13 November 2012

-इस्लामिक आतंकवाद को कैसे नेस्तनाबूद किया जाए?


सुब्रमण्यम स्वामी जी द्वरा लिखित लेख ‘How to wipe out Islamic terror? ’का हिन्दी अनुबाद---इस्लामिक आतंकवाद को कैसे नेस्तनाबूद किया जाए? जुलाई 13,2011 को मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए बम धमाकों के बाद हिन्दूओं को निर्णायक रूप से अपनी अन्तरात्मा को झकझोरने की जरूरत है

भारत का विनाश करने के लिए, मुसलिम आतंकवादियों द्वारा हिन्दूओं का हलाल तरीके से आए दिन खूनबहाया जाना, हिन्दूओं द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता


आतंकवाद गैर कानूनी तरीके से ताकत के दुरूपयोग का वो हथियार है, जिससे आम जनता को भयभीत कर, उसे आतंकवादियों की इच्छा के विपरीत काम करने से रोकने व आतंकवादियों की नजाजय मांगो को समर्थन देने के लिए मजबूर करने के लिए उपयोग किया जाता है भारत में हर महीने लगभग 40 आतंकवादी हमले होते हैं


इसीलिए हाल ही में अमेरिका के ‘आतंकवाद विरोधी केन्द्र’ के प्रकाशन ‘A Chronology of International Terrorism ’ में बताया गया है कि आज तक जितने आतंकवादी हमले भारत पर हुए हैं उतने आतंकवादी हमले दुनिया के किसी भी देश नेनहीं झेले हैं

वेशक प्रधानमन्त्री माओवादी हिंसा को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बतायें लेकिन मेरा मानना है कि आजइस्लामिक आतंकवाद देश के लिएसबसे गम्भीर खतरा है


अगर बर्तमान गृहमन्त्री,प्रधानमन्त्री और UPA अध्यक्ष को आज हटा दिया जाए तो माओवादी हिंसा को एकमहीन में उसी तरह समाप्त किया जा सकता है जिस तरह मैंने 1991 में बरिष्ठ मन्त्री के पदपर रहते हुए तमिलनाडु में LTTE व MGR ने 1980 में नक्सलवादियों को किया
मुसलिम आतंकवाद देश के लिए एकअलग तरह का खतरा है


मुसलिम आतंकवाद हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्यों है? इसके वारे में 2012 के बाद किसी के मन में कोई शंका नहीं रहेगी
2012 में तालिवान पाकिस्तान पर कब्जा कर लेंगे व अमेरिका अफगानिस्तान छोड़कर भाग जाएगा उसके बाद इस्लाम अपने अधूरे काम को पूरा करने के लिए हिन्दूत्व से सीधी लड़ाई लड़ेगा


अलकायदा का नया सरगना, जो कि ओसामाविन लादेन का उताधिकारी है पहले ही घोषणा कर चुका है कि मुसलिम आतंकवादियों का सबसेबड़ा लक्ष्य भारत है न कि अमेरिका कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दू बहुल भारत को ‘इस्लामी विजय का एक अधूरा अध्याय’ मानते हैं


हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि दुनिया के वाकी सभी वो देश, जिन पर इस्लाम ने विजय प्राप्त की ,इस्लामी आक्रमण के दो दशकों के भीतर 100% इस्लाम में परिवर्तित हो गए भारत एक अपबाद है


800 वर्षों के अत्याचारी बरबर मुसलिम शासन के बाद भी अविभाजित भारत में 75% हिन्दू अबादी थी कट्टरपंथी मुसलमानों को यही बात आज तक सता रही है कि मुसलमानों द्वारा किए गए वेहिसाब जुल्मों के बाबजूद वो मुसलिम आतंकवादी हिन्दूओं का मनोबल तोड़ने में क्यों सफल न हो पाए


हर दंगे के बाद नियुक्त किए गए जांच आयोगों की रिपोर्टों के अधार पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि 1947 से लेकर आज तक जितने भी हिन्दू- मुसलिम दंगे हुए हैं उन सबकी शुरूआत कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा ही की गई ---यहां तक कि गुजरात दंगों की शुरूआत भी कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा गोधरा में 56 हिन्दू महिलाओं और बच्चों को जिन्दा जलाकर की गई


आज की परिभाषा के अनुसार मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए ये सबके सब हमले आतंकवादी गतिविधियां हैं वेशक भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं लेकिन फिर भी कट्टरपंथी हिंसक मुसलमान हिन्दूओं पर जानलेवा हमले करने का दुश साहस करते हैं


भारत के अन्य मुसलमान इन हमलों को या तो मौन स्वीकृति देते हैं या फिर इनमें कूद पड़ते हैं या फिर हिन्दूओं के मारेजाने का तमाशा देखते हैं

भारत में अत्याचारी बाबर से लेकर कातिल औरंगजेब तक और औरंगजेब से लेकर आज तक हिन्दूओं का कत्लयाम ही मुसलमानों का ईतिहास है
हिन्दूओं पर मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए जाने हमलों के प्रति उदासीन रहने में ,भूतकाल में दारा सिकोह व वर्तमान में एम जे अकबर वसलमान हैदर जैसे लोग,जो मुसलिम आतंकवाद के विरूद्ध खुलकर वोलने से नहीं डरते हैं,अपबाद हैं .कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा किए जाने वाले हमलों के लिए हिन्दू ही दोशी हैं


कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा हिन्दूओं को निशाना बनाए जाने के लिए मैं मुसलमानों  के बजाए हिन्दूओं को ही दोष देता हूं में इन हमलों का दोष उन हिन्दूओं को देता हूं जिन्होंने सनातन धर्म में बाताई गई आत्मा और परमात्मा की अबधारणा को चरम पर ले जाते हुए खुद को अपने आप तक सीमित कर लिया


