18 September 2012

!!! आकर्षण का सिद्धांत !!!




दोस्तों आपने “Om Shanti Om” का ये dialogue “अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो सारी कायनात उसे तुम से मिलाने में लग जाती है” ज़रूर सुना होगा. इसी को सिद्धांत के रूप में Law of Attraction कहा जाता है. ये वो सिद्धांत है जो कहता है कि आपकी सोच हकीकत बनती है. Thoughts become things. For example: अगर आप सोचते हैं की आपके पास बहुत पैसा है तो सचमुच आपके पास बहुत पैसा हो जाता है, यदि आप सोचते हैं कि मैं हमेशा गरीबी में ही जीता रह जाऊंगा, तो ये भी सच हो जाता है.


शायद सुनने में अजीब लगे पर ये एक सार्वभौमिक सत्य है. A Universal Truth. यानि हम अपनी सोच के दम पर जो चाहे वो बन सकते हैं. और ये कोई नयी खोज नहीं है भगवान् बुद्ध ने भी कहा है “हम जो कुछ भी हैं वो हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है. “ स्वामी विवेकानंद ने भी यही बात इन शब्दों में कही है ” हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं.”


पर इतनी बड़ी बात को इतनी आसानी से मान लेना बहुत कठिन है. आपके मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ सकते हैं. और आज पर हम कुछ इसी तरह के सवालों का समाधान जानने की कोशिश करेंगे. आज का ये लेख इस विषय पर सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक “ The Law of Attraction” का Hindi Translation है. इसे Steve Pavlina ने लिखा है.

THE LAW OF ATTRACTION
आकर्षण का सिद्धांत 


The Law of Attraction या आकर्षण का सिद्धांत यह कहता है कि आप अपने जीवन में उस चीज को आकर्षित करते हैं जिसके बारे में आप सोचते हैं . आपकी प्रबल सोच हकीक़त बनने का कोई ना कोई रास्ता निकाल लेती है . लेकिन Law of Attraction कुछ ऐसे प्रश्नों को जन्म देता है जिसके उत्तर आसान नहीं हैं .पर मेरा मानना है कि problem Law of Attraction कि वजह से नहीं है बल्कि इससे है कि Law of Attraction को objective reality (वस्तुनिष्ठ वास्तविकता ) में कैसे apply करते हैं .


यहाँ ऐसे ही कुछ problematic questions दिए गए हैं ( ये उन questions का generalization हैं जो मुझे email द्वारा मिले हैं )
क्या होता है जब लोगों की intention (इरादा,सोच,विचार,उद्देश्य) conflict करती है ,जैसे कि दो लोग एक ही promotion के बारे में सोचते हैं , जबकि एक ही जगह खाली है ?
क्या छोटे बच्चों , या जानवरों की भी intentions काम करती है ?
अगर किसी बच्चे के साथ दुष्कर्म होता है तो क्या इसका मतलब है कि उसने ऐसा इरादा किया था ?
अगर मैं अपनी relation अच्छा करना चाहता हूँ लेकिन मेरा / मेरी spouse इसपर ध्यान नहीं देती , तो क्या होगा ?



ये प्रश्न Law of Attraction की possibility को कमज़ोर बनाते हैं .कभी – कभार Law of Attraction में विश्वास करने वाले लोग इसे justify करने के लिए कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ जाते हैं . For Exapmle, वो कहते हैं कि बच्चे के साथ दुष्कर्म इसलिए हुआ क्योंकि उसने इसके बारे में अपने पिछले जनम में सोचा था . भाई , ऐसे तो हम किसी भी चीज को explain कर सकते हैं , पर मेरी नज़र में तो ये तो जान छुड़ाने वाली बात हुई .


मैं औरों द्वारा दिए गए इन प्रश्नों के उत्तर से कभी भी satisfy नहीं हुआ , और यदि Law of Attraction में विश्वास करना है तो इनके उत्तर जानना महत्त्वपूर्ण है .कुछ books इनका उत्तर देने का प्रयास ज़रूर करती हैं पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पातीं . पर subjective reality (व्यक्ति – निष्ठ वास्तविकता )के concept में इसका सही उत्तर ढूँढा जा सकता है .


Subjective Reality एक belief system (विश्वास प्रणाली) है जिसमे

 (1) सिर्फ एक consciousness (चेतना) है ,

(2) आप ही वो consciousness हैं ,

(3) हर एक चीज , हर एक व्यक्ति, जो वास्तविकता में है वो आप ही की सोच का परिणाम है .



शायद आप को आसानी से दिखाई ना दे पर subjective reality Law of Attraction के सभी tricky questions का बड़ी सफाई से answer देती है . मैं explain करता हूँ ….


Subjective reality में केवल एक consciousness होती है – आपकी consciousness. इसलिए पूरे ब्रह्माण्ड में intentions का एक ही श्रोत होता है -आप . आप भले ही वास्तविकता में तमाम लोगों को आते-जाते, बात करते देखें , वो सभी आपकी consciousness के भीतर exist करते हैं. आप जानते हैं कि आपके सपने इसी तरह काम करते हैं,पर आप ये नहीं realize करते की आपकी waking reality एक तरह का सपना ही है. वो सिर्फ इसलिए सच लगता है क्योंकि आप विश्वास करते हैं कि वो सच है.


चूँकि और कोई भी जिससे आप मिलते हैं वो आपके सपने का हिस्सा हैं, आपके अलावा किसी और की कोई intention नहीं हो सकती.सिर्फ आप ही की intentions हैं. पूरे Universe में आप अकेले सोचने वाले व्यक्ति हैं.
यह ज़रूरी है कि subjective reality में “आप” को अच्छे से define किया जाये . “आप” आपका शरीर नहीं है. “आप” आपका अहम नहीं है. मैं यह नहीं कह रहा हूँ की आप एक conscious body हैं जो unconscious मशीनों के बीच घूम रहे हैं. यह तो subjective reality की समझ के बिलकुल उलट है. सही viewpoint यह है कि आप एक अकेली consciousness हैं जिसमे सारी वास्तविकता घट रही है.


Imagine करिए की आप कोई सपना देख रहे हैं. उस सपने में आप वास्तव में क्या हैं ? क्या आप वही हैं जो आप खुद को सपने में देख रहे हैं? नहीं, बिलकुल नहीं , वो तो आपके सपने का अवतार है. आप तो सपना देखने वाला व्यक्ति हैं.पूरा सपना आपकी consciousness में होता है. सपने के सारे किरदार आपकी सोच का परिणाम हैं, including आपका खुद का अवतार. दरअसल , यदि आप lucid dreaming सीख लें तो आप आपने सपने में ही अपने अवतार बदल सकते हैं. Lucid dreaming में आप वो हर एक चीज कर सकते हैं जिसको कर सकने में आपका यकीन हैं.

Physical reality इसी तरह से काम करती है. यह ब्रह्माण्ड आप के सपने के ब्रह्माण्ड की तुलना में कहीं घना है, इसलिए यहाँ बदलाव धीरे-धीरे होता है. पर यह reality भी आपके विचारों के अनुरूप होती है, ठीक वैसे ही जैसे आपके सपने आपके सोच के अनुरूप होते है. “आप” वो dreamer हैं जिसके सपने में यह सब घटित हो रहा है. कहने का मतलब; यह एक भ्रम है कि और लोगों कि intentions है, वो तो बस आपकी सोच का परिणाम हैं.

Of course, यदि आप बहुत strongly believe करते हैं कि औरों की intentions हैं, तो आप अपने लिए ऐसा ही सपना बुनेंगे.पर ultimately वो एक भ्रम है.


तो आइये देखते हैं कि Subjective Reality कैसे Law of Attraction के कठिन प्रश्नों का उत्तर देती है:


क्या होता है जब लोगों की intention (इरादा,सोच,विचार,उद्देश्य) conflict करती है ,जैसे कि दो लोग एक ही promotion के बारे में सोचते हैं , जबकि एक ही जगह खाली है ?


चूँकि आप अकेले ही ऐसे व्यक्ति हैं जिसकी intentions हैं, ये महज एक internal conflict है – आपके भीतर का . आप खुद उस thought(intention) को जन्म दे रहे हैं कि दोनों व्यक्ति एक ही position चाहते हैं . लेकिन आप ये भी सोच रहे हैं (intending) कि एक ही व्यक्ति को यह position मिल सकती है. .यानि आप competition intend कर रहे हैं. यह पूरी situation आप ही की creation है. आप competition में believe करते हैं, इसलिए आपके जीवन में वही घटता है. शायद आपकी पहले se ही कुछ belief है (thoughts and intentions) कि किसको promotion मिलेगी , ऐसे में आपकी उम्मीद हकीकत बनेगी. पर शायद आप की ये belief हो कि life unfair है uncertain है , तो ऐसे में आपको कोई surprise मिल सकता है क्योंकि आप वही intend कर रहे हैं .


अपने यथार्थ में एक अकेला Intender होना आपके कंधे पर एक भारी जिम्मेदारी डालता है . आप ये सोच कर की दुनिया अनिश्चित है unfair है , आदि , अपनी reality का control छोड़ सकते हैं , पर आप अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ सकते हैं . आप इस Universe के एक मात्र रचियता हैं . यदि आप युद्ध , गरीबी , बिमारी , इत्यादि के बारे में सोचेंगे तो आपको यही देखने को मिलेगा . यदि आप शांती , प्रेम , ख़ुशी के बारे में सोचेंगे तो आपको ये सब हकीकत में होते हुए दिखेगा . आप जब भी किसी चीज के बारे में सोचते हैं तो , तो दरअसल उस सोच को वास्तविकता में प्रकट होने का आह्वान करते हैं.

क्या छोटे बच्चों , या जानवरों की भी intentions काम करती है ?



नहीं , यहाँ तक की आपके शरीर की भी कोई intention नहीं होती है —सिर्फ आपके consciousness की intentions होती हैं . आप अकेले हैं जिसकी intentions हैं , इसलिए वो होता है जो आप बच्चे या जानवरों के लिए सोचते हैं . हर एक सोच एक intention है , तो आप जैसे भी उनके बारे में सोचेंगे यथार्थ में उनके साथ वैसा ही होगा . ये धयन में रखिये की beliefs hierarchical (अधिक्रमिक) हैं , इसलिए यदि आपकी ये belief की वास्तविकता अनिश्चित है , uncontrollable है ज्यादा शशक्त है तो ये आपकी अन्य beliefs, जिसमे आपको कम यकीन है , को दबा देंगी . आपके सभी विचारों का संग्रह ये तय करता है की आपको हकीकत में क्या दिखाई देगा .


अगर किसी बच्चे के साथ दुष्कर्म होता है तो क्या इसका मतलब है कि उसने ऐसा इरादा किया था ?


नहीं . इसका मतलब है की आपने ऐसा intend किया था . आप child abuse के बारे में सोच कर उससे वास्तविकता में होने के लिए intend करते हैं .आप जितना ही child abuse के बारे में सोचेंगे ( या किसी और चीज के बारे में ) उतना ही हकीकत में आप उसका विस्तार देखेंगे . आप जिस बारे में भी सोचते हैं उसका विस्तार होता है , और वो बस आप तक ही सीमित नहीं होता बल्की पूरे ब्रह्माण्ड में ऐसा होता है .

अगर मैं अपनी relation अच्छा करना चाहता हूँ लेकिन मेरा / मेरी spouse इसपर ध्यान नहीं देती , तो क्या होगा ?


यह intending conflict का एक और उदाहरण है . आप एक intention अपने अवतार की कर रहे हैं और एक अपने spouse की , तो जो actual intention पैदा होती है वो conflict की होती है . इसलिए आप जो experience करते हैं , depending on your higher order beliefs, वो आपके spouse के साथ आपका conflict होता है . अगर आपकी thoughts conflicted हैं तो आपकी reality भी conflicted होगी .

