिए भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए,भारत विरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें सबसे पहला सबक ये सीखने की जरूरत है कि आतंकवाद के निशाने पर हिंदू हैं और भारत के मुसलमानों को धीमी प्रतिक्रियाशील प्रक्रिया के द्वारा आतंकवादी बनने के लिए क्रमादेशित किया जा रहा है ताकि वो हिन्दूओं के विरूद्ध आत्मघाती हमले करने पर अमादा हो जायें
हिंदू मानस को कमजोर करने और गृहयुद्ध का डर पैदा करने के लिए इन आतंकवादी हमलों को अन्जाम दिया जा रहा है
और इसलिए क्योंकि आतंकवादियों के निशाने पर हिन्दू हैं, हिन्दूओं को हिन्दूओं के रूप में ही भारत विरोधी आतंकवादियों के विरूद्ध संगठित होकर जबाबी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि कोई हिन्दू खुद को अलग थलग या लाचार महसूस न करे
हिन्दू को इसलिए आतंकवाद से मुंह नहीं फेर लेना चाहिए कि अभी तक उसके परिवार का कोई सदस्य इस आतंकवाद का सिकार नहीं हुआ है

आज अगर एक हिन्दू सिर्फ इसलिए मारा जाता है क्योंकि वह हिन्दू है  तो यह सब हिन्दूओं की नैतिक मौत है ये विराट हिन्दू का एक जरूरी और आबश्यक मानसिक रवैया है
( विराट हिन्दू की अबधारणा की अधिकजानकारी के लिए मेरी ‘HindusUnder Siege: The Way OutHaranand, 2006).’ देखें
इसलिए हमें मुसलिम आतंकवाद का सामना करने के लिए हिन्दू के नाते सामूहिक मानसिकता की जरूरत है
इस जबाबी कार्यवाही में भारत के मुसलमान भी हमारे साथ आ सकते हैं अगर वो सच में हिन्दूओं के कत्लयाम के विरूद्ध हैं तो
मैं नहीं मानता कि भारतीय मुसलमान हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध तब तक हमारे साथ आयेंगे जब तक वो इस सच्चाई को स्वीकार नहीं करते कि वेशक वो आज मुसलिम हैं लेकिन उनके पूर्वज भी हिन्दू ही हैं


अपने पूर्वजों के वारे में इस सच्चाई को स्वीकार करना मुसलमानों के लिए आसान नहीं है क्योंकि मुसलिम मुल्हा इसका इसलिए विरोध करेंगे क्योंकि इस सच्चाई को स्वीकारने के बाद एक तो भारतीय मुसलमानों में इस्लाम से मिली आत्मघाती कट्टरता कमजोर हो जाएगी और दूसरा इस सच्चाई को जानने व स्वीकारने के बाद उनकी हिन्दूधर्म में घर बापसी की सम्भावनायें बढ़ जायेंगी


कहीं भारतीय मुसलमान इस सच्चाई को स्वीकार न कर लें इसीलिए मुसलमानों के धार्मिक नेता हरहाल में काफिर बोले तो हिन्दूओं के विरूद्ध हिंसा और नफरतका प्रचार प्रसार करते रहते हैं

(उधाहरण के लिए आप कुरान के अध्याय 8 की आयत 12 पढ़ सकते हैं
) इस्लामिक आतंकवादी संस्था सिमी (SIMI) पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि भारत दारूल हरब है और SIMI इसे दारूल इस्लाम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है


भारत का दारूल हरब होना, मुसलमानों को हिन्दूओं का कत्लयाम करने ,हिन्दूओं के मान सम्मान को ठेस पहुंचाने ,हिन्दूओं की मां-बहन-बेटियों की इज्जत आबरू के साथ खिलबाड़ करने के साथ साथ उन्हें हिन्दूओं के प्रति हर तरह के नैतिक बन्धनों से मुक्त करता  है क्योंकि मुसलमानों को कुरान व हदीस में दारूल हरब को दारूल इस्लाम बनाने के लिए ये सब करने का आदेश दिया गया है


बृहद हिन्दू समाज परन्तु फिर भी अगर कोई मुसलमान इस बात को स्वीकार करता है कि उसके पूर्बज हिन्दू हैं तो हम उसे बृहद हिन्दू समाज बोले तो हिन्दूस्तान के अंग के रूप में स्वीकार कर सकते हैं


भारत अर्थात इंडिया अर्थात हिन्दुस्तान हिन्दूओं और अन्य जिनके पूर्बज हिन्दू हैं उन सबका देश है


यहां तक कि भारत में रहने वाले पारसियों औरयहूदियों के पूर्बज भी हिन्दू ही थे

अन्य जो भारत से अपना खून का रिस्ता होनेकी बात को अस्वीकार करते हैं या फिर जिनका भारत से खून का रिस्ता है ही नहीं या फिर वो विदेशी जो मात्र पंजीकरण की बजह से भारतीय नागरिक बने हैं वो भारत में रह तो सकते हैं लेकिन उन्हें बोट डालने का अधिकार नहीं दिया जा सकता 