लाखों हिन्दू विना किसी सरकारी सहयोग के अपने आप को व्यबस्थित कर कुम्भ मेले में ईकट्ठे हो सकते हैं ,लेकिन मेले के बाद ये सब हिन्दू कशमीर, मऊ, मेल्विशरम और मलप्पुरम व अन्य विधर्मियों के बहुमत वाले इलाकों में हिन्दू मिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान के तहत मुसलमानों द्वारा निशाना बनाए जा रहे हिन्दूओं की पीड़ा से वेखबर,हमले के शिकार हिन्दूओं की सहायता के लिए विना कोई संगठित कदम उठाए घर की ओर लौट जाते हैं


उधाहरण के लिए अगर आधे हिन्दू भी जाति ,भाषा व क्षेत्र केविभाजनों से उपर उठकर बोट करें तो एक सच्चे हिन्दू राजनीतिक दल को दो तिहाई बहुमत मिलेगा


आज धर्मनिर्पेक्षतावादी ,उग्रहिन्दूओं द्वारा मुसलमानों व अन्य अल्पसंख्यकों पर किए गए छुट-पुट हमलों की बात करते हैं
लेकिन इन में से अधिकतर हमले कांग्रेस सरकारों द्वारा नियोजित रूपसे करवाए गए, न कि संगठितहिन्दूओं द्वारा जबकि ISI व पाकिस्तानकी सेना द्वारा प्रयोजित वनियोजित हमलों को छोड़ दें तो मुसलमानों द्वारा किए गए अधिकतर हमले गैर राज्य उपद्रवियों द्वारा किए गए
कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दूओं को निरूत्साहित करने के लिए हिन्दूओं को निशाना बनाकर हमले करते हैं ताकि हिन्दू अपने उन अधिकारों को छोड़ दें जो कि उन्हें नहीं छोड़ने चाहिए


इन हमलों का मूल उद्देशय भारतीय संस्कृति को कमजोर कर अन्त में भारत को समाप्त करना है


ये 1000 वर्ष से लड़े जा रहे हिन्दू विरोधी-भारत विरोधी युद्ध का वो अधूरा उद्देश्य हैजिसकी बात ओसामाविन लादेन अक्कसर करता है
असल में मुसलिम आतंकवाद वही हथियार है जिसका उपयोग सुहरावर्दी और जिन्ना द्वारा 1946 में हिन्दूओं को पाकिस्तान बनाने की मांग मानने को मजबूर करने के लिए वंगाल में किया गया


कांग्रेस पार्टी ने हिन्दूओं का प्रतिनिधि बनकर मुसलिम आतंकवाद के आगे घुटने टेकते हुए देश के भारत का 25% हिस्सा धर्मनिर्पेक्ष थाली में सजाकर मुसलिम आतंकवादी जिन्ना के हबाले कर दिया अब ये मुसलमान वाकी बचे 75% हिस्से पर आतंकवाद को हथियार बनाकर कब्जा करना चाहते हैं हिन्दू विरोधी ताकतें हम ये नहीं कहते कि इस्लाम को छोड़कर किसी और ने हिन्दूओं को निसाना नहीं बनाया
आजादी के बाद के 6 दशकों में अंग्रेजो के सम्राज्यबाद से प्रभावित इवी रामास्वामी के नेतृत्ववाले, द्रविड़यन अन्दोलन ने तर्कशीलता के नामपर हिन्दू धर्म को तर्कहीन करार देने की कोशिश की और हिन्दूधर्म का प्रचार करने वाले पुजारियों को आतंकित कर हिन्दू धर्मका प्रचार करने से रोकने की कुचेष्ठा की
आंदोलन के संगठनात्मक हाथ,द्रविड़ कझगम (डी के) ने 50 वर्ष तक इसलिए राबण की पूजा की ताकि हिन्दूओं द्वारा भगवान राम की अराधना करने का उपहास उड़ाया जा सके व माता सीता के अपहरण को जायज ठहराकर हिन्दूओं को अपमानित किया जा सके
लेकिन जैसे ही द्रविड़ कझगम(DK) को ये पता चला कि रावण एक ब्राह्मण भगवान होने के साथ-साथ शिव का एक पवित्र भक्त भी था,तो इसने राबणकी पूजा करनी बन्द कर दी
रामायण के अपमान की इस नीचता को छोड़ने के बाद DK ने अब उस भारत विरोधी LTTE का समर्थन करना शुरू करदिया जिसने श्रीलंका में तमिल–हिन्दू नेताओं को मारने में विशेसज्ञता हासिल करली है
वे शक अब LTTE के नाश के बाद DK अनाथ हो गई है
गृह-युद्ध की स्थिति 1960 के दशक में ईसाई मिशनरियों ने नागा लोगों को भारत केविरूद्ध भड़काया जिसके परिणामस्वारूप अब नागा भी भारत से नागालैंड को अलग करवाकर भारत को और विभाजित करना चाहते हैं

1980 के दशक में विदेश में प्रक्षिक्षण प्राप्त भारत विरोधी ईसाई आतंकवादियों ने मणिपुर मेंहिन्दूओं को निशाना बनाया
ईसाई आतंकवादियों द्वारा मणिपुर में रहने वाले लोगों को धमकी दी गई कि या तो भारत का विरोध करो या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ
1986 से खासकर 1990 के दशक में कशमीर में इस्लामिक आतंकवादियों ने हिन्दूओं को निशाना बनाकर उनकी मां-बहन वेटियों को अपनानित करने के साथ-साथ हिन्दूओं का बड़े पैमाने पर कत्लयाम कर उन्हें कशमीर घाटी छोड़ने को मजबूर किया

अब बड़े स्तर पर इस बातको माना जाने लगा है कि मुसलिम आतंकवादी हिन्दूओं को निशाना बनाकर हमले कर रहे हैं व भारत के मुसलमान इन हमलों को मौन स्वीकृति दे रहेहैं