इसीलिए अपने विचारों की जिम्मेदारी लेना इतना महत्त्वपूर्ण है . यदि आप दुनिया में शांती देखना चाहते हैं तो अपनी reality में हर एक चीज के लिए शांती intend कीजिये . यदि आप loving relationship enjoy करना चाहते हैं तो सभी के लिए loving relationships intend कीजिये . यदि आप ऐसा सिर्फ अपने लिए ही intend करते हैं और दूसरों के लिए नहीं तो इसका मतलब है की आप conflict, division, separation intend कर रहे हैं , और as a result आप यही experience करेंगे .


अगर आप किसी चीज के बारे में बिलकुल ही सोचना छोड़ देंगे तो क्या वो गायब हो जाएगी ? हाँ , technically वो गायब हो जाएगी . लेकिन practically आप जिस चीज को create कर चुके हैं उसे uncreate करना लगभग असंभव है . आप उन्ही समस्यों पर focus कर के उन्हें बढाते जायेंगे . पर जब आप अभी जो कुछ भी वास्तविकता में अनुभव कर रहे हैं उसके लिए खुद को 100 % responsible मानेंगे तो आप में वो शक्ति आ जाएगी जिससे आप अपने विचारों को बदलकर अपनी वास्तविकता को बदल सकते हैं .

ये सारी वास्तविकता आप ही की बनाई हुई है . उसके बारे में अच्छा feel करिए . विश्व की richness के लिए grateful रहिये . और फिर अपने decisions और intentions से उस reality का निर्माण करना शुरू कीजिये जो आप सच -मुच चाहते हैं .उस बारे में सोचिये जिसकी आप इच्छा रखते हैं , और जो आप नहीं चाहते हैं उससे अपना ध्यान हटाइए . ये करने का सबसे आसान और natural तरीका है अपने emotions पर ध्यान देना . अपनी इच्छाओं के बारे में सोचना आपको खुश करता है और जो आप नहीं चाहते हैं उस बारे में सोचना आपको बुरा feel कराता है . जब आप notice करें की आप बुरा feel कर रहे हैं तो समझ जाइये की आप किसी ऐसी चीज के बारे में सोच रहे हैं जो आप नहीं चाहते हैं . वापस अपना focus उस तरफ ले जाइये जो आप चाहते हैं , आपकी emotional state बड़ी तेजी से improve होगी . जब आप बार बार ऐसा करने लगेंगे तब आपको अपनी physical reality में भी बदलाव आना नज़र आएगा , पहले धीरे -धीरे और बाद में बड़ी तेजी से .

मैं भी आपकी consciousness का ही परिणाम हूँ . मैं वैसे ही करता हूँ जैसा की आप मुझसे expect करते हैं . यदि आप मुझे एक helpful guide के रूप में expect करते हैं , तो मैं वैसा ही बन जाऊंगा . यदि आप मुझे गहन और व्यवहारिक होना expect करते हैं तो मैं वैसा बन जाऊंगा . यदि आप मुझे confused और बहका हुआ expect करते हैं तो मैं वैसा बन जाऊंगा . पर मैं ऐसा कोई “मैं ” नहीं हूँ जो आपसे अलग है . मैं बस आपकी creations में से एक हूँ . मैं वो हूँ जो आप मेरे लिए intend करते हैं . और कहीं ना कहीं आप पहले से ये जानते हैं , क्यों है ना ?

राजेश अग्रवाल 








काले बर्तन या काला ज़हर…


.
     काले बर्तन या काला ज़हर…
.
टेफलोन शीट तो याद होगी सबको कैसे याद नहीं होगी आजकल दिन की शुरुवात ही उससे होती है चाय बनानी है तो नॉन स्टिक तपेली (पतीली), तवा, फ्राई पेन, ना जाने कितने ही बर्तन हमारे घर में है जो टेफलोन कोटिंग वाले हैं फास्ट टू कुक इजी टू क्लीन वाली छवि वाले ये बर्तन हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गए है, जब ये लिख रही हू तो दादी नानी वाला ज़माना याद आ जाता है जब चमकते हुए बर्तन स्टेंडर्ड की निशानी माने जाते थे आजकल उनकी जगह काले बर्तनों ने ले ली.

हम सब इन बर्तनों को अपने घर में उपयोग में लेते आए है और शायद कोई बहुत बेहतर विकल्प ना मिल जाने तक आगे भी उपयोग करते रहेंगे पर, इनका उपयोग करते समय हम ये बात भूल जाते है की ये हमारे शरीर को नुक्सान पहुंचा सकते है या हम में से कई लोग ये बात जानते भी नहीं की सच में ऐसा कुछ हो सकता है कि ये बर्तन हमारी बीमारियाँ बढ़ा सकते है या हमारे अपनों को तकलीफ दे सकते है और हमारे पक्षियों की जान भी ले सकते है.

चौंकिए मत ये सच है. हालाँकि टेफलोन को 20 वी शताब्दी की सबसे बेहतरीन केमिकल खोज में से एक माना गया है स्पेस सुइट और पाइप में इसका प्रयोग उर्जा रोधी के रूप में किया जाने लगा पर ये भी एक बड़ा सच है की ये स्वास्थ के लिए हानिकारक है इसके हानिकारक प्रभाव जन्मजात बिमारियों ,सांस की बीमारी जेसी कई बिमारियों के रूप में देखे जा सकते हैं.

ये भी सच है की जब टेफलोन कोटेड बर्तन को अधिक गर्म किया जाता है तो पक्षियों की जान जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है कुछ ही समय पहले 14 पक्षी तब मारे गए जब टेफलोन के बर्तन को पहले से गरम किया गया और तेज आंच पर खाना बनाया गया, ये पूरी घटना होने में सिर्फ 15 मिनिट लगे.
टेफलोन कोटेड बर्तनों में सिर्फ 5 मिनिट में 721 डिग्री टेम्प्रेचर तक गर्म हो जाने की प्रवृति देखी गई है और इसी दोरान 6 तरह की गैस वातावरण में फैलती है इनमे से 2 एसी गैस होती है जो केंसर को जन्म दे सकती है. अध्ययन बताते हैं कि टेफलोन को अधिक गर्म करने से टेफलोन टोक्सिकोसिस (पक्षियों के मामले में ) और पोलिमर फ्यूम फीवर ( इंसानों के मामले में ) की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है .


टेफलोन केमिकल के शरीर में जाने से होने वाली बीमारियाँ:


1 . पुरुष इनफर्टिलिटी : हाल ही में किए गए एक डच अध्यन में ये बात सामने आई है लम्बे समय तक टेफलोन केमिकल के शरीर में जाने से पुरुष इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है और इससे सम्बंधित कई बीमारियाँ पुरुषों में देखी जा सकती है.
२. थायराइड : हाल ही में एक अमेरिकन एजेंसी द्वारा किया गए अध्यन में ये बात सामने आई क2 टेफलोन की मात्र लगातार शरीर में जाने से थायराइड ग्रंथि सम्बन्धी समस्याएं हो सकती है.
3. बच्चे को जन्म देने में समस्या : केलिफोर्निया में हुई एक स्टडी में ये पाया गया की जिन महिलाओं के शरीर में जल ,वायु या भोजन किसी भी माध्यम से पी ऍफ़ ओ (टेफलोन) की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई उन्हें बच्चो को जन्म देते समय अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ा इसी के साथ उनमे बच्चो को जन्म देने की शमता भी अपेक्षाकृत कम पाई गई.
4 . केंसर या ब्रेन ट्यूमर का खतरा : एक प्रयोग के दौरान जब चूहों को पी ऍफ़ ओ के इंजेक्शन लगाए गए तो उनमे ब्रेन ट्यूमर विकसित हो गया साथ ही केंसर के लक्षण भी दिखाई देने लगे. पी ऍफ़ ओ जब एक बार शरीर के अन्दर चला जाता है तो लगभग 4 साल तक शरीर में बना रहता है जो एक बड़ा खतरा हो सकता है .
5. शारीरिक समस्याएं व अन्य बीमारियाँ : पी ऍफ़ ओ की अधिक मात्रा शरीर में पाई जाने वाली महिलाओं के बच्चो पर भी इसका असर जन्मजात शारीरिक समस्याओं के रूप में देखा गया है इसीस के साथ अद्द्याँ में ये सामने आया है की पी ऍफ़ ओ की अधिक मात्रा लीवर केंसर का खतरा बढ़ा देती है .

टेफलोन के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय:
टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों को कभी भी गैस पर बिना कोई सामान डाले अकेले गर्म होने के लिए ना छोड़े.
इन बर्तनों को कभी भी ४५० डिग्री से अधिक टेम्प्रेचर पर गर्म ने करे सामान्यतया इन्हें ३५० से ४५० डिग्री तक गर्म करना बेहतर होता है
टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों में पक रहा खाना बनाने के लिए कभी भी मेटल की चम्मचो का इस्तेमाल ना करे इनसे कोटिंग हटने का खतरा बढ़ जाता है
टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों को कभी भी लोहे के औजार या कूंचे ब्रुश से साफ़ ना करे , हाथ या स्पंज से ही इन्हें साफ़ करे

इन बर्तनों को कभी भी एक दुसरे के ऊपर जमाकर ना रखे
घर में अगर पालतू पक्षी है तो इन्हें अपने किचन से दूर रखें
अगर गलती से घर में एसा कोई बर्तन ज्यादा टेम्प्रेचर पर गर्म हो गया है तो कुछ देर के लिए घर से बाहर चले जाए और सारे खिड़की दरवाजे खोल दे पर ये गलती बार बार ना दोहराएं क्यूंकि बाहर के वातावरण के लिए भी ये गैस हानिकारक है
टूटे या जगह ,जगह से घिसे हुए टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों का उपयोग बंद कर दे क्यूंकि ये धीरे धीरे आपके भोजन में ज़हर घोल सकते है ,अगर आपके बर्तन नहीं भी घिसे है तो भी इन्हें २ साल में बदल लेने की सलाह दी जाती है

जहाँ तक हो सके इन बर्तनों कम ही प्रयोग करिए इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपने और अपने परिवार के स्वास्थ को बेहतर बना सकते हैं.

राजेश अग्रवाल 

क्या वीर सावरकर को याद रखना इस राष्ट्र का कर्तव्य नहीं है?



क्या वीर सावरकर को याद रखना इस राष्ट्र का कर्तव्य नहीं है?  ****

वीर सावरकर को काला पानी की सजा के दौरान भयानक सैल्यूलर जेल मैं रखा गया। उन्हें दूसरी मंजिल की कोठी नंबर २३४ मैं रखा गया और उनके कपड़ो पर भयानक कैदी लिखा गया। कोठरी मैं सोने और खड़े होने पर दीवार छू जाती थी। उन्हें नारियल की रस्सी बनाने और ३० पौंड तेल प्रतिदिन निकलने के लिए बैल की तरह कोल्हू मैं जोता जाता था। इतना कष्ट सहने के बावजूद भी वह रात को दीवार पर कविता लिखते, उसे याद करते और मिटा देते। १३ मार्च १९१० से लेकर १० मई १९३७ तक २७ वर्षो की अमानवीय पीडा भोग कर उच्च मनोबल, ज्ञान और शक्ति साथ वह जेल से बाहर निकले 

जैसे अँधेरा चीर कर सूर्य निकलता है। आजादी के बाद भी पंडित जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस ने उनसे न्याय नहीं किया। देश का हिन्दू कहीं उन्हें अपना नेता न मान बैठे इसलिए उन पर महात्मा गाँधी की हत्या का आरोप लगा कर लाल किले मैं बंद कर दिया गया। बाद मे. न्यायालय ने उन्हें ससम्मान रिहा कर दिया। पूर्वाग्रह से ग्रसित कांग्रेसी नेताओं ने उन्हें इतिहास मैं यथोचित स्थान नहीं दिया। स्वाधीनता संग्राम में केवल गाँधी और गांधीवादी नेताओं की भूमिका का बढा-चढ़ाकर उल्लेख किया गया। वीर सावरकर की मृत्यु के बाद भी कांग्रेस ने उन्हें नहीं छोडा। सन २००३ मैं वीर सावरकर का चित्र संसद के केंद्रीय कक्ष मैं लगाने पर कांग्रेस ने विवाद खडा कर दिया था। २००७ मैं कांग्रेसी नेता मणि शंकर अय्यर ने अंडमान के कीर्ति स्तम्भ से वीर सावरकर के नाम का शिलालेख हटाकर महात्मा गाँधी के नाम का पत्थर लगा दिया। जिन कांग्रेसी नेताओ ने राष्ट्र को झूठे आश्वासन दिए, देश का विभाजन स्वीकार किया, जिन्होंने शेख से मिलकर कश्मीर का सौदा किया, वो भले ही आज पूजे जाये पर क्या वीर सावरकर को याद रखना इस राष्ट्र का कर्तव्य नहीं है..???