(मतलब वो चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हो सकते)


इसलिए आतंकबाद का मुकाबला करने बालीनीति पर अमल करने से पहले हर और प्रतेक हिन्दू का प्रतिबद्ध और बिराट हिन्दू बनना जरूरी है
किसी भी व्यक्ति को बिराट हिन्दू बनने के लिए एक हिन्दू मानसिकता रखना मतलब उसकी एक ऐसी मानसिकता होना जरूरी है जो व्यक्तिगत और राष्ट्रीयचरित्र के अन्तर को समझ सके बिराट हिन्दू होने के लिए किसी हिन्दू का पबित्र, इमानदार और पढ़ा-लिखा होना ही काफी नहीं है
ये सब व्यक्तिगत चरित्र के अंग हैं


राष्ट्रीय चरित्र वो मानसिकता है जो सक्रिय व पूरी ताकत से देश की पबित्रता और अखण्डता के लिए प्रतिबद्ध रहती है


उधाहरण के लिए मनमोहन सिंह (प्रधानमन्त्री) का व्यक्तिगत चरित्र तो ठीक दिखता है परन्तु अर्द्ध साक्षरसोनिया गांधी की एक रबर स्टैंप की तरह काम करते हुए हर राष्ट्रीय मुद्दे पर घुटने टेक देने की वजह से ये साबित हो चुका हैकि उसका कोई राष्ट्रीय चरित्र नहीं है


भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारत विरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें दूसरा सबक ये सीखना चाहिए कि क्योंकि आतंकवादियों का उदेश्य हिन्दूओं का मनोबल तोड़ना और हिन्दू संस्कृति को समाप्त करने के लिए भारत के हिन्दू आधार को तबाह करना है इसलिए हमें आतंकवादियों के आगे न तो हथियार डालने चाहिए और न ही आतंकवादियों की किसी भी मांग को मानना चाहिए


आतंकवाद से लड़ने की किसी भी नीति का मूल आधार यही होना चाहिए कि हम आतंकवादियों की किसी भी मांग को किसी भी हालात में नहीं मानेंगे

हमारे हाल के इतिहास में इस नीति पर विलकुल भी अमल नहीं किया गया


जब से हमने 1947 में मुसलिम आतंकवादियों के दबाब में पाकिस्तान बनाने की मांगको स्वीकार किया है तब से हम दबाब में बार-बार आतंकवादियों के आगे घुकने टेक देते हैं

आतंकवादियों के सामने घुटने टेकने की घटनायें
1989 में मुफ्ती मुहम्द सैयद की वेटी रूविया को आतंकवादियों से मुक्त करवाने के लिए वी पी सिंह सरकार द्वारा भारतीय जेलों से पांच आतंकवादियों को छोड़ दिया गया


इस घटना ने अपराधियों को कशमीरी अलगाववादियों व उनके समर्थकों की आँखों में नायक बना दिया 

क्योंकि इन अपराधियों ने हिन्दूओं की सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देने में सफलता हासिल की थी


रूविया को छुड़ाने के लिए आतंकवादियों के आगे घुटने टेकना जरूरी नहीं था


भारत के आधुनिक इतिहास में आतंकवादियों के आगे घुटने टेकने की सबसे शर्मनाक घटना तब घटी जब 1999 में आतंकवादियों ने 


भारतीयविमान सेवा की उड़ान IC-814 को अगवा कर कन्धार पहुंचा दिया
सरकार ने न्यायालय से आज्ञा लिए विना ही तीन आतंकवादियों को छोड़ दिया


मानो देश को शर्मशार करने के लिए इतना ही काफी नहो आतंकवादियों को पाकिस्तान में धकेलने के बजाए, उनके साथ एक बिशेष अतिथी जैसा बर्ताव करते हुए प्रधानमन्त्री के विमान में विठाकर एक बरिष्ठ मन्त्री द्वारा कन्धार पहुंचाया गया


ये तीनों आतंकवादी कन्धार में छोड़े जाने के बाद वापिस पाकिस्तान गए
पाकिस्तान जाकर इन तीनों आतंकवादियों ने हिन्दूओं को कत्ल करने के लिए तीन अलग-अलग आतंकवादी संगठन बनाए


मुहम्दहजर जिसे ततकालीन सुरक्षा सलाहकार ब्रजेस मिश्र ने मेमना बताया था ने छोड़े जाने के बाद लश्करे तैयावा की कमान सम्भाली


लश्करे तैयवा वह गिरोह है जिसने श्रीनगर से लेकर बंगलौर तक हिन्दूओं को लहुलुहान करने के लिए बार-बार हमलों को अन्जाम दिया


अजहर ने मध्य 2000 से लेकर अब तक 2000 से अधिक हिन्दूओं का खून बहाया


यही अजहर दिसम्बर 13, 2001 में संसद भवन पर हुए हमले के लिए भी जिम्मेदार है

तीसरा आतंकवादी जरगर अल-मुझा हिदीन-जंगान की स्थापना करने के बाद आज कल डोडा और जम्मू में हिन्दूओं का खून बहा रहा है