मुसलिम आतंकवादियों के विदेशी संरक्षक अब आतंकवादी हमलों को कुछ इस तरह का अन्जाम दे रहे हैं ताकि मुसलमानों को हिन्दूओं के विरूद्ध राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाया जा सके जिससे भारत में सर्विया और वोसनिया की तरह गृह युद्ध छेड़ा जा सके
मुसलमानों को 'उदारवादियों' और 'चरमपंथियों में विभाजित नहीं किया जा सकता है क्योंकि जब भी चरमपंथी मुसलमानों केविरूद्ध कदम उठाए जाते हैं तबतथाकथित उदारवादी उनकी ढ़ाल बनकर खड़े हो जाते हैं
पाकिस्तान की असैन्य सरकार ने पतंगवाजी पर सिर्फ इसलिए प्रतिबन्ध लगा दिया क्योंकि तालिवान पतंगवाजी को हिन्दूओं का खेलमानते हैं

मलेशिया और कजाकिस्तान की उदारबादी सरकारें हिन्दू-मन्दिरों को गिरा रहीं हैं


*सामूहिक प्रतिक्रिया *  इसलिए भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए,भारत विरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें सबसे पहला सबक ये सीखने की जरूरत है कि आतंकवाद के निशाने पर हिंदू हैं और भारत के मुसलमानों को धीमी प्रतिक्रियाशील प्रक्रिया के द्वारा आतंकवादी बनने के लिए क्रमादेशित किया जा रहा है ताकि वो हिन्दूओं के विरूद्ध आत्मघाती हमले करने पर अमादा हो जायें
हिंदू मानस को कमजोर करने और गृहयुद्ध का डर पैदा करने के लिए इन आतंकवादी हमलों को अन्जाम दिया जा रहा है
और इसलिए क्योंकि आतंकवादियों के निशाने पर हिन्दू हैं, हिन्दूओं को हिन्दूओं के रूप में ही भारत विरोधी आतंकवादियों के विरूद्ध संगठित होकर जबाबी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि कोई हिन्दू खुद को अलग थलग या लाचार महसूस न करे
हिन्दू को इसलिए आतंकवाद से मुंह नहीं फेर लेना चाहिए कि अभी तक उसके परिवार का कोई सदस्य इस आतंकवाद का सिकार नहीं हुआ है

आज अगर एक हिन्दू सिर्फ इसलिए मारा जाता है क्योंकि वह हिन्दू है  तो यह सब हिन्दूओं की नैतिक मौत है ये विराट हिन्दू का एक जरूरी और आबश्यक मानसिक रवैया है
( विराट हिन्दू की अबधारणा की अधिकजानकारी के लिए मेरी ‘HindusUnder Siege: The Way OutHaranand, 2006).’ देखें
इसलिए हमें मुसलिम आतंकवाद का सामना करने के लिए हिन्दू के नाते सामूहिक मानसिकता की जरूरत है
इस जबाबी कार्यवाही में भारत के मुसलमान भी हमारे साथ आ सकते हैं अगर वो सच में हिन्दूओं के कत्लयाम के विरूद्ध हैं तो
मैं नहीं मानता कि भारतीय मुसलमान हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध तब तक हमारे साथ आयेंगे जब तक वो इस सच्चाई को स्वीकार नहीं करते कि वेशक वो आज मुसलिम हैं लेकिन उनके पूर्वज भी हिन्दू ही हैं


अपने पूर्वजों के वारे में इस सच्चाई को स्वीकार करना मुसलमानों के लिए आसान नहीं है क्योंकि मुसलिम मुल्हा इसका इसलिए विरोध करेंगे क्योंकि इस सच्चाई को स्वीकारने के बाद एक तो भारतीय मुसलमानों में इस्लाम से मिली आत्मघाती कट्टरता कमजोर हो जाएगी और दूसरा इस सच्चाई को जानने व स्वीकारने के बाद उनकी हिन्दूधर्म में घर बापसी की सम्भावनायें बढ़ जायेंगी


कहीं भारतीय मुसलमान इस सच्चाई को स्वीकार न कर लें इसीलिए मुसलमानों के धार्मिक नेता हरहाल में काफिर बोले तो हिन्दूओं के विरूद्ध हिंसा और नफरतका प्रचार प्रसार करते रहते हैं

(उधाहरण के लिए आप कुरान के अध्याय 8 की आयत 12 पढ़ सकते हैं
) इस्लामिक आतंकवादी संस्था सिमी (SIMI) पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि भारत दारूल हरब है और SIMI इसे दारूल इस्लाम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है


भारत का दारूल हरब होना, मुसलमानों को हिन्दूओं का कत्लयाम करने ,हिन्दूओं के मान सम्मान को ठेस पहुंचाने ,हिन्दूओं की मां-बहन-बेटियों की इज्जत आबरू के साथ खिलबाड़ करने के साथ साथ उन्हें हिन्दूओं के प्रति हर तरह के नैतिक बन्धनों से मुक्त करता  है क्योंकि मुसलमानों को कुरान व हदीस में दारूल हरब को दारूल इस्लाम बनाने के लिए ये सब करने का आदेश दिया गया है


बृहद हिन्दू समाज परन्तु फिर भी अगर कोई मुसलमान इस बात को स्वीकार करता है कि उसके पूर्बज हिन्दू हैं तो हम उसे बृहद हिन्दू समाज बोले तो हिन्दूस्तान के अंग के रूप में स्वीकार कर सकते हैं


भारत अर्थात इंडिया अर्थात हिन्दुस्तान हिन्दूओं और अन्य जिनके पूर्बज हिन्दू हैं उन सबका देश है