राजेश अग्रवाल 

गुलामी ढ़ोल पीटकर नहीं आती ......................


गुलामी ढ़ोल पीटकर नहीं आती ......................
अगर आप अपने रोजगार धंधो को बचना चाहते है तो अभी से कमर कस लो


तीन महीने पहले बीमारी के बहाने सोनिया गाँधी अपने पूरे परिवार और सम्बन्धियों के साथ अमेरिका मे थी | सोनिया के तथाकथित इलाज के दौरान अस्पताल के पुरे तीन मंजिल और दो पार्किंग बुक किये गए थे | यहाँ तक उस अस्पताल मे जितने भी भारतीय मूल और पाकिस्तानी मूल के कर्मचारी थे उनको भी वहा से हटा दि

या गया था | सोनिया गाँधी से कौन-कौन लोग मिलने आते थे ये बेहद गोपनीय रखा गया | हालाँकि सोनिया के चिकित्सा दौरे को लेकर पहले भी कई सवाल उठते रहे हैं | लेकिन जिस तरह से अचानक केबिनेट ने रिटेल सेक्टर मे 100% FDI की मंजूरी दे दी उसको लेकर कूटनीतिक विश्लेषकों के बीच कई तरह की बातें हो रही हैं | सोनिया के गोपनीय चिकित्सा दौरे को भारतीय खुदरा व्यवसाय में 100% FDI की मंजूरी से जोड़ कर देखा जा रहा है |
#- क्या है रिटेल सेक्टर मे 100% FDI ?
इसका सीधा मतलब है कि अब भारत मे अमेरिका और यूरोप के बड़े बड़े कारपोरेट और किराने के संगठित खिलाडी अपने स्टोर भारत मे अकेले खोल सकते है ..मतलब अब उन्हें किसी भी भारतीय कम्पनी को अपना पार्टनर नहीं बनाना पड़ेगा ..और चूँकि ये दूसरे देशो मे रजिस्टर्ड है इसलिए ये मनमाने ढंग से भारतीयों को लूटने के लिए आज़ाद होंगी और अपने मुनाफे को अपने देश भेजेंगी ..इनके पास बहुत ही पूंजी होगी और ये बहुत ही संगठित तरीके से काम करेंगी .इसलिए ये भारत के छोटे छोटे दुकानदारों को खत्म कर देंगी ..क्योकि हर बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है ..
अम्रेरिका मे वालमार्ट ने आज अमेरिका मे सभी छोटे छोटे “ग्रोसरी स्ट्रोर्स” को खत्म कर दिया ..लेकिन चूँकि अमेरिका अपने नागरिको को एक पूरी तरह से सोशल सिक्योरिटी सिस्टम देता है इसलिए वहाँ स्थिति इतनी भयावह नहीं होती है जितनी दूसरे देशो मे होती है .अमेरिका मे लोगो को शिक्षा , मेडीकल , आदि सरकार मुफ्त मे प्रदान करती है ..और वहा बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाता है ..लोगो को सरकार धंधे आदि के लिए मुफ्त मे लोन देती है .. और वहा कोई भी अपने आप को बड़ी आसानी से डिफाल्टर घोषित कर सकता है ..अमेरिका मे डिफाल्टर्स के अधिकारों मे कोई कमी भी नहीं होती .वो चुनाव आदि लड सकता है ..और सबसे बड़ी बात अमेरिका भारत से चार गुना बड़ा है और वहा की जनसंख्या भारत से पांच गुना कम है ..
वालमार्ट जिस भी देश मे अपने स्टोर्स खोला है वहा के पुरे छोटे छोटे दुकानदारों को बर्बाद कर दिया है .. पोलैंड , पुर्तगाल , ग्रीक मे तो वाल्ल्मार्ट के खिलाफ दंगे तक भड़क उठे थे और फिर वहा की सरकारों को वालमार्ट को वहा से बंद करवाना पड़ा ..यहाँ तक चीन मे भी वालमार्ट के बीस स्टोर्स खुले थे लेकिन भरी विरोध के चलते १७ को चीन सरकार ने बंद करवा दिया ..

#- चीन ने वालमार्ट को मंजूरी क्यों दिया था ??

असल मे वालमार्ट चीन का सबसे बड़ा ग्राहक है ..चीन के आर्थिक विकास मे वालमार्ट का बहुत ही अहम योगदान है ..चीन के आर्थिक विकास मे २१% योगदान सिर्फ वालमार्ट का है ..आज वालमार्ट पुरे विश्व मे जो भी सामान बेचती है उसमे से ९९% चीजे चीन मे ही बनती है .चीन सरकार ने कई हज़ार कारखाने सिर्फ वालमार्ट को सप्लाई देने के लिए ही लगाये है इसलिए चीन के उपर कोई फर्क नहीं पड़ता ..फिर भी चीन ने अपने छोटे छोटे दुकानदारों के हित के लिए अपने यहाँ वालमार्ट के कई स्टोर्स बंद करवा दिए .

# छोटे दुकानदारों को खतरा क्यों है ?
चूँकि वालमार्ट चीन से बहुत बड़े पैमाने पर चीजे बनवाती है और फिर उसे सीधे अपने स्टोर के द्वारा बेचती है …इसलिए ये पहले खूब सस्ते दरों पर सामान बेचकर वहा के सभी छोटे व्यापारियो और छोटे स्थानीय स्टोर को बर्बाद कर देती है ..फिर मनमाने ढंग से जनता को लूटना शुरू कर देती है .. यहाँ तक कि अमेरिका के सबसे बड़े दोस्त ब्रिटेन मे भी वालमार्ट को १००% की मंजूरी नहीं मिली है ..वहा भी वाल्मेर्ट को किसी भी ब्रिटिश कम्पनी को अपना पार्टनर बनाना पड़ता है ..

सरकार और कांग्रेस अचानक इसके पक्ष मे क्यों हैं ?

जब नरसिम्हा राव की सरकार मे मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे तब ये खुद रिटेल मे १०० एफडीआई के खिलाफ थे ..जब मनमोहन सिंह वित्त मंत्री रहते हुए आर्थिक सुधार किये थे तब अमेरिका ने इनके उपर बहुत दबाव डाला था .लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया था ..क्योंकि उस समय प्रधनामंत्री और कांग्रेस पार्टी गाँधी परिवार की काली छाया से दूर थी ..सोनिया गाँधी राजनीती मे ना आने का एलान कर चुकी थी और सीताराम केशरी कांग्रेस के अध्यक्ष थे ..और कांग्रेस का उस समय दूर दूर तक सोनिया गाँधी से कोई लेना देना नहीं था ..
फिर अचानक इस बदलाव के क्या मतलब है ?? और सबसे बड़ी बात कि खुद सोनिया ने सरकार को दो पत्र लिखे थे कि सरकार रिटेल मे १००% FDI की मंजूरी ना दे .. तो क्या अमेरिका मे सोनिया अपने दिमाग का ओपरेशन करवाने गयी थी जिससे उनकी पूरी सोच ही बदल गयी ?? आखिर ये सोनिया गाँधी अब खामोश क्यों है ? क्या मनमोहन सरकार मे इतनी हिम्मत है कि वो सोनिया गाँधी के २-२ पत्र लिखने के बाद भी मंजूरी दे सके ??
चिट्ठी के सवाल पर कल कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि जब सोनिया गाँधी इस बारे मे चिन्तित थी तब इस देश मे कुछ और हालात थे ….अब कुछ और है | सवाल उठता है कि क्या सिर्फ एक साल के बाद ही देश के छोटे दुकानदारों को सोनिया गाँधी ने करोड़पति बना दिया ?


राजेश अग्रवाल 

17 September 2012

कुछ ध्यान से समझने वाली बाते


" माँ - बाप की आँखों मे दो बार ही आंसू आते है |
एक तो लड़की घर छोड़े तब और दूसरा लड़का मुह मोड़े तब | पत्नी पसंद से मिल सकती है |
मगर माँ तो पुण्य से ही मिलती है | इसलिए पसंद से मिलने वाली के लिए पुण्य से मिलने वाली को मत ठुकरा देना | जब तू छोटा था तो माँ की शय्यां गीली रखता था , अब बड़ा हुआ तो माँ की आँख गीली रखता है | तू कैसा बेटा है ?

तूने जब धरती पर पहला साँस लिया तब तेरे माँ - बाप तेरे पास थे | अब तेरा फ़र्ज़ है की 
माता - पिता जब अंतिम सांस ले तब तू उनके पास रहे | "

सांसारिक जीवन में इंसान की तीन अवस्था होती है जिनमे तीन काम जरुरी है
  • 1. बचपन में ज्ञान कमाना जरुरी है
  • 2. जवानी में रुपये - पैसे कमाना जरुरी है
  • 3. बुढ़ापे में पुन्य कमाना जरुरी है
जो दूसरों की बुराई खोजता या देखता है, वो उस मक्खी के जैसा होता है जो खुबसूरत जिस्म को छोड़ कर मवाद वाले जख्म पर जाकर बैठती है,

जिंदगी की आधी परेशानियाँ ऐसे ही दूर हो जाएगी, अगर.......
अगर हम एक दूसरे के बारे में बोलने कि जगह, एक दूसरे से बोलना सीख लें

आज का पारिवारिक माहोल होटल की तरह हो गया है ...
जैसे होटल में कौनसी टेबल पर कौन बैठा है किसी को नहीं पता होता....
एक आता है दूसरा चला जाता है ....
यही हाल आज के इन्सान का है,
एक घर में दो भाई है तो पहला आगे के दरवाजे से आता है ,
तो दूसरा पीछे के दरवाजे से बहार निकल जाता है..
किसी को किसी से जोई मतलब ही नहीं है...
सब अपने आप में मस्त है .

तुम दूसरों से आशीर्वाद मांगते हो, जरा यह भी सोचो, 
तुम्हें स्वयं... का आशीर्वाद मिल रहा है या नहीं? 
तुम्हारा पवित्र विचार और पवित्र आचार तुम्हारा अपना आशीर्वाद है.

परिवार में कभी आपसी बातचीत बंद नहीं करना... 
चाहे कितना भी झगडा करो कितना भी बोलो
चाहे मार दो या मार खा लो ..
लेकिन बातचीत कभी बंद मत करो.....क्यों की बातचीत बंद होते ही सुलह के सरे रास्ते बंद हो जाते है ,,,,,,,
तो बातचीत कभी बंद मत करो..

प्रश्न-नारियल को श्री फल क्यों कहते हैं?
उत्तर-नारियल धरती से जितना भी पानी लेता है,अपने बढ़ने के लिए,वेह उसके उपकार को नहीं भूलता है,और सारा पानी अपने अन्दर संचित करके रखता है,मीठा बनाये रखता है,जिससे लोगों की उस पानी को प्यास मिट जाए.इसलिए नारियल को श्री फल कहते हैं,उसके अन्दर भी कल्याण की भावना है.तोह हमारे अंदर क्यों नहीं है?