कन्धरा में की गई ये मुर्खता हमें के सबक देती है कि हमें कभी भी,किसी भी हालात में आतंकवादियों के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए


अगर आप आतंकवादियों के आगे घुटने टेकते हैं तो आप घुटने टेक कर बचाए गए हिन्दूओं से कहीं ज्यादा हिन्दूओं का कत्ल करवायेंगे


इसलिए आतंकवादियों से किसी भी तरह की सौदेबाजी पर लगाम लगाकर ,आतंकवादियों के सर्वनाश के लिए आगे बढ़ना चाहिए


सच का सामना भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारत विरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें तीसरा सबक ये सीखना चाहिए कि आतंकवादी घटना कितनी भी छोटी या कम महत्व क्यों नहो देश को जबाबी कार्यवाही हरहाल में करनी चाहिए--- आतंकवादी घटना के बराबरया फिर विनम्र कार्यवाही नहीं वल्कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को सबक सिखाने के लिए पूर्ण कार्यवाही

उधाहरण के लिए अय़ोध्या परकिया गया आतंकवादी हमला वेशक बड़ा हमला नहीं था लेकिन हमें आतंकवादियों के हमले पर जबाबी कार्यवाही करते हुए अयोध्य में एक भव्य राम मन्दिर का पुनर निर्माण करना चाहिए था


ये कलियुग है इसलिए हिन्दू विरोधी आतंकवादियों व उनके समर्थकों के प्रति किसी भी सातविक प्रतिक्रिया के लिए कोई जगह नहीं है

हिन्दू धर्म में आपाकलीन धर्म का प्रावधान है जिस पर हमें आज के हालात में अमल करना चाहिए


ये हमारे लिए सच्चाई का सामना करने का वक्त है
एक सभ्यता के रूप में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए या तो हमें हिन्दू के रूप में संगठित होकर हिंसक व अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का मुकावला करना चाहिए या फिर परसियन, वेवीलोनियन और मिश्र की सभ्यता की तरह नष्ट होने के लिए तैयार हो जाना चाहिए


ये सभ्यतायें अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का संगठित होकर मुकावला करने में असमर्थ रहीं इसलिए इनका सर्वनाश हो गया
हमें शाम, दाम, दण्ड, भेद नियम का पालन करते हुए हरहाल में अत्याचारी इस्लामिक आतंकवाद का सर्वनाश सुनिश्चित करना चाहिए

वरना ये राक्षश हमें समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे

गरीबी आतंकवाद का कोई कारक नहीं भारत में इस्लामिक आतंकवादियों को प्रेरणा कहां से मिलती है? बहुत से लोग हिन्दूओं को ये सलाह देते हैं कि मुसलिम आतंकवादियों पर जबाबी हमले करने के बजाए आतंकवाद के मूल कारण को खत्म करें


ये लोग मूल कारण भी बताते हैं निर्दोष हिन्दूओं का खून बहाने वाले आतंकवादियों के लिए हर तरह की सहानुभूति रखने वाले खूनी उदारवादी हमे बताते हैं कि आतंकवाद के पनपने व बढ़ने का कारण अन पढ़ता, गरीबी, शोषण और भेदभाव है


ये तथाकथित उदारबादी कुतर्कदेते हैं कि इन आतंकवादियों का खात्मा करने पर जोर देने के बजाए आतंकवाद के इन चार कारणों को खत्म किया जाए

इन चार कारणों के समाप्त होते ही आतंकवाद खत्म हो जाएगा
इन प्रशनों का उतर देने से पहले ये समझ लेना बहुत जरूरी है कि मुझें नहीं लगता ये कातिल उदारवादी या खूनी बुद्धिजीवी भारत के प्रति बफादार हैं


ये हर व्यक्ति की भावनात्मक ताकत को खत्म कर उसे जिन्दा मुर्दा बना देना चाहते हैं मतलब मजबूरी को ये हिन्दूओं की मानसिकता का अंगबना देना चाहते हैं

इस तरह की हीन भावना के साथ कोई भी देश य़ा समाज लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकता ये कहना बकवास है कि जो आतंकवादी आज तक हमले कर लाखों हिन्दूओं का खूनबहा चुके हैं वो गरीब हैं


उधाहरण के लिए दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी ओसामा विनलादेन अरबपति है खनिज तेल से वेहिसाब पैसा कमाने वाले अमीर देश मुसलिम आतंकवादियों को संरक्षण और आर्थिक मदद पहुंचाते हैं


ब्रिटेन में आतंकवादी हमलों को अन्जाम देने के दोषी सबके सब आतंकवादी साधन सम्पन  मुसलमान हैं मुसलिम आतंकवादी अनपढ़ भी नहीं हैं