यहां तक कि भारत में रहने वाले पारसियों औरयहूदियों के पूर्बज भी हिन्दू ही थे

अन्य जो भारत से अपना खून का रिस्ता होनेकी बात को अस्वीकार करते हैं या फिर जिनका भारत से खून का रिस्ता है ही नहीं या फिर वो विदेशी जो मात्र पंजीकरण की बजह से भारतीय नागरिक बने हैं वो भारत में रह तो सकते हैं लेकिन उन्हें बोट डालने का अधिकार नहीं दिया जा सकता 


(मतलब वो चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हो सकते)


इसलिए आतंकबाद का मुकाबला करने बालीनीति पर अमल करने से पहले हर और प्रतेक हिन्दू का प्रतिबद्ध और बिराट हिन्दू बनना जरूरी है
किसी भी व्यक्ति को बिराट हिन्दू बनने के लिए एक हिन्दू मानसिकता रखना मतलब उसकी एक ऐसी मानसिकता होना जरूरी है जो व्यक्तिगत और राष्ट्रीयचरित्र के अन्तर को समझ सके बिराट हिन्दू होने के लिए किसी हिन्दू का पबित्र, इमानदार और पढ़ा-लिखा होना ही काफी नहीं है
ये सब व्यक्तिगत चरित्र के अंग हैं


राष्ट्रीय चरित्र वो मानसिकता है जो सक्रिय व पूरी ताकत से देश की पबित्रता और अखण्डता के लिए प्रतिबद्ध रहती है


उधाहरण के लिए मनमोहन सिंह (प्रधानमन्त्री) का व्यक्तिगत चरित्र तो ठीक दिखता है परन्तु अर्द्ध साक्षरसोनिया गांधी की एक रबर स्टैंप की तरह काम करते हुए हर राष्ट्रीय मुद्दे पर घुटने टेक देने की वजह से ये साबित हो चुका हैकि उसका कोई राष्ट्रीय चरित्र नहीं है


भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारत विरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें दूसरा सबक ये सीखना चाहिए कि क्योंकि आतंकवादियों का उदेश्य हिन्दूओं का मनोबल तोड़ना और हिन्दू संस्कृति को समाप्त करने के लिए भारत के हिन्दू आधार को तबाह करना है इसलिए हमें आतंकवादियों के आगे न तो हथियार डालने चाहिए और न ही आतंकवादियों की किसी भी मांग को मानना चाहिए


आतंकवाद से लड़ने की किसी भी नीति का मूल आधार यही होना चाहिए कि हम आतंकवादियों की किसी भी मांग को किसी भी हालात में नहीं मानेंगे

हमारे हाल के इतिहास में इस नीति पर विलकुल भी अमल नहीं किया गया


जब से हमने 1947 में मुसलिम आतंकवादियों के दबाब में पाकिस्तान बनाने की मांगको स्वीकार किया है तब से हम दबाब में बार-बार आतंकवादियों के आगे घुकने टेक देते हैं

आतंकवादियों के सामने घुटने टेकने की घटनायें
1989 में मुफ्ती मुहम्द सैयद की वेटी रूविया को आतंकवादियों से मुक्त करवाने के लिए वी पी सिंह सरकार द्वारा भारतीय जेलों से पांच आतंकवादियों को छोड़ दिया गया


इस घटना ने अपराधियों को कशमीरी अलगाववादियों व उनके समर्थकों की आँखों में नायक बना दिया 

क्योंकि इन अपराधियों ने हिन्दूओं की सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देने में सफलता हासिल की थी


रूविया को छुड़ाने के लिए आतंकवादियों के आगे घुटने टेकना जरूरी नहीं था


भारत के आधुनिक इतिहास में आतंकवादियों के आगे घुटने टेकने की सबसे शर्मनाक घटना तब घटी जब 1999 में आतंकवादियों ने 


भारतीयविमान सेवा की उड़ान IC-814 को अगवा कर कन्धार पहुंचा दिया
सरकार ने न्यायालय से आज्ञा लिए विना ही तीन आतंकवादियों को छोड़ दिया


मानो देश को शर्मशार करने के लिए इतना ही काफी नहो आतंकवादियों को पाकिस्तान में धकेलने के बजाए, उनके साथ एक बिशेष अतिथी जैसा बर्ताव करते हुए प्रधानमन्त्री के विमान में विठाकर एक बरिष्ठ मन्त्री द्वारा कन्धार पहुंचाया गया


ये तीनों आतंकवादी कन्धार में छोड़े जाने के बाद वापिस पाकिस्तान गए
पाकिस्तान जाकर इन तीनों आतंकवादियों ने हिन्दूओं को कत्ल करने के लिए तीन अलग-अलग आतंकवादी संगठन बनाए


मुहम्दहजर जिसे ततकालीन सुरक्षा सलाहकार ब्रजेस मिश्र ने मेमना बताया था ने छोड़े जाने के बाद लश्करे तैयावा की कमान सम्भाली


लश्करे तैयवा वह गिरोह है जिसने श्रीनगर से लेकर बंगलौर तक हिन्दूओं को लहुलुहान करने के लिए बार-बार हमलों को अन्जाम दिया


अजहर ने मध्य 2000 से लेकर अब तक 2000 से अधिक हिन्दूओं का खून बहाया


यही अजहर दिसम्बर 13, 2001 में संसद भवन पर हुए हमले के लिए भी जिम्मेदार है

तीसरा आतंकवादी जरगर अल-मुझा हिदीन-जंगान की स्थापना करने के बाद आज कल डोडा और जम्मू में हिन्दूओं का खून बहा रहा है


कन्धरा में की गई ये मुर्खता हमें के सबक देती है कि हमें कभी भी,किसी भी हालात में आतंकवादियों के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए


अगर आप आतंकवादियों के आगे घुटने टेकते हैं तो आप घुटने टेक कर बचाए गए हिन्दूओं से कहीं ज्यादा हिन्दूओं का कत्ल करवायेंगे


इसलिए आतंकवादियों से किसी भी तरह की सौदेबाजी पर लगाम लगाकर ,आतंकवादियों के सर्वनाश के लिए आगे बढ़ना चाहिए