बच्चों के झगडे में बडों को और सास बहू के झगडों में बाप बेटे को कभी नहीं पडना चाहिये । संभव है कि दिन में सास बहू में कुछ कहा सुनी हो तो स्वाभाविक है कि वे इसकी शिकायत रात घर लौटे अपने पति से करेगी । पतियों को उनकी शिकायत गौर से सुननी चाहिये, सहानुभूति भी दिखानी चाहिये । मगर जब सोकर उठे तो आगे पाठ-पीछे सपाट की नीति ही अपनानी चाहिये, तभी घर में एकता कायम रह सकती है ।

जीवन में कभी समझौता करना पड़े तो कोई गल नहीं, क्योंकि, झुकता वही है जिसमें जान होती है, अकड़ तो मुरदे की पहचान होती है।

" सूर्योदयके साथ ही बिस्तर छोड़ देना चाहिए ,
ऐसा न करने से सिर पर पाप चढ़ता है | महिलाये जो की घर की लक्ष्मी है ,
इन लक्स्मियो को सूर्योदय के साथ ही उठ जाना चाहिए | लक्स्मन थोड़ी देर मे उठे
तो एक बार चल जायेगा , पर लक्ष्मी का देर से उठना बिलकुल नहीं चलेगा |
जिन घर - परिवारों मे लक्स्मन के साथ लक्ष्मी भी देर सुबह तक सोई पड़ी रहती है
उन घरो की ' असली - लक्ष्मी ' रूठ जाया करती है | और घर छोड़कर चली जाया करती है | "

डाक्टर और गुरु के सामने झूंठ मत बोलिये क्योंकिं यह झूंठ बहुत महंगा पड सकता है । गुरु के सामने झूंठ बोलने से पाप का प्रायश्चित नही होगा, डाक्टर के सामने झूंठ बोलने से रोग का निदान नहीं होगा । डाक्टर और गुरु के सामने एकदम सरल और तरल बनकर पेश हो । आप कितने ही होशियार क्यों न हो तो भी डाक्टर और गुरु के सामने अपनी होशियारी मत दिखाइये, क्योंकिं यहां होशियारी बिल्कुल काम नहीं आती । 

सज धज कर जिस दिन मौत की शेह्जादी आएगी न सोना काम आएगा न चांदी आएगी....
छोटा सा तू कितने बड़े अरमान है तेरे...मिट्टी का तू सोने के सब सामान है तेरे
मिट्टी की काया मिट्टी में जिस दिन समाएगी..........न सोना काम आएगा न चांदी आयेगी....

राजेश अग्रवाल
Photo: सज धज कर जिस दिन मौत की शेह्जादी आएगी न सोना काम आएगा न चांदी आएगी....
छोटा सा तू कितने बड़े अरमान है तेरे...मिट्टी का तू सोने के सब सामान है तेरे
मिट्टी की काया मिट्टी में जिस दिन समाएगी..........न सोना काम आएगा न चांदी आयेगी....


सज धज कर जिस दिन मौत की शेह्जादी आएगी न सोना काम आएगा न चांदी आएगी....

छोटा सा तू कितने बड़े अरमान है तेरे...मिट्टी का तू सोने के सब सामान है तेरे

मिट्टी की काया मिट्टी में जिस दिन समाएगी..........न सोना काम आएगा न चांदी आयेगी....

कुछ सावधानियां बरते तो हिडेन कैमरा का शिकार होने से बच सकते है


कुछ सावधानियां बरते तो हिडेन कैमरा का शिकार होने से बच सकते हैं।हिडेन कैमरा के छिपे होने की कुछ खास जगह


एक दोस्‍त ने मुझे कहा हमारे कालेज की एक लड़की का वीडियो यूट्यूब में पड़ा हुआ है वीडियो में वह एक ट्रायल रूम में कपड़े बदल रहीं थी, इस तरह की खबरें आज कल आए दिन टीवी और अखबारों की सुर्खियां बनी रहती हैं। लेकिन अगर हम किसी होटल या फिर अनजान कमरे में जाने से पहले कुछ सावधानियां बरते तो हिडेन कैमरा का शिकार होने से बच सकते हैं। हिडेन कैमरा के छिपे होने की कुछ खास जगह कमरे में रखा हुआ फूलों का गमला फोटो फ्रेम बीच में लगा हुआ पंखा बाथरूम शॉवर जब भी आप कपड़े चेंज करने के लिए किसी शोरूम के ट्रायल रूम में जाएं तो सबसे पहले ऊपर की ओंर दिए गए कोनों और शीशे को चेक कर लें, ट्रायल रूम में हो सकता है शीशे के पीछे हिडेन कैमरा लगा हो, शीशे में हिडेन कैमरा चेक करने के लिए, सबसे पहले शीशे में एक उंगली रखें अगर शीशे में रखी गई उंगली और शीशे में दिख रही उंगली के बीच में गैप रहता है तो मतलब ये ओरीजनल शीशा है, लेकिन अगर शीशे में रखी गई उंगली के बीच में कोई गैप नहीं रहता है और वे जुड़ी रहती हैं तो मतलब शीशे के पीछे सब कुछ दिख रहा है और हो सकता है वहां पर कैमरा लगा हो जो सब रिकार्ड कर रहा हो। रूम में अगर कोई आवाज आ रही है तो उसे ध्‍यान से सुनें क्‍योंकि कुछ हिडेन कैमरे मोशन सेंसिटिव होतें हैं जो अपने आप ऑन हो जाते हैं। रूम में जब भी जाएं एक बार सभी लाइटें बंद करके पूरे रूम का मुआयना करें लें कि कही कोई रेड लाइट या फिर ग्रीन लाइट तो नहीं जल रहीं है। अगर आपके मन में हिडेन कैमरा होने का शक हो बाजार में आरएफ सिंग्‍नल डिटेक्‍टर या फिर बग डिटेक्‍टर ले खरीद लें, ये डिवाइस रूम में हिडेन कैमरा होने पर आपको सर्तक कर देंगी। जागो जगाओ भारत बचाओ ! जयहिंद
Rajesh Agrawal

भारत में जीवन को चलाने के लिए कितनी चीजे होती हैं


भारत में जीवन को चलाने के लिए जितनी जरूरत की चीजे होती हैं वो हर समान हर जगह होती है |
Indian Council for Agricultural Research (ICAR) के दस्तावेज के अनुसार भारत में 14,785 वस्तुएं होती हैं| ये भारत की सभी राज्यों में एक समान होती हैं और भा
रत के उन शहरों या गाँव को बाहर से केवल नमक मंगाना पड़ता है, बाकी हर जरूरत की चीज उसी राज्य में हो जाती हैं|

ज्यादातर लोग आज की बनी रोटी कल खाना पसंद नहीं करेंगे, कुछ तो ऐसे भी है जो सुबह की बनी रोटी शाम को भी नही खाते, अब मैं अगर आपसे बोलूँ की आज रोटी बनाकर उसको पौलिथीन में पैक कर देता हूँ, उसको ४ दिन बाद खाने को कौन राजी होगा?
आप सोच रहे होंगे की क्या बेतुकी बातें कर रहा हूँ, अब जरा सोचो की आटे को सड़ाकर बनाई हुई ब्रेड और पाँव रोटी जो पता नही कितने दिन पहले की बनी हुई है, उसको इतना मजे ले कर क्यों खाते हो ? क्यों बर्गर और ब्रेड पकोड़ा खाते वक्त ये बातें दिमाग में नही आती हैं ?

अगर हम ताजा रोटी खाने की परम्परा को दकियानुसी मान कर ४-५ दिन पहले बनी बासी रोटी खाने को अपनी शान समझते है तो हम पढ़े लिखे मूर्खो के सिवा और कुछ नही है, यूरोप के गधों के पीछे आँख बंद कर चलने वाली भेड़ चाल को हमें छोड़ना ही होगा, यूरोप और अमेरिका में चूकी मौसम की अनुकूलता नहीं है, साल में नौ महीने ठण्ड पड़ती है और उनके यहाँ कभी भी बारिस हो जाती है और बर्फ भी बहुत पड़ती है, धुप का दर्शन तो साल में 300 दिन होता ही नहीं है | इसके अलावा उनके कृषि क्षेत्र में कुछ होता नहीं है, कुल मिलाके दो ही चीजें होती हैं, आलू और प्याज और थोडा बहुत गेंहू| यूरोप में ब्रेड खाना उनकी मज़बूरी है, वहाँ का तापमान इतना कम रहता है की रोटी बनाना संभव ही नही है, आटा गूँथने के लिए पानी चाहिए लेकीन वहाँ छः महीने तो बर्फ जमी रहती है, इसीलिए वहाँ ब्रेड बनाई जाती है जिसमें आटा गूँथने की जरुरत नहीं होती है, आटे को सड़ाकर ब्रेड बना दी जाती है, और अत्यंत कम तापमान की वजह से वो चार पांच दिनों तक खराब नही होती है, भारतीय जलवायु के हिसाब से ब्रेड उचित नहीं है, भारतीय जलवायु में ब्रेड जैसे नमीयुक्त खाद्य पदार्थ जल्दी खराब होते हैं, तापमान बहुत कम होने के कारण उनके शरीर में मैदे से बनी ब्रैड पच जाती है पर भारत में तापमान बहुत अधिक होता है जो भारतीयों के लिये सही नही, इससे कब्ज की शिकायत होती है और कब्ज होने से सैंकडों बीमारियां लगती है, हजारों सालों से भारत में ताजे आटे को गूंथकर ही रोटी बनाई और खाई जाती है, हमारे पूर्वज इतने तो समझदार थे जो उन्होने ब्रैड आदि खाना शुरू नही किया तो आप भी समझदार बनिये,

ये ही हाल टमाटर की चटनी का है
इसीलिए सभी राष्ट्रभक्त भाई बहनों से निवेदन है की ब्रेड, पाँव रोटी, सौस जैसी चीजों से बने खाद्य पदार्थ का पूरी तरह से बहिष्कार करें और अन्य को भी प्रेरित करें।




Rajesh Agrawal

कृष्ण यजुर्वेद... कठोपनिषद...


उपनि‍षदों में कर्म तथा पुनर्जन्‍म की अवधारणाओं को एक सि‍द्धान्‍त का रूप दि‍या गया है... "कठोपनि‍षद्" में इस वि‍चार को स्‍पष्‍ट रूप से व्‍यक्‍त कि‍या गया है कि‍ मृतक की आत्‍मा नवीन शरीर धारण करती है... आत्‍मा अपने कर्म तथा ज्ञान के अनुसार जड़ वस्‍तुओं जैसे पेड़ या पौधों का स्‍वरूप भी ग्रहण कर सकती है...

'कठोपनिषद्' कृष्णयजुर्वेद की कठशाखा के अन्तर्गत है। इसमें यम और नाचिकेता के संवादरूप से ब्रह्मविद्या का बड़ा विशद वर्णन किया गया है। इसकी वर्णन

शैली बड़ी ही सुबोध और सरल है। श्रीमद्भगवद्गीता में भी इसके कई मन्त्रों का कहीं शब्दतः और कहीं अर्थतः उल्लेख है। इसमें अन्य उपनिषदों की भाँति जहाँ तत्त्वाज्ञान का गम्भीर विवेचन है, वहां नचिकेता का चरित्र पाठक के सामने एक अनुपम आदर्श की उपस्थिति करता है।

'न देने योग्य गौ के दान से दाता का उल्टे अमंगल होता है' इस विचार से सात्त्विक बुद्धि-सम्पन्न ॠषिकुमार नचिकेता अधीर हो उठे । उनके पिता वाजश्रवस-वाजश्रवा के पुत्र उद्दालक ने विश्वजित नामक महान यज्ञ के अनुष्ठान में अपनी सारी सम्पत्ति दान कर दी, किन्तु ॠषि-ॠत्विज और सदस्यों की दक्षिणा में अच्छी-बुरी सभी गौएँ दी जा रही थीं । पिता के मंगल की रक्षा के लिए अपने अनिष्ट की आशंका होते हुए भी उन्होंने विनयपूर्वक कहा-'पिताजी ! मैं भी आपका धन हूँ, मुझे किसे दे रहे हैं?['तत कस्मै मां दास्यसि’ ]

उनका यह प्रश्न ठीक ही था, क्योंकि वस्तुतः सर्वदान तो तभी हो सकता है जब कोई वस्तु अपनी न रहे और यहां अपने पुत्र के मोह से ही ब्राह्मणों को निकम्मी और निरर्थक गौएँ दी जा रही थीं; अतः इस मोह से पिता का उद्धार करना उनके लिये उचित ही था।