आतंकवादियों के अधिकतर सरगना डाकटर, चार्टड एकौंटैंट (CA), एम बी ए (MBA) और अध्यापक हैं


उधाहरण के लिए दिल्ली में धनतेरस के दिन सैंकड़ों हिन्दूओं का कतल करने वाला आतंकवादी रसायन विज्ञान में सनातकोतर है वटायम सुकेयर पर हमले का असफल प्रयास करने वाला आतंकवादी सहजाद MBA है वो भी अमेरिका के एकउच्चस्तरीय विश्वविद्यालय से
उसका सबन्ध पाकिस्तान के एक अमीर परिबार से है


निश्चित तौर पर उसने अपने ही देश पाकिस्तान में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं सहा 11 सित्मबर, 2001 को जिन 9 लोगों के गिरोह ने चार हबाई जहाजों को अगवा कर WorldTrade Towers सहित अन्य जगहों को निशाना बनाया निश्चित तौर पर उनके साथ भी अमेरिका में किसी तरह का भेदभाव या शोषण नहीं हुआ था


इसलिए ये कहना कि आतंकवाद गरीब आतंकवादियों की देन है पूरी से मूर्खतापूर्ण है अगर हम बांमपंथी उदारवादी कुतर्क को मान भी लेंतो क्या बामपंथी इस बात से सहमत हैं कि मुसलिम देशों में प्रताड़ित सबके सब गैर मुसलमानों को आतंकवादी बनकर मुसलमानों का कत्लकरना चाहिए
कशमीर घाटी जहां पर मुसलमान बहुमत में हैं वहां पर घारा 370 लगाकर बहुसंख्यक मुसलमानों को विशेषाधिकार दिए गए हैं व अल्पसंखयक हिन्दूओं का कत्लयाम किया गया ,हिन्दूओं की मां- बहन वेटियों के साथ बालातकार किए गए, अन्त में उन्हें वहां से भगा दिया गया


वो अपने ही देश में वेघर होकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैंतो क्या ये उदारबादी उनके द्वारा मुसलमानों के विरूद्ध हथियार उठाने पर उनका बैसा ही साथ देंगे जैसा वो आज तक हिन्दूओं का कत्ल करने वाले मुसलिम आतंकवादियों का देते आए हैं? यह कहना कि क्योंकि आतंकवादी मरने-मारने को तैयार हैं, वेअपना विवेक खो चुके हैं,उनका कोई घरबार नहीं है इसलिए उनका कत्ल नहीं किया जाना चाहिए
आतंकवादियों के सरगनाओं की इस आतंकवाद रूपी पागलपन में भी एक सोची समझी रणनीति और योजना है जिसके लिए उन्होंने निश्चित राजनीतिक उद्देश्य चुने हैं


इसलिए हमेंआतंकवादियों को कुचलने के साथ-साथ एक ऐसी रणनीति पर अमल करना है जो आतंकवादियों के उद्देश्यों को पूरी तरह से विफलकर दे


ऐसी रणनीति कैसे बनाई जा सकती है राबर्ट टरैगर और देशी सलाबा(Robert Trager and Dessislava Zagorcheva) ने शोधपत्र आतंकवाद का मुकाबला((‘DeterringTerrorism’ International Security,vol 30, No 3, Winter 2005/06, pp87-123) में आतंकवादका मुकाबला करने के लिए रणनीति बनाने के लिए समान्य सिद्धांत बताए हैं

सामरिक योजना अगर मुसलिम समाज आतंकवादियों के इन उद्देश्यों को गैर इस्लामिक घोषित कर इनकी निंदा और विरोध नहीं करता है तो इन सिद्धांतों का उपयोग कर मैं इस्लामिक आतंकवादियों के राजनैतिक उदेश्यों को असफल करने के लिए निम्नलिखित सामरिक नीतिका समर्थनकरता हूं


षडयन्त्र-1 :-कशमीर पर भारत को आतंकित करना
रणनीति-1:- धारा 370 समाप्त कर, भूतपूर्व सैनिकों को कशमीर घाटी में बसाना कशमीरी हिन्दूओं के लिए पुनन कशमीर का निर्माण करना,बलूचियों और सिंधियों को आजादी के लिए सहायता देना


षडयन्त्र-2:- हमारे मन्दिरों में बम धमाके कर भक्तों का कत्ल करना
रणनिति-2:- जैसे को तैसा नीति अपनाते हुए काशी विश्वानाथ मन्दिर परिसर सहित 300 अन्य जगहों से मसजिदों को हटाना
षडयन्त्र :-3 भारत को दारूल इस्लाम बनाना
रणनिति-3:- भारत में एक समान नागरिक संहिता लागू करना,पढ़ाई के लिए संस्कृत को अनिवार्या बनाना,वन्देमातरम् का गान जरूरी करना और भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर सिर्फ उन्हीं गैर हिन्दूओं को बोट का अधिकार देना जो गर्व से ये स्वीकार करें कि उनके पूर्बज हिन्दू हैं


भारत का हिन्दूस्तान (हिन्दूओं और उन गैर हिन्दूओं का देश जिनके पूर्बज हिन्दू हैं ) के रूप में पुन : नामकरण करना


षडयन्त्र-4 अवैध आप्रवास, धर्मांतरण, और परिवार नियोजन को अपनाने से इनकार द्वारा भारत की जनसांख्यिकी बदलें.