सच का सामना भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारत विरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें तीसरा सबक ये सीखना चाहिए कि आतंकवादी घटना कितनी भी छोटी या कम महत्व क्यों नहो देश को जबाबी कार्यवाही हरहाल में करनी चाहिए--- आतंकवादी घटना के बराबरया फिर विनम्र कार्यवाही नहीं वल्कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को सबक सिखाने के लिए पूर्ण कार्यवाही

उधाहरण के लिए अय़ोध्या परकिया गया आतंकवादी हमला वेशक बड़ा हमला नहीं था लेकिन हमें आतंकवादियों के हमले पर जबाबी कार्यवाही करते हुए अयोध्य में एक भव्य राम मन्दिर का पुनर निर्माण करना चाहिए था


ये कलियुग है इसलिए हिन्दू विरोधी आतंकवादियों व उनके समर्थकों के प्रति किसी भी सातविक प्रतिक्रिया के लिए कोई जगह नहीं है

हिन्दू धर्म में आपाकलीन धर्म का प्रावधान है जिस पर हमें आज के हालात में अमल करना चाहिए


ये हमारे लिए सच्चाई का सामना करने का वक्त है
एक सभ्यता के रूप में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए या तो हमें हिन्दू के रूप में संगठित होकर हिंसक व अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का मुकावला करना चाहिए या फिर परसियन, वेवीलोनियन और मिश्र की सभ्यता की तरह नष्ट होने के लिए तैयार हो जाना चाहिए


ये सभ्यतायें अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का संगठित होकर मुकावला करने में असमर्थ रहीं इसलिए इनका सर्वनाश हो गया
हमें शाम, दाम, दण्ड, भेद नियम का पालन करते हुए हरहाल में अत्याचारी इस्लामिक आतंकवाद का सर्वनाश सुनिश्चित करना चाहिए

वरना ये राक्षश हमें समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे

गरीबी आतंकवाद का कोई कारक नहीं भारत में इस्लामिक आतंकवादियों को प्रेरणा कहां से मिलती है? बहुत से लोग हिन्दूओं को ये सलाह देते हैं कि मुसलिम आतंकवादियों पर जबाबी हमले करने के बजाए आतंकवाद के मूल कारण को खत्म करें


ये लोग मूल कारण भी बताते हैं निर्दोष हिन्दूओं का खून बहाने वाले आतंकवादियों के लिए हर तरह की सहानुभूति रखने वाले खूनी उदारवादी हमे बताते हैं कि आतंकवाद के पनपने व बढ़ने का कारण अन पढ़ता, गरीबी, शोषण और भेदभाव है


ये तथाकथित उदारबादी कुतर्कदेते हैं कि इन आतंकवादियों का खात्मा करने पर जोर देने के बजाए आतंकवाद के इन चार कारणों को खत्म किया जाए

इन चार कारणों के समाप्त होते ही आतंकवाद खत्म हो जाएगा
इन प्रशनों का उतर देने से पहले ये समझ लेना बहुत जरूरी है कि मुझें नहीं लगता ये कातिल उदारवादी या खूनी बुद्धिजीवी भारत के प्रति बफादार हैं


ये हर व्यक्ति की भावनात्मक ताकत को खत्म कर उसे जिन्दा मुर्दा बना देना चाहते हैं मतलब मजबूरी को ये हिन्दूओं की मानसिकता का अंगबना देना चाहते हैं

इस तरह की हीन भावना के साथ कोई भी देश य़ा समाज लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकता ये कहना बकवास है कि जो आतंकवादी आज तक हमले कर लाखों हिन्दूओं का खूनबहा चुके हैं वो गरीब हैं


उधाहरण के लिए दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी ओसामा विनलादेन अरबपति है खनिज तेल से वेहिसाब पैसा कमाने वाले अमीर देश मुसलिम आतंकवादियों को संरक्षण और आर्थिक मदद पहुंचाते हैं


ब्रिटेन में आतंकवादी हमलों को अन्जाम देने के दोषी सबके सब आतंकवादी साधन सम्पन  मुसलमान हैं मुसलिम आतंकवादी अनपढ़ भी नहीं हैं

आतंकवादियों के अधिकतर सरगना डाकटर, चार्टड एकौंटैंट (CA), एम बी ए (MBA) और अध्यापक हैं


उधाहरण के लिए दिल्ली में धनतेरस के दिन सैंकड़ों हिन्दूओं का कतल करने वाला आतंकवादी रसायन विज्ञान में सनातकोतर है वटायम सुकेयर पर हमले का असफल प्रयास करने वाला आतंकवादी सहजाद MBA है वो भी अमेरिका के एकउच्चस्तरीय विश्वविद्यालय से
उसका सबन्ध पाकिस्तान के एक अमीर परिबार से है


निश्चित तौर पर उसने अपने ही देश पाकिस्तान में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं सहा 11 सित्मबर, 2001 को जिन 9 लोगों के गिरोह ने चार हबाई जहाजों को अगवा कर WorldTrade Towers सहित अन्य जगहों को निशाना बनाया निश्चित तौर पर उनके साथ भी अमेरिका में किसी तरह का भेदभाव या शोषण नहीं हुआ था


इसलिए ये कहना कि आतंकवाद गरीब आतंकवादियों की देन है पूरी से मूर्खतापूर्ण है अगर हम बांमपंथी उदारवादी कुतर्क को मान भी लेंतो क्या बामपंथी इस बात से सहमत हैं कि मुसलिम देशों में प्रताड़ित सबके सब गैर मुसलमानों को आतंकवादी बनकर मुसलमानों का कत्लकरना चाहिए
कशमीर घाटी जहां पर मुसलमान बहुमत में हैं वहां पर घारा 370 लगाकर बहुसंख्यक मुसलमानों को विशेषाधिकार दिए गए हैं व अल्पसंखयक हिन्दूओं का कत्लयाम किया गया ,हिन्दूओं की मां- बहन वेटियों के साथ बालातकार किए गए, अन्त में उन्हें वहां से भगा दिया गया