इसी तरह कई बार पूछने पर जब वाजश्रवा ने खीझकर कहा कि मैं तुझे मृत्यु को दूँगा तो उन्होंने यह जानकर भी कि पिताजी क्रोधवश ऐसा कह गये हैं, उनके कथन की उपेक्षा नहीं की।

परिणाम के लिए, वे पहले से ही प्रस्तुत थे । उन्होंने हाथ जोड़कर पिता से कहा -'पिताजी ! शरीर नश्वर है, पर सदाचरण सर्वोपरि है । आप अपने वचन की रक्षा के लिए यम सदन जाने की मुझे आज्ञा दें ।'

ॠषि सहम गये , पर पुत्र की सत्यपरायणता देखकर उसे यमपुरी जाने की आज्ञा उन्होंने दे दी । नचिकेता ने पिता के चरणों में सभक्ति प्रणाम किया और वे यमराज की पुरी के लिए प्रस्थित हो गये । यमराज काँप उठे । अतिथि ब्राह्मण का सत्कार न करने के कुपरिणाम से वे पूर्णतय परिचित थे और ये तो अग्नितुल्य तेजस्वी ॠषिकुमार थे, जो उनकी अनुपस्थिति में उनके द्वार बिना अन्न-जल ग्रहण किए तीन रात बिता चुके थे ।


यम जलपूरित स्वर्ण-कलश अपने ही हाथों में लिए दौड़े । उन्होंने नचिकेता को सम्मानपूर्वक पाद्यार्घ्य देकर अत्यन्त विनय से कहा -'आदरणीय ब्राह्मणकुमार! पूज्य अतिथि होकर भी आपने मेरे द्वार पर तीन रात्रियाँ उपवास में बिता दीं, यह मेरा अपराध है । आप प्रत्येक रात्रि के लिये एक-एक वर मुझसे माँग लें ।

'मृत्यो ! मेरे पिता मेरे प्रति शान्त-संकल्प, प्रसन्नचित्त और क्रोधरहित हो जाएँ और जब मैं आपके यहाँ से लौटकर घर जाऊँ, तब वे मुझे पहचानकर प्रेमपूर्वक बातचीत करें ।' पितृभक्त बालक ने प्रथम वर माँगा ।
'तथास्तु' यमराज ने कहा।

'मृत्यो ! स्वर्ग के साधनभूत अग्नि को आप भलीभाँति जानते हैं । उसे ही जानकर लोग स्वर्ग में अमृतत्त्व-देवत्व को प्राप्त होते हैं, मैं उसे जानना चाहता हूँ । यही मेरी द्वितीय वर-याचना है ।'


'यह अग्नि अनन्त स्वर्ग-लोक की प्राप्ति का साधन है । ' यमराज नचिकेता को अल्पायु, तीक्ष्ण बुद्धि तथा वास्तविक जिज्ञासु के रूप में पाकर प्रसन्न थे । उन्होंने कहा- 'यही विराट रूप से जगत की प्रतिष्ठा का मूल कारण है । इसे आप विद्वानों की बुद्धिरूप गुहा में स्थित समझिये ।'
उस अग्नि के लिए जैसी जितनी ईंटें चाहिए, वे जिस प्रकार रखी जानी चाहिए तथा यज्ञस्थली निर्माण के लिए आवश्यक सामग्रियाँ और अग्निचयन करने की विधि बतलाते हुए अत्यन्त सन्तुष्ट होकर यम ने द्वितिय वर के रूप में कहा- 'मैने जिस अग्नि की बात आपसे कहीं, वह आपके ही नाम से प्रसिद्ध होगी और आप इस विचित्र रत्नों वाली माला को भी ग्रहण कीजिए ।'

'हे नचिकेता, अब तीसरा वर माँगिये ।' श्रद्धा-समन्वित नचिकेता ने कहा- 'आत्मा का प्रत्यक्ष या अनुमान से निर्णय नहीं हो पाता । अत: मैं आपसे वहीं आत्मतत्त्व जानना चाहता हूँ । कृपापूर्वक बतला दीजिए ।'

यम झिझके । आत्म-विद्या साधारण विद्या नहीं । उन्होंने नचिकेता को उस ज्ञान की दुरूहता बतलायी, पर उनको वे अपने निश्चय से नहीं डिगा सके । यम ने भुवन मोहन अस्त्र का प्रयोग किया- सुर-दुर्लभ सुन्दरियाँ और दीर्घकाल स्थायिनी भोग-सामग्रियों का प्रलोभन दिया, पर ॠषिकुमार अपने तत्त्व-सम्बंधी गूढ़ वर से विचलित नहीं हो सके ।


'आप बड़े भाग्यवान हैं ।' यम ने नचिकेता के वैराग्य की प्रशंसा की और वित्तमयी संसार गति की निन्दा करते हुए बतलाया कि विवेक- वैराग्यसम्पन्न पुरुष ही ब्रह्मज्ञान प्राप्ति के अधिकारी हैं । श्रेय-प्रेय और विद्या-अविद्या के विपरीत स्वरूप का यम ने पूरा वर्णन करते हुए कहा-'आप श्रेय चाहते हैं तथा विद्या के अधिकारी हैं ।'

'हे भगवन ! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो सब प्रकार के व्यावहारिक विषयों से अतीत जिस परब्रह्म को आप देखते हैं मुझे अवश्य बतलाने की कृपा कीजिये ।'

'आत्मा चेतन है। वह न जन्मता है, न मरता है । न यह किसी से उत्पन्न हुआ है और न कोई दूसरा ही इससे उत्पन्न हुआ है ।' नचिकेता की जिज्ञासा देखकर यम अत्यंन्त प्रसन्न हो गए थे । उन्होंने आत्मा के स्वरूप को विस्तारपूर्वक समझाया-'वह अजन्मा है , नित्य है, शाश्वत है, सनातन है, शरीर के नाश होने पर भी बना रहता है। वह सूक्ष्म-से -सूक्ष्म और महान से भी महान है । वह समस्त अनित्य शरीर में रहते हुए भी शरीररहित है, समस्त अस्थिर पदार्थों में व्याप्त होते हुए भी सदा स्थिर है । वह कण-कण में व्याप्त है । सारा सृष्टि क्रम उसी के आदेश पर चलता है । अग्नि उसी के भय से चलता है, सूर्य उसी के भय से तपता है, इन्द्र, वायु और पाँचवाँ मृत्यु उसी के भय से दौड़ते हैं । जो पुरुष काल के गाल में जाने के पूर्व उसे जान लेते हैं, वे मुक्त हो जाते हैं । शोकादि क्लेशों को पार कर परमानन्द को प्राप्त कर लेते हैं ।'


यम ने कहा, 'वह न तो वेद के प्रवचन से प्राप्त होता है, न विशाल बुद्धि से मिलता है और न केवल जन्मभर शास्त्रों के श्रवण से ही मिलता है। वह उन्हीं को प्राप्त होता है, जिनकी वासनाएँ शान्त हो चुकी हैं, कामनाएँ मिट चुकी हैं और जिनके पवित्र अन्त:करण को मलिनता की छाया भी स्पर्श नहीं कर पाती जो उसे पाने के लिए अत्यन्त व्याकुल हो जाते हैं । आत्म-ज्ञान प्राप्त कर लेने के बाद उद्दालक पुत्र कुमार नचिकेता लौटे तो उन्होंने देखा कि वृद्ध तपस्वियों का समुदाय भी उनके स्वागतार्थ खड़ा है ।

Rajesh Agrawal

मेरा प्रिय और सपनो का घर का रास्ता



GEOGRAPHICAL COORDINATE TO MY NATIVE – HOME

23.217775,82.20506

From Railway Station to My home – JUST CLICK ON BELOW RED LINK

रेलवे स्टेशन से मेरे घर का रास्ता - आप सिर्फ़ इस पर क्लिक करे

From Bus Stand to My Home - JUST CLICK ON BELOW RED LINK

बस स्टैंड से मेरे घर का रास्ता - आप सिर्फ़ इस पर क्लिक करे

Decimal Degrees (WGS84)
****************************************
Latitude Longitude
23.217775 82.20506
****************************************
Degrees, Minutes & Seconds
****************************************
Latitude       Longitude
N23 13 03   E82 12 18
****************************************
GPS
****************************************
Latitude          Longitude
N 23 13.066  E 82 12.304
****************************************
UTM
****************************************
        X        Y

44N 623304 2568139
****************************************









Rajesh Agrawal

****Be alert and Safe! Please read...****



This happened in Mumbai.. An incident narrated by one of the Chartered Accountants...

This happened in Mumbai.......

I cannot stop myself from sharing this with all of you. It all started when I received a call from someone claiming that he was from my mobile service provider and he asked me to shutdown my phone for 2 hours for 3G update to take place. As I was rushing for a meeting, I did not question and shutdown my cell phone.

After 45 minutes I felt very suspicious since the caller did not even introduce his name. I quickly turned on my cell phone and I saw several missed calls from my family members and the others were from the number that had called me earlier - 3954380.

I called my parents and I was shocked that they sounded very worried asking me whether I am safe. My parents told me that they had received a call from someone claiming that they had me with them and asking for money to let me free. The call was so real and my parents even heard 'my voice' crying out loud asking for help. My parent was at the bank waiting for next call to proceed for money transfer. I told my parents that I am safe and asked them to lodge a police report.

Right after that I received another call from the guy asking me to shutdown my cell phone for another 1 hour which I refused to do and hung up. They keep calling my cell phone until the battery had run down. I myself lodged a police report and I was informed by the officer that there were many such scams reported. MOST of the cases reported that the victim had already transferred the money! And it is impossible to get back the money. Be careful as this kind of scam might happen to any of us!!! Those guys are so professional and very convincing during calls. If you are asked to shut down your cell phone for updates by the service provider, ASK AROUND!
Your family or friends might receive the same call.
Be Safe and Stay Alert!

Please pass around to your family and friends !!!

Thank you.





Rajesh Agrawal

भारत की विश्व को देन


भारत की विश्व को देन : गणित शास्त्र-१


गणित शास्त्र की परम्परा भारत में बहुत प्राचीन काल से ही रही है। गणित के महत्व को प्रतिपादित करने वाला एक श्लोक प्राचीन काल से प्रचलित है।

यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा।
तद्वद् वेदांगशास्त्राणां गणितं मूर्धनि स्थितम्।। (याजुष ज्योतिषम)

अर्थात् जैसे मोरों में शिखा और नागों में मणि सबसे ऊपर रहती है, उसी प्रकार वेदांग और शास्त्रों में गणित सर्वोच्च स्थान पर स्थित है।

ईशावास्योपनिषद् के शांति मंत्र में कहा गया है-


ॐपूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।


यह मंत्र मात्र आध्यात्मिक वर्णन नहीं है, अपितु इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण गणितीय संकेत छिपा है, जो समग्र गणित शास्त्र का आधार बना। मंत्र कहता है, यह भी पूर्ण है, वह भी पूर्ण है, पूर्ण से पूर्ण की उत्पत्ति होती है, तो भी वह पूर्ण है और अंत में पूर्ण में लीन होने पर भी अवशिष्ट पूर्ण ही रहता है। जो वैशिष्ट्य पूर्ण के वर्णन में है वही वैशिष्ट्य शून्य व अनंत में है। शून्य में शून्य जोड़ने या घटाने पर शून्य ही रहता है। यही बात अनन्त की भी है।

हमारे यहां जगत के संदर्भ में विचार करते समय दो प्रकार के चिंतक हुए। एक इति और दूसरा नेति। इति यानी पूर्णता के बारे में कहने वाले। नेति यानी शून्यता के बारे में कहने वाले। यह शून्य का आविष्कार गणना की दृष्टि से, गणित के विकास की दृष्टि से अप्रतिम रहा है।

भारत गणित शास्त्र का जन्मदाता रहा है, यह दुनिया भी मानने लगी है। यूरोप की सबसे पुरानी गणित की पुस्तक "कोडेक्स विजिलेन्स" है। यह पुस्तक स्पेन की राजधानी मेड्रिड के संग्राहलय में रखी है। इसमें लिखा है-