रणनिति-4:- देश में एक ऐसा राष्ट्रीय नियम लागू करें जिसके अनुसार हिन्दू धर्म से किसी भी अन्य धर्म में धर्मांतरण करना बर्जित हो
किसी भी अन्य धर्म से हिन्दू धर्म में घर वापसी इसमें प्रतिबन्धित नहीं होनी चाहिए


गैर हिन्दूओं द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी जाति में घर वापसी करने का स्वागत करें बशर्ते वे अनशासन का पालन करने को तैयार हों
भारत में रहने वाले अबैध वंगलादेशियों की शंख्या के अनुशार बंगलादेश की जमीन पर कब्जा कर लिया जाए


आज की संख्या के अनुसार सिलहट से खुलना तक के उतर का एक-तिहाई भारत को अबैध रूप से भारत में रह रहे बंगलादेशियों को बसाने के लिए अपने कब्जे में ले लेना चाहिए


षडयन्त्र-5 हिन्दूओं के अन्दर आत्मगलानी का बोध पैदा करने व उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने के मकसद से मस्जिदों,मदरसों और चर्चों में अश्लील लेखन और उपदेश के माध्यम से हिंदू धर्म को बदनाम करना

रणनिति-5:- हिन्दू मानसिकता के विकाश का प्रचार-प्रसार करें( मेरी नईपुस्तक ‘हिंदुत्व और राष्ट्रीय पुनर्जागरण’ Haranand, 2010 देखें
) समाधान का समय भारत इस तरहकी रणनीति अपनाकर सिर्फपांच बर्षो में अपनी आतंकवादकी समस्या का समाधाननिकाल सकता है परन्तु इसकेलिए हमें आतंकवाद द्वारा सिखाए गए उपरलिखितचार सबक हर समय याद रखनेहोंगे और राष्ट्र की रक्षा केलिए साहसिक,जोखिम भरे वकठोर कदम उठाने के लिए हिन्दूमानसिकता का निर्माण करना होगा
यदि यहूदियों को गैस चैंबरों मेंजलाए जाने के लिए मिमयाते हुएजाने वाले मेमनों से ज्वलंत शेर मेंसिर्फ 10 वर्ष मेंबदला जा सकता है तो हिन्दूओं के लिए तो उनसे कहीं वेहतरहालात (आज भी हम भारतका 83 प्रतिशत हैं) में ये कामसिर्फ पांच वर्ष मेंकरना किसी भी तरह से मुशकिलनहीं है
परम्पूजनीय गुरूगोविन्द सिंहजी द्वारा हमें पहलेही रास्ता दिखा दिया गया हैकि किस तरह सिर्फ पांच निडरलोग आध्यात्मिक मार्गदर्शन मेंसारे समाज को बदल सकते हैं
यहां तक कि अगर आधे हिन्दूमतदाता भी संगठित होकरहिन्दू के रूप में, इमानदारी से हिंदूएजेंडा के लिए प्रतिबद्धपार्टी को,बोट डालने के लिएप्रोतसाहित किए जा सकें तब भी हम परिवर्तन के लिए एकमजबूत आधार तैयार कर सकते हैं
और अंततः सच्चाई के इस क्षण मेंएक लोकतांत्रिक हिंदुस्तान मेंयही आतंकवाद से लड़नेकी रणनीति में निम्नतम जरूरत है

12 November 2012

'हरि अनंत, हरि कथा अनंता'

PHOTOS: इस कृष्ण मंत्र से करें पीपल पूजा..पूरी होगी हर इच्छा

हिन्दू धर्मग्रंथों में लिखा गया है कि 'हरि अनंत, हरि कथा अनंता'। इस बात के जरिए कण-कण में बसे ईश्वर के स्वरूप व शक्तियों की ही महिमा उजागर की गई है। इसी धर्म आस्था को बल देती है - पीपल पूजा। हिन्दू धर्म में पीपल को देव वृक्ष माना जाता है।

श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान कृष्ण ने पीपल को स्वयं का स्वरूप बताया है। इसे 'अश्वत्थ' कहकर पुकारा गया है। यही कारण है कि देवमूर्ति की पूजा या मंदिर न जाने की दशा में पीपल पूजा ही दरिद्रता दूर कर सुख, ऐश्वर्य व धन की कामना को पूरी करने वाली मानी गई है।

इसके लिए हर रोज या विशेष वार, तिथियों पर एक विशेष मंत्र का ध्यान कर पीपल पूजा का महत्व बताया गया है। तस्वीरों के जरिए जानिए पीपल के धार्मिक महत्व के साथ मंत्र विशेष से पीपल पूजा की सरल विधि -