वो अपने ही देश में वेघर होकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैंतो क्या ये उदारबादी उनके द्वारा मुसलमानों के विरूद्ध हथियार उठाने पर उनका बैसा ही साथ देंगे जैसा वो आज तक हिन्दूओं का कत्ल करने वाले मुसलिम आतंकवादियों का देते आए हैं? यह कहना कि क्योंकि आतंकवादी मरने-मारने को तैयार हैं, वेअपना विवेक खो चुके हैं,उनका कोई घरबार नहीं है इसलिए उनका कत्ल नहीं किया जाना चाहिए
आतंकवादियों के सरगनाओं की इस आतंकवाद रूपी पागलपन में भी एक सोची समझी रणनीति और योजना है जिसके लिए उन्होंने निश्चित राजनीतिक उद्देश्य चुने हैं


इसलिए हमेंआतंकवादियों को कुचलने के साथ-साथ एक ऐसी रणनीति पर अमल करना है जो आतंकवादियों के उद्देश्यों को पूरी तरह से विफलकर दे


ऐसी रणनीति कैसे बनाई जा सकती है राबर्ट टरैगर और देशी सलाबा(Robert Trager and Dessislava Zagorcheva) ने शोधपत्र आतंकवाद का मुकाबला((‘DeterringTerrorism’ International Security,vol 30, No 3, Winter 2005/06, pp87-123) में आतंकवादका मुकाबला करने के लिए रणनीति बनाने के लिए समान्य सिद्धांत बताए हैं

सामरिक योजना अगर मुसलिम समाज आतंकवादियों के इन उद्देश्यों को गैर इस्लामिक घोषित कर इनकी निंदा और विरोध नहीं करता है तो इन सिद्धांतों का उपयोग कर मैं इस्लामिक आतंकवादियों के राजनैतिक उदेश्यों को असफल करने के लिए निम्नलिखित सामरिक नीतिका समर्थनकरता हूं


षडयन्त्र-1 :-कशमीर पर भारत को आतंकित करना
रणनीति-1:- धारा 370 समाप्त कर, भूतपूर्व सैनिकों को कशमीर घाटी में बसाना कशमीरी हिन्दूओं के लिए पुनन कशमीर का निर्माण करना,बलूचियों और सिंधियों को आजादी के लिए सहायता देना


षडयन्त्र-2:- हमारे मन्दिरों में बम धमाके कर भक्तों का कत्ल करना
रणनिति-2:- जैसे को तैसा नीति अपनाते हुए काशी विश्वानाथ मन्दिर परिसर सहित 300 अन्य जगहों से मसजिदों को हटाना
षडयन्त्र :-3 भारत को दारूल इस्लाम बनाना
रणनिति-3:- भारत में एक समान नागरिक संहिता लागू करना,पढ़ाई के लिए संस्कृत को अनिवार्या बनाना,वन्देमातरम् का गान जरूरी करना और भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर सिर्फ उन्हीं गैर हिन्दूओं को बोट का अधिकार देना जो गर्व से ये स्वीकार करें कि उनके पूर्बज हिन्दू हैं


भारत का हिन्दूस्तान (हिन्दूओं और उन गैर हिन्दूओं का देश जिनके पूर्बज हिन्दू हैं ) के रूप में पुन : नामकरण करना


षडयन्त्र-4 अवैध आप्रवास, धर्मांतरण, और परिवार नियोजन को अपनाने से इनकार द्वारा भारत की जनसांख्यिकी बदलें.

रणनिति-4:- देश में एक ऐसा राष्ट्रीय नियम लागू करें जिसके अनुसार हिन्दू धर्म से किसी भी अन्य धर्म में धर्मांतरण करना बर्जित हो
किसी भी अन्य धर्म से हिन्दू धर्म में घर वापसी इसमें प्रतिबन्धित नहीं होनी चाहिए


गैर हिन्दूओं द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी जाति में घर वापसी करने का स्वागत करें बशर्ते वे अनशासन का पालन करने को तैयार हों
भारत में रहने वाले अबैध वंगलादेशियों की शंख्या के अनुशार बंगलादेश की जमीन पर कब्जा कर लिया जाए


आज की संख्या के अनुसार सिलहट से खुलना तक के उतर का एक-तिहाई भारत को अबैध रूप से भारत में रह रहे बंगलादेशियों को बसाने के लिए अपने कब्जे में ले लेना चाहिए


षडयन्त्र-5 हिन्दूओं के अन्दर आत्मगलानी का बोध पैदा करने व उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने के मकसद से मस्जिदों,मदरसों और चर्चों में अश्लील लेखन और उपदेश के माध्यम से हिंदू धर्म को बदनाम करना