"गणना के चिन्हों से (अंकों से) हमें यह अनुभव होता है कि प्राचीन  हिन्दुओ की बुद्धि बड़ी पैनी थी तथा अन्य देश गणना व ज्यामिति तथा अन्य विज्ञानों में उनसे बहुत पीछे थे। यह उनके नौ अंकों से प्रमाणित हो जाता है, जिनकी सहायता से कोई भी संख्या लिखी जा सकती है।"

नौ अंक और शून्य के संयोग से अनंत गणनाएं करने की सामर्थ्य और उसकी दुनिया के वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका की वर्तमान युग के विज्ञानी लाप्लास तथा अल्बर्ट आईंस्टीन ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की है।

भारतीय अंकों की विश्व यात्रा की कथा विश्व के अनेक विद्वानों ने वर्णित की है। इनका संक्षिप्त उल्लेख पुरी के शंकराचार्य श्रीमत् भारती कृष्णतीर्थ जी ने अपनी गणित शास्त्र की अद्भुत पुस्तक "वैदिक मैथेमेटिक्स" की प्रस्तावना में किया है।

वे लिखते हैं "इस संदर्भ में यह कहते हर्ष होता है कि कुछ तथाकथित भारतीय विद्वानों के विपरीत आधुनिक गणित के मान्य विद्वान यथा प्रो. जी.पी. हाल्स्टैंड. प्रो. गिन्सबर्ग, प्रो. डी. मोर्गन, प्रो. हटन- जो सत्य के अन्वेषक तथा प्रेमी हैं, ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया और प्राचीन भारत द्वारा गणितीय ज्ञान की प्रगति में दिए गए अप्रतिम योगदान की निष्कपट तथा मुक्त कंठ से भूरि-भूरि प्रशंसा की है।"

इनमें से कुछ विद्वानों के उदाहरण इस विषय में स्वत: ही विपुल प्रमाण प्रस्तुत करेंगे।

प्रो. जी.पी. हाल्स्टेंड अपनी पुस्तक "गणित की नींव तथा प्रक्रियाएं" के पृष्ठ २० पर कहते हैं, "शून्य के संकेत के आविष्कार की महत्ता कभी बखानी नहीं जा सकती है।" "कुछ नहीं" को न केवल एक नाम तथा सत्ता देना वरन् एक शक्ति देना हिन्दू जाति का लक्षण है, जिनकी यह उपज है। यह निर्वाण को डायनमो की शक्ति देने के समान है। अन्य कोई भी एक गणितीय आविष्कार बुद्धिमत्ता तथा शक्ति के सामान्य विकास के लिए इससे अधिक प्रभावशाली नहीं हुआ।

इसी संदर्भ में बी.बी.दत्त अपने प्रबंध " संख्याओ  को व्यक्त करने की आधुनिक विधि (इंडियन हिस्टोरिकल क्वार्टरली, अंक ३, पृष्ठ ५३०-४५०) में कहते हैं " हिन्दुओ  ने दाशमलविक पद्धति बहुत पहले अपना ली थी। किसी भी अन्य देश की गणितीय अंकों की भाषा प्राचीन भारत के समान वैज्ञानिक तथा पूर्णता को नहीं प्राप्त कर सकी थी। उन्हें किसी भी संख्या को केवल दस बिंबों की सहायता से सरलता से तथा सुन्दरतापूर्वक व्यक्त करने में सफलता मिली। हिन्दू संख्या अंकन पद्धति की इसी सुन्दरता ने विश्व के सभ्य समाज को आकर्षित किया तथा उन्होंने इसे सहर्ष अपनाया।"

इसी संदर्भ में प्रो. गिन्सबर्ग "न्यू लाइट ऑन अवर न्यूमरल्स" लेख, जो बुलेटिन आफ दि अमेरिकन मैथेमेटिकल सोसायटी में छपा, के पृष्ठ ३६६-३६९ में कहते हैं, "लगभग ७७० ई, सदी में उज्जैन के हिन्दू विद्वान कंक को बगदाद के प्रसिद्ध दरबार में अब्बा सईद खलीफा अल मन्सूर ने आमंत्रित किया। इस तरह हिन्दू अंकन पद्धति अरब पहुंची। कंक ने हिन्दू ज्योतिष विज्ञान तथा गणित अरबी विद्वानों को पढ़ाई। कंक की सहायता से उन्होंने ब्रह्मपुत्र के "ब्रह्म स्फूट सिद्धान्त" का अरबी में अनुवाद किया। फ्रांसीसी विद्वान एम.एफ.नाऊ की ताजी खोज यह प्रमाणित करती है कि सातवीं सदी के मध्य में सीरिया में भारतीय अंक ज्ञात थे तथा उनकी सराहना की जाती थी।"

बी.बी. दत्त अपने लेख में आगे कहते हैं "अरब से मिश्र तथा उत्तरी अरब होते हुए ये अंक धीरे-धीरे पश्चिम में पहुंचे तथा ग्यारहवीं सदी में पूर्ण रूप से यूरोप पहुंच गए। यूरोपियों ने उन्हें अरबी अंक कहा, क्योंकि उन्हें अरब से मिले। किन्तु स्वयं अरबों ने एकमत से उन्हें हिन्दू अंक (अल-अरकान-अलहिन्द) कहा"।


Rajesh Agrawal

16 September 2012

इंसान सुखी रहने के लिए ?


इंसान सुखी रहने के लिए घर बदलता है,
गाड़ी बदलता है ,
कपडे बदलता है ,
मोबाइल बदलता है ,
नंबर बदलता है और
पता नहीं क्या क्या बदलता है
फिर भी सुखी नहीं हो पाता..........
क्योकि वो अपना स्वभाव नहीं बदलता..
दुनिया को बदलने से पहले खुद में परिवर्तन लाना अत्यंत आवश्यक है ...

" पैसा कमाने के लिए कलेजा चाहिए |
मगर दान करने के लिए उससे भी बड़ा कलेजा चाहिए |
दुनिया कहती है की पैसा तो हाथ का मेल है |
मैं पैसे को ऐसी गाली कभी नहीं दूंगा |
जीवन और जगत मे पैसे का अपना मूल्य है ,
जिसे जुट्लाया नहीं जा सकता |
यह भी सही है की जीवन मे पैसा कुछ हो सकता है ,
कुछ -कुछ भी हो सकता है , और बहुत -कुछ भी हो सकता है मगर
'सब-कुछ'कभी नहीं हो सकता |
और जो लोग पैसे को ही सब कुछ मन लेते है
वे पैसे के खातिर अपनी आत्मा को बेचेने के लिए भी तेयार हो जाते है | "

" संसार में अड़चन और परेशानी न आये -यह कैसे हो सकता हैं | सफ्ताह मे एक दिन रविवार का भी तो आएगा ना | प्रक्रति का नियम ही ऐसा है की जिन्दगी मे जितना सुख -दुःख मिलना है ,वह मिलता ही है | मिलेगा भी क्यों नहीं , टेंडर मे जो भरोगे वाही तो खुलेगा | मीठे के साथ नमकीन जरुरी है तो सुख के साथ दुःख का होना भी लाजमी है | दुःख बड़े कम की चीज है | जिन्दगी मे अगर दुःख न हो तो कोई प्रभु को याद ही न करे |

" मरने वाला मर कर स्वर्ग गया है या नर्क ?
अगर कोई यह जानना चाहता है तो इसके लिए किसी संत या 
ज्योतिषी से मिलने की जरुरत नहीं है , बल्कि उसकी सवयात्रा मे होने वाली बातो 
को गौर से सुनने की जरुरत है | यदि लोग कह रहे हो कि बहुत अच्छा आदमी था |
अभी तो उसकी देस व समाज को बड़ी जरुरत थी , जल्दी चल बसा तो समजना कि व स्वर्ग 
गया है | और यदि लोग कह रहे हो कि अच्छा हुआ धरती का एक पाप तो कम हुआ 
तो समजना कि मरने वाला नर्क गया है | "




Rajesh Agrawal

=========पाप के अठारह भेद ==========




-------------------------------------------------------------
18 पाप इस प्रकार है :-
1 :- प्रानिपात - जिव हिंसा
2 :- मृषावाद - झूठ बोलना .

3 :- अदत्तादान - चोरी करना .
4 :- मैथुन - अभ्रमचार .
5 :- परिग्रह - संग्रह
6 :- क्रोध – गुस्सा (Anger)
7 :- मान – घमंड (Pride & Ego)
8 :- माया - छल कपट
9 :- लोभ - लालच
10 :- राग - किसे के प्रति आकर्षण .
11 :- द्वेष - किसी के प्रति वैर भाव .
12 :- कलह - क्लेश करना .
13 :- अभ्याख्यान - कलंक लगाना .
14 :- पैशुन्य - चुगली करना , दुसरो के दोष प्रकट करना .
15 :- पर परिवाद - दुसरो की निंदा करना .
16 :- रात्रि -अरात्रि - बुरे कार्यो में लगे रहना , धर्म में मन नहीं लगाना .
17 :- माया मिर्शवाद - कपट रख कर झूठ बोलना .
18 :- मिथ्यात्व दर्शन शल्य - गलत श्रद्धा रखना .
इन पापो से बचने के लिए , 18 पाप को हम चाहे तो रोक सकते है बस हम में इच्छा शक्ति होनी चाहिए . हमें इन 18 पापो को समजना चाहिए और मन में इनको कम करने का प्रयत्न करना चाहिए , हर चीज का ज्ञान जरुरी है क्योकि वही हमें सही रास्ता दिखता है . पाप कम से कम करने के लिए हमें हर कम विवेक पूर्वक करना चाहिए आधे पाप तो इससे बंद हो जाते है और आधे पाप के लिए हमें मन को सरल बनाना चाहिए ये मुश्किल है पर नामुनकिन नहीं .
जय जिनेन्द्र _/\_







Rajesh Agrawal

15 September 2012

The Architecture of Hindu Temples



The architecture of Hindu temples evolved over a period of more than 2,000 years and there is a great variety in this architecture.

Hindu temples are of different shapes and sizes – rectangular, octagonal, semi circular – with different typ
es of domes and gates. Temples in southern India have a different style than those in northern India. Although the architecture of Hindu temples is varied, they mainly have many things in common.
The 6 parts of a Hindu Temple:

1. The Dome and Steeple: The steeple of the dome is called ‘shikhara’ (summit) that represents the mythological ‘Meru’or the highest mountain peak. The shape of the dome varies from region to region and the steeple is often in the form of the trident of Shiva.

2. The Inner Chamber: The inner chamber of the temple called ‘garbhagriha’ or ‘womb-chamber’ is where the image or idol of the deity (‘murti’) is placed. In most temples, the visitors cannot enter the garbhagriha, and only the temple priests are allowed inside.
3. The Temple Hall: Most large temples have a hall meant for the audience to sit. This is also called the ‘nata-mandira’ (hall for temple-dancing) where, in days ofyore, women dancers or ‘devadasis’ used to perform dancerituals. Devotees use the hall to sit,meditate, pray, chant or watch thepriests perform the rituals. The hall is usually decorated with paintings of gods and goddesses.
4. The Front Porch: This area of the temples usually has a big metallic bell that hangs from the ceiling. Devotees entering and leaving the porch ring this bell to declare their arrival and departure.
5. The Reservoir: If the temple is not in the vicinity of a natural water body, a reservoir of fresh water is built on the temple premises. The water is used for rituals as well as to keep the temple floor clean or even for a ritual bath before entering the holy abode.
6. The Walkway: Most temples have a walkway around the walls of the inner chamber for circum-ambulation by devotees around the deity as a mark of respect to the temples god or goddess.
Rajesh Agrawal

The Heart touching Story of Rani Padmini



The heart touching story of Rani Padmini- The symbol of Indian womanhood and sacrifice :: Must read

In 12th and 13th centuries, Rawal Ratan Singh was the King of Chittor. Rani Padmini, the wife of King Rawal Ratan Singh and Queen of Chittor and often a great figure for her womanhood and sacrifice.

During those days, the Sultanate of Delhi- the kingdom set up by the invaders was nevertheless growing in power. That time Allah-ud-din Khilji was the Sultan and who made repeated
attack on Mewar on one reason and the other.