जीवन अनिश्चताओं से भरा है। सुख-दु:ख का सिलसिला इस बात को साबित भी करते हैं। जीवन के इन तमाम उतार-चढ़ावों के बाद भी इंसान तन, मन या आत्म बल के बूते बुरे वक्त का सामना कर सुखों को सुनिश्चित करता है। 

हिन्दू धर्मग्रंथ भी तन, मन और आत्मा को सबल बनाने वाले ऐसे ही धार्मिक उपायों को उजागर करते हैं, जो सरल ही नहीं, बल्कि प्रकृति रूप ईश्वर के दर्शन व संगति का बेहतर जरिया भी हैं। ऐसा ही एक उपाय है - अश्वत्थ यानी पीपल के पेड़ की पूजा।

हिन्दू धर्म ग्रंथ श्रीमद्गभगवदगीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं को अश्वत्थ स्वरूप बताया है। वहीं शास्त्रों में पीपल के वृक्ष में अनेक देवताओं का वास माना गया है। इसलिए जीवन से जुड़ी तमाम परेशानियों, संकट, रोग व दरिद्रता से बचने, नवग्रह दोष शांति के लिए हर रोज देव वृक्ष पीपल की पूजा यहां बताए मंत्र से करना बहुत ही शुभ माना गया है।

- सुबह स्नान के बाद सफेद या पीले रेशमी वस्त्र पहन पवित्र स्थान या देवालय में स्थित पीपल वृक्ष की जड़ में गाय के दूध व पवित्र गंगाजल में गुलाब के फूल, तिल, चंदन मिलाकर अर्पित करते हुए नीचे लिखा मंत्र संकटनाश व समृद्धि की कामना से बोलें -


आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं शरणं गत:।

देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।

अश्वत्थ ह्युतझुग्वास गोविन्दस्य सदाप्रिय।

अशेषं हर मे पापं वृक्षराज नमोस्तुते।

- जल अर्पण व मंत्र स्तुति के बाद कोई भी मिठाई या मीठा नैवेद्य चढ़ाकर इष्ट या शिव, विष्णु की आरती करें।

याद रखिये आपके पास जो सबसे कीमती चीज है, वो है आपका जीवन


एक जाने-माने स्पीकर ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सेमीनार शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए.

फिर उसने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें से किसी एक को दूंगा पर उससे पहले मुझे ये कर लेने दीजिये .” और उसने नोट को अपनी मुट्ठी में चिमोड़ना शुरू कर दिया. और फिर उसने पूछा,” कौन है जो अब भी यह नोट लेना चाहता है?” अभी भी लोगों के हाथ उठने शुरू हो गए.

“अच्छा” उसने कहा,” अगर मैं ये कर दूं ? “ और उसने नोट को नीचे गिराकर पैरों से कुचलना शुरू कर दिया. उसने नोट उठाई , वह बिल्कुल चिमुड़ी और गन्दी हो गयी थी.


“ क्या अभी भी कोई है जो इसे लेना चाहता है?”. और एक बार फिर हाथ उठने शुरू हो गए.

“ दोस्तों , आप लोगों ने आज एक बहुत महत्त्वपूर्ण पाठ सीखा है. मैंने इस नोट के साथ इतना कुछ किया पर फिर भी आप इसे लेना चाहते थे क्योंकि ये सब होने के बावजूद नोट की कीमत घटी नहीं,उसका मूल्य अभी भी 500 था.

जीवन में कई बार हम गिरते हैं, हारते हैं, हमारे लिए हुए निर्णय हमें मिटटी में मिला देते हैं. हमें ऐसा लगने लगता है कि हमारी कोई कीमत नहीं है. लेकिन आपके साथ चाहे जो हुआ हो या भविष्य में जो हो जाए , आपका मूल्य कम नहीं होता. आप स्पेशल हैं, इस बात को कभी मत भूलिए.

कभी भी बीते हुए कल की निराशा को आने वाले कल के सपनो को बर्बाद मत करने दीजिये. याद रखिये आपके पास जो सबसे कीमती चीज है, वो है आपका जीवन.”

मंगलवार और शनिवार के लिए हनुमानजी का 1 चमत्कारी उपाय


आज के समय में हनुमानजी की भक्ति सबसे जल्दी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली मानी गई है। जानिए मंगलवार और शनिवार के लिए हनुमानजी का 1 चमत्कारी उपाय............