रणनिति-5:- हिन्दू मानसिकता के विकाश का प्रचार-प्रसार करें( मेरी नईपुस्तक ‘हिंदुत्व और राष्ट्रीय पुनर्जागरण’ Haranand, 2010 देखें
) समाधान का समय भारत इस तरहकी रणनीति अपनाकर सिर्फपांच बर्षो में अपनी आतंकवादकी समस्या का समाधाननिकाल सकता है परन्तु इसकेलिए हमें आतंकवाद द्वारा सिखाए गए उपरलिखितचार सबक हर समय याद रखनेहोंगे और राष्ट्र की रक्षा केलिए साहसिक,जोखिम भरे वकठोर कदम उठाने के लिए हिन्दूमानसिकता का निर्माण करना होगा
यदि यहूदियों को गैस चैंबरों मेंजलाए जाने के लिए मिमयाते हुएजाने वाले मेमनों से ज्वलंत शेर मेंसिर्फ 10 वर्ष मेंबदला जा सकता है तो हिन्दूओं के लिए तो उनसे कहीं वेहतरहालात (आज भी हम भारतका 83 प्रतिशत हैं) में ये कामसिर्फ पांच वर्ष मेंकरना किसी भी तरह से मुशकिलनहीं है
परम्पूजनीय गुरूगोविन्द सिंहजी द्वारा हमें पहलेही रास्ता दिखा दिया गया हैकि किस तरह सिर्फ पांच निडरलोग आध्यात्मिक मार्गदर्शन मेंसारे समाज को बदल सकते हैं
यहां तक कि अगर आधे हिन्दूमतदाता भी संगठित होकरहिन्दू के रूप में, इमानदारी से हिंदूएजेंडा के लिए प्रतिबद्धपार्टी को,बोट डालने के लिएप्रोतसाहित किए जा सकें तब भी हम परिवर्तन के लिए एकमजबूत आधार तैयार कर सकते हैं
और अंततः सच्चाई के इस क्षण मेंएक लोकतांत्रिक हिंदुस्तान मेंयही आतंकवाद से लड़नेकी रणनीति में निम्नतम जरूरत है

12 November 2012

'हरि अनंत, हरि कथा अनंता'

PHOTOS: इस कृष्ण मंत्र से करें पीपल पूजा..पूरी होगी हर इच्छा

हिन्दू धर्मग्रंथों में लिखा गया है कि 'हरि अनंत, हरि कथा अनंता'। इस बात के जरिए कण-कण में बसे ईश्वर के स्वरूप व शक्तियों की ही महिमा उजागर की गई है। इसी धर्म आस्था को बल देती है - पीपल पूजा। हिन्दू धर्म में पीपल को देव वृक्ष माना जाता है।

श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान कृष्ण ने पीपल को स्वयं का स्वरूप बताया है। इसे 'अश्वत्थ' कहकर पुकारा गया है। यही कारण है कि देवमूर्ति की पूजा या मंदिर न जाने की दशा में पीपल पूजा ही दरिद्रता दूर कर सुख, ऐश्वर्य व धन की कामना को पूरी करने वाली मानी गई है।

इसके लिए हर रोज या विशेष वार, तिथियों पर एक विशेष मंत्र का ध्यान कर पीपल पूजा का महत्व बताया गया है। तस्वीरों के जरिए जानिए पीपल के धार्मिक महत्व के साथ मंत्र विशेष से पीपल पूजा की सरल विधि -


जीवन अनिश्चताओं से भरा है। सुख-दु:ख का सिलसिला इस बात को साबित भी करते हैं। जीवन के इन तमाम उतार-चढ़ावों के बाद भी इंसान तन, मन या आत्म बल के बूते बुरे वक्त का सामना कर सुखों को सुनिश्चित करता है। 

हिन्दू धर्मग्रंथ भी तन, मन और आत्मा को सबल बनाने वाले ऐसे ही धार्मिक उपायों को उजागर करते हैं, जो सरल ही नहीं, बल्कि प्रकृति रूप ईश्वर के दर्शन व संगति का बेहतर जरिया भी हैं। ऐसा ही एक उपाय है - अश्वत्थ यानी पीपल के पेड़ की पूजा।

हिन्दू धर्म ग्रंथ श्रीमद्गभगवदगीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं को अश्वत्थ स्वरूप बताया है। वहीं शास्त्रों में पीपल के वृक्ष में अनेक देवताओं का वास माना गया है। इसलिए जीवन से जुड़ी तमाम परेशानियों, संकट, रोग व दरिद्रता से बचने, नवग्रह दोष शांति के लिए हर रोज देव वृक्ष पीपल की पूजा यहां बताए मंत्र से करना बहुत ही शुभ माना गया है।

- सुबह स्नान के बाद सफेद या पीले रेशमी वस्त्र पहन पवित्र स्थान या देवालय में स्थित पीपल वृक्ष की जड़ में गाय के दूध व पवित्र गंगाजल में गुलाब के फूल, तिल, चंदन मिलाकर अर्पित करते हुए नीचे लिखा मंत्र संकटनाश व समृद्धि की कामना से बोलें -


आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं शरणं गत:।

देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।

अश्वत्थ ह्युतझुग्वास गोविन्दस्य सदाप्रिय।

अशेषं हर मे पापं वृक्षराज नमोस्तुते।

- जल अर्पण व मंत्र स्तुति के बाद कोई भी मिठाई या मीठा नैवेद्य चढ़ाकर इष्ट या शिव, विष्णु की आरती करें।

याद रखिये आपके पास जो सबसे कीमती चीज है, वो है आपका जीवन


एक जाने-माने स्पीकर ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सेमीनार शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए.

फिर उसने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें से किसी एक को दूंगा पर उससे पहले मुझे ये कर लेने दीजिये .” और उसने नोट को अपनी मुट्ठी में चिमोड़ना शुरू कर दिया. और फिर उसने पूछा,” कौन है जो अब भी यह नोट लेना चाहता है?” अभी भी लोगों के हाथ उठने शुरू हो गए.

“अच्छा” उसने कहा,” अगर मैं ये कर दूं ? “ और उसने नोट को नीचे गिराकर पैरों से कुचलना शुरू कर दिया. उसने नोट उठाई , वह बिल्कुल चिमुड़ी और गन्दी हो गयी थी.


“ क्या अभी भी कोई है जो इसे लेना चाहता है?”. और एक बार फिर हाथ उठने शुरू हो गए.

“ दोस्तों , आप लोगों ने आज एक बहुत महत्त्वपूर्ण पाठ सीखा है. मैंने इस नोट के साथ इतना कुछ किया पर फिर भी आप इसे लेना चाहते थे क्योंकि ये सब होने के बावजूद नोट की कीमत घटी नहीं,उसका मूल्य अभी भी 500 था.