At the same time Chittor was under the Rule of Rawal Ratan Singh, a brave and noble warrior King. As well a patron of the arts. In his court were many talented people one of whom was a musician named Raghav Chetan. But unknown to everyone, he was also a sorcerer. He used his evil talent to run down his competitor but unluckily was caught red-handed. On hearing this King was angry and he punished Raghav Chetan to send away from his kingdom after blackening his face and making him ride on donkey.

Due to this, Raghav Chetan became an uncompromising enemy of the King. Raghav Chetan made his way towards Delhi with the aim of trying to incite the Sultan of Delhi Allah-ud-din Khilji to attack chittor.

When Raghav Chetan come near to Delhi, was settled down in one of the forests nearby Delhi which the Sultan used frequently for hunting deers. One day he saw the hunt party entering the forest, he started playing a melodious tone on his flute. Hunt party get surprised, and they found Raghav Chetan was playing a flute . Raghav Chetan was then brought before sultan, and the Sultan asked him to come to his court at Delhi.The cunning Raghav-Chetan asked the king as to why he wants to have a ordinary musician like himself when there were many other beautiful objects to be had. The Sultan wondering what Raghav Chetan meant, Sultan asked him to clarify. Then he told about Rani Padmini's beauty, Allah-ud-din's lust was aroused and immediately on returning to his capital he gave orders to his army to march on Chittor.

But he get disappointed, due to the fort to be heavily defended. Hopefull to have a look at the legendary beauty of Padimini, he send word to King Ratan Singh that he looked upon padmini as his sister and wanted to meet her. On hearing this, the unsuspecting Ratansen asked Padmini to see the 'brother'. But Padmini was more wordly-wise and she refused to meet the lustful Sultan personally.

Rani Padmini then convinced by her husband, She agreed to allow Allah-ud -din to see her only in a mirror.On the word being sent to Allah-ud-din that Padmini would see him, he came to the fort with his selected and best warriors who secretly made a careful examination of the fort's defences on their way to the Palace. On seeing Padmini, in a mirror, the lustful Sultan decided that he should secure Padmini for himself. While returing to his camp, Sultan was accompanied for some way by King Ratan Singh. Taking this opportunity, Sultan skillfully kidnapped Ratan Singh and took him as a prisoner into his camp and demanded that Padmini come and surrender herself before Sultan, if she wanted her husband king Ratan Singh alive again.

The Rajput generals decided to beat the Sultan at his own game and sent back a word that Padmini would be given to Sultan the next morning. On the following day at the crack of dawn, one hundred and fifity palaquins (covered cases in which royal ladies were carried in medieveal times) left the fort and made their way towards Sultan's camps. The palanquins stopped before the tent where king Ratan singh was being held prisoner. Seeing that the palanquins had come from Chittor, and thinking that they had brought along with them his queen, king Ratan Singh was mortified. But get surprised, because his queen is not there in the palanquins but her women servant and fully armed soldiers, who quickly freed Ratan Singh and galloped away towards Chittor on horses grabbed from Sultan's stables.

On hearing that, the lustful Sultan was furious and ordered his army to attack on Chittor. But hard as they tried the Sultans army could not break into the fort. Sultan decided to lay seige to the fort. The seige was the prolonged effort to gain the fort. Finally King Ratnasingh gave orders that the Rajputs would open the gates and fight to finish with the besieging troops. On hearing of this decision, Padmini decided that with their men-folk going into the unequal struggle with the Sultan's army in which they were sure to perish, the women of Chittor had either to commit suicides or face dishonour at the hands of the victorious enemy.

The choice was in favour of suicide through Jauhar. A huge pyre was lit and followed by their queen, all the women of Chittor jumped into the flames and deceived the lustful enemy waiting outside. With their womenfolk dead, the men of Chittor had nothing to live for. Their charged out of the fort and fought on furiously with the vastly Powerful array of the Sultan, till all of them perished. After this phyrrhic victory the Sultan's troops entered the fort only to be confronted with ashes and burnt bones of the women whose honour they were going to violate to satisfy their lust.

These women who committed Jauhar had to perish but their memory has been kept alive till today by bards and songs which glorify their act which was right in those days and circumstances. Thus a halo of honour is given to their supreme sacrifice —
Rajesh Agrawal

14 September 2012

Alternate for all your medicine which your doctor prescribe




Click on below link. And you are done.

http://www.medguideindia.com/show_brand.php

Please check the alternate for all your medicine which your doctor prescribe you and if they are very expensive which you can not purchase in your budget and necessary too . you can go for alternate medicine with same solution mix.


!! Rajesh Agrawal !!

गौ-हत्या क्यों बुरी है ? इसका क्या नुकसान है? ...इसका एक आर्थिक पहलू ***

गौ-हत्या क्यों बुरी है ? इसका क्या नुकसान है? ...इसका एक आर्थिक पहलू ***

१. अब यूरोपियन लोग चैन से सस्ता मांस खाये, इसके लिए उन्हें हमारे टैक्स से सब्सिड़ी लेकर सस्ता मांस भेजा जा रहा है, और भारत में लाखो बच्चो को दूध नहीं मिलता, क्यूकी गाय की कम संख्या होने की वजह से दूध महंगा होता जा रहा है. लाखो गरीब परिवार दूध खरीद ही नहीं पाते! ये सच्चाई है, कुछ कहानी नहीं. लेकिन हमारे अंधे हिन्दू-विरोधी मार्क्सवादी कांग्रेस को यह दिखाई कहा देता है? वो तो बस यही कहकर गौ-हत्या करवा रही है की ये एक सभ्य यूरोपियन संस्कृति की आदत है, जो हमें अपनानी चाहिए. सीधी सी बात है, की कांग्रेसी दल्ले नफा कमा रहे है, बच्चो का लाखो बच्चो दूध महंगा करवा के.

२. दूसरी बात. जिस २ गाई को काटकर एक व्यक्ति सिर्फ ४०,००० रुपये कमाता है, वही व्यक्ति अगर उसी २ गाई से ५ साल दूध बेचेगा, तो उसे कम से कम ४,००.००० रुपये मिलेंगे. जिससे वो अपने बचे को मेट्रिक तक पढ़ा सकता है. यानि की एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था को बरबाद किया जा रहा है, क्यूकी कुछ हरामखोरो को जल्दी अमीर होना है. वो हरामखोर तो अमीर हो जाते है, लेकिन अपने पीछे १०,००० गरीब पैदा कर रहे है.

३. तीसरी बात. यूरोप की जनसँख्या बहुत कम है, हमारे भारत जैसे १२० करोड़ नहीं है. उनकी को मांस खाने की आदत है, वो खुद ही पूरी नहीं कर पाते है, उन्हें बाहर से इम्पोर्ट करना पड़ता है. अब सोचिये, की क्या आप ऐसी ही सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था भारत में लागू करना चाहते है? कहा से आएगा इतना मांस? क्या १२० करोड़ लोगो के लिए इतनी गाय पैदा हो सकती है? क्या हम इसी तरह बिना सोचे-समझे यूरोप का मॉडेल कॉपी करेंगे?

कृपया, सब लोग इस बात को समझ लीजिये, की हम बर्बादी की ओर बढ़ रहे है. भारत में कुपोषण का एक बहुत बड़ा कारण ये गौ-मांस का एक्सपोर्ट और गौ-हत्या है.

गरीबी की जनक, मूर्खो की पार्टी = मुघल कांग्रेस.

कृपया इसे शेयर किजिये, कॉपी-पेस्ट करिये. शायद लोग गौ-हत्या से जुड़े आर्थिक और सामाजिक पहलू को समझ सके, और ये अंधी हिन्दू-विरोधी मानसिकता से बाहर निकल कर सोचे.
Rajesh Agrawal

कैसे गयासुद्दीन गाजी बना गंगाधर...कृपया पूरा पढ़े....




कैसे गयासुद्दीन गाजी बना गंगाधर...
शुरुआत होती है गंगाधर (गंगाधर नेहरू नहीं), यानी मोतीलाल नेहरू के पिता से नेहरू उपनाम बाद में मोतीलाल ने खुद लगा लिया था, जिसका शाब्दिक अर्थ था नहर वाले, वरना तो उनका नाम होना चाहिये था मोतीलाल ’धर’, लेकिन जैसा कि इस खानदान की नाम बदलने की आदत थी उसी के मुताबिक उन्होंने यह किया ।


रॉबर्ट हार्डी एन्ड्रूज की किताब ए लैम्प फॉर इंडिया - द स्टोरी ऑफ मदाम पंडित में उस तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा है, जिसके अनुसार गंगाधर असल में
एक सुन्नी मुसलमान था, जिसका असली नाम गयासुद्दीन गाजी था। आप सोच रहें होगें की ये कैसे पता चला?

दरअसल नेहरू ने खुद की आत्मकथा में एक जगह लिखा था कि उनके दादा अर्थात मोतीलाल के पिता गंगा धर थे, ठीक वैसा ही जवाहर की बहन कृष्णा ने भी एक जगह लिखा है कि उनके दादाजी मुगल सल्तनत (बहादुरशाह जफर के समय) में नगर कोतवाल थे।

अब इतिहासकारों ने खोजा तो पाया कि बहादुरशाह जफर के समय कोई भी हिन्दू इतनी महत्वपूर्ण ओहदे पर नहीं था।

और खोजबीन पर पता चला कि उस वक्त के दो नायब कोतवाल हिन्दू थे नाम थे भाऊ सिंह और काशीनाथ, जो कि लाहौरी गेट दिल्ली में तैनात थे, लेकिन किसी गंगा धर नाम के व्यक्ति का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला (मेहदी हुसैन की पुस्तक बहादुरशाह जफर और १८५७ का गदर, १९८७ की आवृत्ति), रिकॉर्ड मिलता भी कैसे, क्योंकि गंगा धर नाम तो बाद में अंग्रेजों के कहर से डर कर बदला गया था, असली नाम तो था गयासुद्दीन गाजी।

जब अंग्रेजों ने दिल्ली को लगभग जीत लिया था, तब मुगलों और मुसलमानों के दोबारा विद्रोह के डर से उन्होंने दिल्ली के सारे हिन्दुओं और मुसलमानों को शहर से बाहर करके तम्बुओं में ठहरा दिया था, अंग्रेज वह गलती नहीं दोहराना चाहते थे, जो हिन्दू राजाओं (पृथ्वीराज चैहान ने) ने मुसलमान आक्रांताओं को जीवित छोडकर की थी, इसलिये उन्होंने चुन-चुन कर मुसलमानों को मारना शुरु किया, लेकिन कुछ मुसलमान दिल्ली से भागकर पास के इलाकों मे चले गये थे। उसी समय यह परिवार भी आगरा की तरफ कूच कर गया हमने यह कैसे जाना?

नेहरू ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि आगरा जाते समय उनके दादा गंगा धर को अंग्रेजों ने रोक कर पूछताछ की थी, लेकिन तब गंगा धर ने कहा था कि वे मुसलमान नहीं हैं, बल्कि कश्मीरी पंडित हैं और अंग्रेजों ने उन्हें आगरा जाने दिया बाकी तो इतिहास में सब हैं ही।

यह धर उपनाम कश्मीरी पंडितों में आमतौर पाया जाता है, और इसी का अपभ्रंश होते-होते और धर्मान्तरण होते-होते यह दर या डार हो गया जो कि कश्मीर के अविभाजित हिस्से में आमतौर पाया जाने वाला नाम है ।

लेकिन मोतीलाल ने नेहरू नाम चुना ताकि यह पूरी तरह से हिन्दू सा लगे। इतने पीछे से शुरुआत करने का मकसद सिर्फ यही है कि हमें पता चले कि खानदानी लोग क्या होते हैं ।

कहा जाता है कि आदमी और घोडे को उसकी नस्ल से पहचानना चाहिये, प्रत्येक व्यक्ति और घोडा अपनी नस्लीय विशेषताओं के हिसाब से ही व्यवहार करता है, संस्कार उसमें थोडा सा बदलाव ला सकते हैं, लेकिन उसका मूल स्वभाव आसानी से बदलता नहीं है।

एम कैम कैसी शेम,नेम का ये गेम हैं,,,
नाम बदनाम हैं मगर अपुन का फ़ेम हैं

Rajesh Agrawal

इन 50 प्रश्नों के उत्तर दीजिए .. क्यों..??