हनुमानजी को माता सीता ने अमरता का वरदान दिया है। श्रीराम के अनन्य सेवक बजरंग बली अपने भक्तों को सभी सुख प्रदान करते हैं। वे बल, बुद्धि और विद्या के दाता माने गए हैं। 


बल, बुद्धि और विद्या के बल पर ही कोई भी इंसान धन-दौलत प्राप्त कर सकता है। यदि कि सी व्यक्ति के जीवन में धन से जुड़ी समस्याएं चल रही हैं तो उसे हनुमानजी को पूजने से जल्द ही शुभ फल प्राप्त होते हैं।


हर मंगलवार और शनिवार को किसी भी हनुमान मंदिर में 11 काले उड़द के दाने, सिंदूर, चमेली का तेल, फूल, प्रसाद अर्पित करें।साथ ही सुंदरकांड का पाठ करें या समय अभाव हो तो हनुमान चालिसा का पाठ करें। मंगलवार को शनिवार को हनुमानजी का विधिवत पूजन करने से सभी प्रकार के कष्ट और क्लेश नष्ट हो जाते हैं।


इसके साथ ही कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव भी दूर हो जाते हैं। इस उपाय को अपनाने से कुछ ही दिनों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे।

ध्यान रखें पवित्रता का पूरा ध्यान रखें। किसी भी प्रकार के अधार्मिक कर्मों से दूर रहें। किसी भी स्थिति में घर के बड़े-बुजूर्गों सहित अन्य वृद्धजनों का सम्मान करें, उनका दिल ना दुखाए।


11 November 2012

ॐ - मेरी रक्षा करो बजरंगबली - ॐ


मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |
मेरी दुःख के भंवर में नाव चली, 
मुझे सूझे किनारा ना कोई ,
मुझे सूझे सहारा ना कोई,
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |


जब हो गए मुर्छित लछमन जी, तुम ही तो संजीवनी लाये थे,

तोड़ी थी भुजा अहिरावन की, तुम काम राम के आये थे,
मुझपर भी संकट छाया है मेरे दिल ने तुम्हे बुलाया है.
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |

सुध लेने गए सिया माता की, सोने की लंका जला डाली,
हे महाबली तेरी शक्ती ने रावन की जड़े हिला डाली,
मेरा दुखों से मन हारा है, मैंने रो के तुम्हे पुकारा है.
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |

तेरी दिव्य अलौकिक शक्ति का, कपि डंका चारो ओर बजे,
उसे भूत पिशाच न तंग करे जो मन से तेरा नाम जपे,
तुम भय भंजन सुखदायक हो, निर्दोष के सदा सहायक हो,
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |

मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |
मेरी दुःख के भंवर में नाव चली,
मुझे सूझे किनारा ना कोई ,
मुझे सूझे सहारा ना कोई,
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |


!!! चमत्कारी सौंफ !!!



सौंफ प्रतिदिन घर में प्रयुक्त किए जाने वाले मसालों में से एक है। इसका नियमित उपयोग सेहत के लिए लाभदायक है।

* सौंफ और मिश्री समान भाग लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लें। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है तथा नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है।


* सौंफ का अर्क दस ग्राम शहद मिलाकर लें। खाँसी में तत्काल आराम मिलेगा।

* बेल का गूदा 10 ग्राम और 5 ग्राम सौंफ सुबह-शाम चबाकर खाने से अजीर्ण मिटता है और अतिसार में लाभ होता है।

* यदि आपको पेटदर्द होता है, तो भुनी हुई सौंफ चबाइए, तुरंत आराम मिलेगा। सौंफ की ठंडाई बनाकर पीजिए, इससे गर्मी शांत होगी और जी मिचलाना बंद हो जाएगा।

* हाथ-पाँव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर मिश्री मिलाकर खाना खाने के पश्चात 5-6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।

* सौंफ रक्त को साफ करने वाली एवं चर्मरोग नाशक है।



अतिबला (खरैटी) Country Mallow से उपचार



विभिन्न भाषाओं में नाम :

संस्कृत वला, वाट्यालिका, वाट्या, वाट्यालक

हिंदी खरैटी, वरयारी, वरियार
बंगाली श्वेतवेडेला
मराठी लघुचिकणा, खिरहंटी
गुजराती खपाट बलदाना
तेलगू मुपिढी
लैटिन सिडकार्सि फोलिया
अंग्रेजी हॉर्नडिएमव्ड सिडा


गुण : चारों प्रकार की अतिबला शीतल, मधुर, बलकारक तथा चेहरे पर चमक लाने वाली, चिकनी, भारी (ग्राही), खून की खराबी तथा टी.बी. के रोगों को दूर करने में सहायक है।

विभिन्न रोगों में अतिबला (खरैटी) से उपचार:


1 पेशाब का बार-बार आना : : - 

खरैटी की जड़ की छाल का चूर्ण यदि चीनी के साथ सेवन करें तो पेशाब के बार-बार आने की बीमारी से छुटकारा मिलता है।

2 प्रमेह (वीर्य प्रमेह) :: - 


अतिबला के बारीक चूर्ण को यदि दूध और मिश्री के साथ सेवन किया जाए तो यह प्रमेह को नष्ट करती है। महावला मूत्रकृच्छू को नष्ट करती है।

3 गीली खांसी :: - 


अतिबला, कंटकारी, बृहती, वासा (अड़ूसा) के पत्ते और अंगूर को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लेते हैं। इसे 14 से 28 मिलीमीटर की मात्रा में 5 ग्राम शर्करा के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से गीली खांसी ठीक हो जाती है।