1.यदि पाकिस्तान और भारत का बटवारा धर्म के आधार पर हुआ जिसमेपाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र बना तो भारत हिन्दू राष्ट्र घोषित क्यों नहीं किया ? जबकि दुनिया मेएक भी हिन्दू राष्ट्र नहीं है ! ..

2.तथाकथित राष्ट्र का पिता मोहनदास गांधी ने ऐसा क्यों कहा पाकिस्तान से हिन्दू सिखो की लाशे आए तो आए लेकिन यहाँ एक भी मुस्लिम का खून नहीं बहना चाहिए ?

3.मोहनदास करमचंद गांधी चाहते तो भगत सिंह जी को बचा सकते थे क्यों नहीं बचाया ? भारत मे मुस्लिम के लिए अलग अलग धाराए क्यों है ?

4.ऐसा क्यों है की भारत से अलग होकर जीतने भी देश बने है सब इस्लामिक देश ही बने । क्यों ?

5.केरल मे कोई रिक्शा वाला वाहन चालक हिन्दू श्री कृष्ण, जय हनुमान क्यों नहीं लिख सकता ?

6.भारत मे मुस्लिम 18% के आस पास है फिर भी अल्पसंख्यक कैसे है ? जबकि नियम कहता है की 10% के अंदर की संख्या ही अल्पसंख्यक है..

7.कश्मीर से हिन्दुओ को क्यों खदेड़ दिया जबकि कश्मीर हिन्दुओ का राज्य था ?

8.ऐसा क्यों है की मुस्लिम जहा 30-40% हो जाते है तब अपने लिए अलग इस्लामिक राष्ट्र बनाने की मांग उठाते है विरोध करते है अन्यसमुदाय के गले रेतते है क्यों ?

9.हिन्दुत्व को सांप्रदायिक क्यों ठहराया जाता है जबकि इस्लामिक आतंकवाद को धर्म से नहीं जोड़ने की अपील की जाती है ?

10.फरवरी मे बाबा रामदेव ने सर्वप्रथम भ्रष्टाचार के खिलाफ विशाल रेली आयोजित की थी, उस महारेली मे 1 लाख 18 हजार लोग आए थे तब मीडिया के किसी भी चेनल ने एक खबर तक नहीं दिखाई थी और जैसे ही अण्णा जंतर मंत्र पर मात्र 5000 समर्थको के साथ अनशन पर बैठे तो सारे मीडिया वाले अण्णा चालीसा गाने लगे क्यों ???? इसके पीछे क्या कारण है ?

11.अगर अण्णा हज़ारे को अनशन करनाही था तो रामदेव से मंच से पब्लिसिटी हासिल करके अलग मंच बनाने की क्या आवश्यकता थी ?

12.बॉलीवुड अण्णा हज़ारे का समर्थन करता है लेकिन रामदेवजी का विरोध क्यों करता है ?

13.हमारा देश ही दुनिया मे एक मात्र देश है जो मुस्लिम को हज सब्सिडी देता है 60 वर्षो मे सरकार ने इसके लिए 10000 करोड़ रुपये खर्च कर डाले क्यों ?

14.सोनिया गांधी ने अपनी जन्म दिनांक 1944 बताई है लेकिन तथ्य बताते है की उसके पिताजी सिग्नोर स्टेफनो माइनो 1943 से 1972 के बीच रूस मे केदी थे..

15.भारत मे मुस्लिमो के मदरसो के अनुदान हिन्दू मंदिरो से क्यों ?

16.कश्मीर मे गीता उपदेश देने पर संवेधानिक अडचने क्यों है ?

17.जामा मस्जिद के इमाम सैयद बुखारी ने एक बार कहा था की वह ओसामा बिन लादेन का समर्थन करता है और आईएसआई का ऐजेंट है फिर भी भारत सरकार उसे गिरफ्तार क्यों नहीं करती ?

18.सरकार ने अण्णा हज़ारे के आंदोलन को सख्ती से नहीं कुचला जबकि रामदेव के समर्थको और स्वामी रामदेव की जान के पीछे पड़ी थी क्यों ?

19.मोहनदास गांधी ने अपने ब्रह्मचर्य के प्रयोग को बुढ़ापेमे करके क्या सीखा ? युवाओ को क्या सिखाया ?

20.पाकिस्तान मे 1947 मे 22.45% हिन्दू थे आज मात्र 1.12% शेष है सब कहा गए ? मुगलो द्वारा ध्वस्त किया गया मंदिर सोमनाथ केजीर्णोद्धार की बात आई तो गांधी ने ऐसा क्यों कहा की यह सरकारी पैसे का दुरपयोग है जबकि जामा मस्जिद के पुनर्निर्माण के लिए सरकार पर दबाव डाला, अनशन पर बैठे..

21.भारत मे 1947 मे 7.88% मुस्लिम थे आज 18.80% है इतनी आबादी कैसे बढ़ी ? 22.भारत मे मीडिया हिन्दुओ के, संघ के खिलाफ क्यों बोलती है ? अकबर के हरम मे 4878 हिन्दू औरते थी, जोधा अकबर फिल्म मे और स्कूली इतिहास मे इसेक्यों नहीं छापा गया ?

23.ऐसा क्यों होता है की जो भी सोनिया गांधी का धर्म जानने की कोशिश करता है कोर्ट उसी पर जुर्माना लगा देता है ?

24.बाबर ने लाखो हिन्दुओ की हत्याकी फिर भी हम उसकी मस्जिद क्यों देखना चाहते है ? भारत मे 80% हिन्दू है फिर भी श्री राम मंदिर क्यों नहीं बन सकता ?

25.कॉंग्रेस के शासन मे 645 दंगे हुए है जिसमे 32,427 लोगमारे गए है मीडिया को वो दिखाई नहीं देता है जबकि गुजरात मे प्रतिकृया मे हुए दंगो मे 2000 लोग मारे गए उस पर मीडिया हो इतना हल्ला करती है क्यों ? 26. 67 कारसेवको को गोधरा मे जिंदा जलाया मीडिया उनकी बाते क्यूँ नहीं करती ?

27.जवाहर लाल नेहरू के दादा एक मुस्लिम (गया सुद्दीन गाजी) थे, हमें इतिहास मे गलत क्यों बताया गया ?

28.भारत मे गुरु परंपरा रही है, हरमहापुरुष के गुरु थे गांधी जी ने आज तक अपना गुरु क्यों नहीं बनाया?

29.भारत एक ऐसा देश है जहा से सभ्यता शुरू हुई तो गांधी इस देश का पिता कैसे ?

30.दुनिया मे एक भी हिन्दू देश नहीं है फिर भी आप सोचते है हिन्दू सांप्रदायिक है ?

31.गांधी ने खिलाफत आंदोलन को सहयोग क्यों दिया इससे क्या फायदे हुए ?

32.शुद्धि कारण आंदोलन कर रहे स्वामी श्रद्धानन्द की हत्या करने वाले रशीद नाम के युवक को गांधी ने भाई कहकर संबोधित क्यों किया ?

33.गांधी ने कहा था की रशीद भाई जैसा है और स्वामी श्रद्धानन्द हिन्दू एकता का कार्यक्रम चलकर के "हिन्दू - मुस्लिम एकता" को विखंडित कर रहे थे..

34.जब तालिबान ने बुद्ध की मूर्तिया गिराई थी तो सेकुलर कीट मीडिया के "टाइम्स ऑफ इंडिया" ने अपने कॉलम मे लिखा था की यह बाबरी मस्जिद गिराने पर प्रतिशोध है.. क्या आप सहमत है इस वक्तव्य से ? जैसे को तैसा ? तो आपगुजरात के दंगो का विरोध क्यों करते हो वहाँभी तो गोधरा कांड के विरोध मे बदले की आग मे दंगे हुए थे ?

35.ईसाई मिशनरी मुस्लिम इलाको मे धर्मांतरणक्यों नहीं करते ?

36.भारतीय मीडिया हिन्दुत्व विरोधी क्यों है ? संघ सबसे बड़ा एनजीओ है बिना किसी सरकारी मदद केफिर मीडिया को इससे क्या परेशानी है ?

37. संघ देश के गरीब पिछड़े इलाको मे अपने स्वयं सेवी संस्थानो की मदद से मुफ्त मे विद्यालय चलता है..जहां सरकारी योजनाए नहीं चलती क्या संघ देश विरोधी है ? या मीडिया ?

38.आप मीडिया के बारे मे क्या सोचते हो ? रामदेव भगवा धारी है इसलिए ?
उसका समर्थन नहीं करती ? या अण्णा हज़ारे कॉंग्रेस प्रायोजित ऐजेंटताकि राष्ट्रवादियो को बाँट कर वोट काट सके ? और कॉंग्रेस जीते ?

39.केरल मे आप जीसस अल्ला के नाम से शपथ ले सकते है लेकिन राम का नाम ले नहीं सकते ।सेकुलर कीट TIMES OF INDIA ने अपने लेख मे लिखा था "किस तरह बंगलादेशी घुसपेथियों का भारतीयकरण किया जाये" आप ऐसे लेख से इन मीडिया की मंशा समझ सकते है की ये लोग भारत को एक धर्म शाला मानते है

40.हमारे राष्ट्र पति भवन मे एक मस्जिद है लेकिन मंदिर नहीं है क्या आप
अभी भी सोचते है भारत एक सेकुलर देश है ?

41.लोग कहते है की ताजमहल के बारे मे ये सब कोरी अफवाहे है की यह एक हिन्दू मंदिर है" अगर ये अफवाहे है तो कार्बन 14 पद्धति से इसकी जांच करवा लो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, और नीचे के आनन फानन मे बंद किए गए कमरे भी खोले जाए देश भी जाने की उसमे क्या है ? जैसे पद्मनाभ मंदिर के तहखाने खोले गए ? सच तो यह है की आगरा के पुरातत्व विभाग
के पास भी ऐसी कोई जानकारी नहीं है की इस महल का निर्माण शाहजहा ने
करवाया था

42.भारत मे मस्जिदों के इमाम और मौलवियों को दस दस हजार से अधिक
तंख्वाह मिलती है पुजारीय को क्यों नहीं ? क्या यही सेकुलर वाद है ? 43.2002 मे कर्नाटक सरकार को मंदिरो से 72 करोड़ की आवक हुई जिसमे से 50 करोड़ मदरसो पर खर्च हुए, 10 करोड़ चर्च पर और सिर्फ 8.5 करोड़ मंदिरो पर ..... ?

44.हिन्दू अपने पैसे से मस्जिद क्यों बनवाए ? क्यों चर्च चलाये ? क्या मदरसो से डॉक्टर, इंजीनियर निकलते है ?

45.यहाँ पॉप के आगमन पर राष्ट्र अवकाश रखा जाता है औरशंकरचार्य को आधी रात दिवाली के दिन कैद क्यों किया जाता है ...

46.पॉप को भारत मे बिना आने दिया जाता है और नेपाल के राजा को मक्कार सक्रांति पर नहीं आने दिया जाता (1965)

47.एक अँग्रेजी अखबार ने सोनिया का एक लेख छापा हिन्दुत्व पर .... ? क्या उस अखबार को सोनिया से बेहतर लेखक नहीं मिला ?

48.उत्तर पूर्वी राज्यो मे न्यूजीलेंड, ऑस्ट्रेलिया और निदर लेंड की सहायता से
चर्च का निर्माण हो रहा है ....क्या आपको लगता है चर्च राष्ट्र वाद को बढ़ावा देते है ?

49.सोनिया गाँधी अपनी नागरिकता पर कुछ नहीं बोलती..क्यों 50.सुब्रमन्यम
स्वामी के आरोपों पर कांग्रेस कुछनहीं बोलती क्यों... बाकी के प्रश्न आप
जोड़िए...इतने जोड़िए की लोगो का दिमाग हिल जाये....!!!!!! —


Rajesh Agrawal