4 सीने में घाव (उर:क्षत) :: - 


बलामूल का चूर्ण, अश्वगंधा, शतावरी, पुनर्नवा और गंभारी का फल समान मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार लेते हैं। इसे 1 से 3 ग्राम की मात्रा में 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से उर:क्षत नष्ट हो जाता है।

5 मलाशय का गिरना :: - 


अतिबला (खिरेंटी) की पत्तियों को एरंडी के तेल में भूनकर मलाशय पर रखकर पट्टी बांध दें।

6 बांझपन दूर करना :: - 


अतिबला के साथ नागकेसर को पीसकर ऋतुस्नान (मासिक-धर्म) के बाद, दूध के साथ सेवन करने से लम्बी आयु वाला (दीर्घजीवी) पुत्र उत्पन्न होता है।

7 मसूढ़ों की सूजन :: - 


अतिबला (कंघी) के पत्तों का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन 3 से 4 बार कुल्ला करें। रोजाना प्रयोग करने से मसूढ़ों की सूजन व मसूढ़ों का ढीलापन खत्म होता है।

8 नपुंसकता (नामर्दी) :: - 


अतिबला के बीज 4 से 8 ग्राम सुबह-शाम मिश्री मिले गर्म दूध के साथ खाने से नामर्दी में पूरा लाभ होता है।

9 दस्त :: - 


अतिबला (कंघी) के पत्तों को देशी घी में मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पित्त के उत्पन्न दस्त में लाभ होता है।

10 पेशाब के साथ खून आना :: - 


अतिबला की जड़ का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से पेशाब में खून का आना बंद हो जाता है।

11 बवासीर :: - 


अतिबला (कंघी) के पत्तों को पानी में उबालकर उसे अच्छी तरह से मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में उचित मात्रा में ताड़ का गुड़ मिलाकर पीयें। इससे बवासीर में लाभ होता है।

12 रक्तप्रदर :: - 


*खिरैंटी और कुशा की जड़ के चूर्ण को चावलों के साथ पीने से रक्तप्रदर में फायदा होता है।

*खिरेंटी के जड़ का मिश्रण (कल्क) बनाकर उसे दूध में डालकर गर्म करके पीने से रक्त प्रदर में लाभ होता है।

*रक्तप्रदर में अतिबला (कंघी) की जड़ का चूर्ण 6 ग्राम से 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम चीनी और शहद के साथ देने से लाभ मिलता है।

*अतिबला की जड़ का चूर्ण 1-3 ग्राम, 100-250 मिलीलीटर दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से रक्तप्रदर में लाभ मिलता है।"

13 श्वेतप्रदर : : - 

*अतिबला की जड़ को पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ 3 ग्राम की मात्रा में दूध में मिलाकर सेवन करने से श्वेतप्रदर में लाभ प्राप्त होता है।

*खिरैटी की जड़ की राख दूध के साथ देने से प्रदर में आराम मिलता है।"

14 दर्द व सूजन में :: - दर्द भरे स्थानों पर अतिबला से सेंकना फायदेमंद होता है।

15 पित्त ज्वर :: - खिरेटी की जड़ का शर्बत बनाकर पीने से बुखार की गर्मी और घबराहट दूर हो जाती है।

16 रुका हुआ मासिक-धर्म :: - खिरैटी, चीनी, मुलहठी, बड़ के अंकुर, नागकेसर, पीले फूल की कटेरी की जड़ की छाल इनको दूध में पीसकर घी और शहद मिलाकर कम से कम 15 दिनों तक लगातार पिलाना चाहिए। इससे मासिकस्राव (रजोदर्शन) आने लगता है।

17 पेट में दर्द होने पर :: - खिरैंटी, पृश्नपर्णी, कटेरी, लाख और सोंठ को मिलाकर दूध के साथ पीने से `पित्तोदर´ यानी पित्त के कारण होने वाले पेट के दर्द में लाभ होगा।

18 मूत्ररोग :: - 


*अतिबला के पत्तों या जड़ का काढ़ा लेने से मूत्रकृच्छ (सुजाक) रोग दूर होता है। सुबह-शाम 40 मिलीलीटर लें। इसके बीज अगर 4 से 8 ग्राम रोज लें तो लाभ होता है।

*खिरैटी के पत्ते घोटकर छान लें, इसमें मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है।

*खिरैटी के बीजों के चूर्ण में मिश्री मिलाकर दूध के साथ लेने से मूत्रकृच्छ मिट जाती है।"

19 फोड़ा (सिर का फोड़ा) : : - अतिबला या कंघी के फूलों और पत्तों का लेप फोड़ों पर करने से लाभ मिलता है।

20 शरीर को शक्तिशाली बनाना : : - 


*शरीर में कम ताकत होने पर खिरैंटी के बीजों को पकाकर खाने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।

*खिरैंटी की जड़ की छाल को पीसकर दूध में उबालें। इसमें घी मिलाकर पीने से शरीर में शक्ति का विकास होता है।"