जीवन में कई बार हम गिरते हैं, हारते हैं, हमारे लिए हुए निर्णय हमें मिटटी में मिला देते हैं. हमें ऐसा लगने लगता है कि हमारी कोई कीमत नहीं है. लेकिन आपके साथ चाहे जो हुआ हो या भविष्य में जो हो जाए , आपका मूल्य कम नहीं होता. आप स्पेशल हैं, इस बात को कभी मत भूलिए.

कभी भी बीते हुए कल की निराशा को आने वाले कल के सपनो को बर्बाद मत करने दीजिये. याद रखिये आपके पास जो सबसे कीमती चीज है, वो है आपका जीवन.”

मंगलवार और शनिवार के लिए हनुमानजी का 1 चमत्कारी उपाय


आज के समय में हनुमानजी की भक्ति सबसे जल्दी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली मानी गई है। जानिए मंगलवार और शनिवार के लिए हनुमानजी का 1 चमत्कारी उपाय............

हनुमानजी को माता सीता ने अमरता का वरदान दिया है। श्रीराम के अनन्य सेवक बजरंग बली अपने भक्तों को सभी सुख प्रदान करते हैं। वे बल, बुद्धि और विद्या के दाता माने गए हैं। 


बल, बुद्धि और विद्या के बल पर ही कोई भी इंसान धन-दौलत प्राप्त कर सकता है। यदि कि सी व्यक्ति के जीवन में धन से जुड़ी समस्याएं चल रही हैं तो उसे हनुमानजी को पूजने से जल्द ही शुभ फल प्राप्त होते हैं।


हर मंगलवार और शनिवार को किसी भी हनुमान मंदिर में 11 काले उड़द के दाने, सिंदूर, चमेली का तेल, फूल, प्रसाद अर्पित करें।साथ ही सुंदरकांड का पाठ करें या समय अभाव हो तो हनुमान चालिसा का पाठ करें। मंगलवार को शनिवार को हनुमानजी का विधिवत पूजन करने से सभी प्रकार के कष्ट और क्लेश नष्ट हो जाते हैं।


इसके साथ ही कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव भी दूर हो जाते हैं। इस उपाय को अपनाने से कुछ ही दिनों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे।

ध्यान रखें पवित्रता का पूरा ध्यान रखें। किसी भी प्रकार के अधार्मिक कर्मों से दूर रहें। किसी भी स्थिति में घर के बड़े-बुजूर्गों सहित अन्य वृद्धजनों का सम्मान करें, उनका दिल ना दुखाए।


11 November 2012

ॐ - मेरी रक्षा करो बजरंगबली - ॐ


मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |
मेरी दुःख के भंवर में नाव चली, 
मुझे सूझे किनारा ना कोई ,
मुझे सूझे सहारा ना कोई,
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |


जब हो गए मुर्छित लछमन जी, तुम ही तो संजीवनी लाये थे,

तोड़ी थी भुजा अहिरावन की, तुम काम राम के आये थे,
मुझपर भी संकट छाया है मेरे दिल ने तुम्हे बुलाया है.
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |

सुध लेने गए सिया माता की, सोने की लंका जला डाली,
हे महाबली तेरी शक्ती ने रावन की जड़े हिला डाली,
मेरा दुखों से मन हारा है, मैंने रो के तुम्हे पुकारा है.
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |

तेरी दिव्य अलौकिक शक्ति का, कपि डंका चारो ओर बजे,
उसे भूत पिशाच न तंग करे जो मन से तेरा नाम जपे,
तुम भय भंजन सुखदायक हो, निर्दोष के सदा सहायक हो,
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |

मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |
मेरी दुःख के भंवर में नाव चली,
मुझे सूझे किनारा ना कोई ,
मुझे सूझे सहारा ना कोई,
मेरी रक्षा करो बजरंगबली मेरी रक्षा करो बजरंगबली |


!!! चमत्कारी सौंफ !!!



सौंफ प्रतिदिन घर में प्रयुक्त किए जाने वाले मसालों में से एक है। इसका नियमित उपयोग सेहत के लिए लाभदायक है।

* सौंफ और मिश्री समान भाग लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लें। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है तथा नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है।


* सौंफ का अर्क दस ग्राम शहद मिलाकर लें। खाँसी में तत्काल आराम मिलेगा।

* बेल का गूदा 10 ग्राम और 5 ग्राम सौंफ सुबह-शाम चबाकर खाने से अजीर्ण मिटता है और अतिसार में लाभ होता है।

* यदि आपको पेटदर्द होता है, तो भुनी हुई सौंफ चबाइए, तुरंत आराम मिलेगा। सौंफ की ठंडाई बनाकर पीजिए, इससे गर्मी शांत होगी और जी मिचलाना बंद हो जाएगा।

* हाथ-पाँव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर मिश्री मिलाकर खाना खाने के पश्चात 5-6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।

* सौंफ रक्त को साफ करने वाली एवं चर्मरोग नाशक है।



अतिबला (खरैटी) Country Mallow से उपचार



विभिन्न भाषाओं में नाम :

संस्कृत वला, वाट्यालिका, वाट्या, वाट्यालक

हिंदी खरैटी, वरयारी, वरियार
बंगाली श्वेतवेडेला
मराठी लघुचिकणा, खिरहंटी
गुजराती खपाट बलदाना
तेलगू मुपिढी
लैटिन सिडकार्सि फोलिया
अंग्रेजी हॉर्नडिएमव्ड सिडा


गुण : चारों प्रकार की अतिबला शीतल, मधुर, बलकारक तथा चेहरे पर चमक लाने वाली, चिकनी, भारी (ग्राही), खून की खराबी तथा टी.बी. के रोगों को दूर करने में सहायक है।

विभिन्न रोगों में अतिबला (खरैटी) से उपचार:


1 पेशाब का बार-बार आना : : - 

खरैटी की जड़ की छाल का चूर्ण यदि चीनी के साथ सेवन करें तो पेशाब के बार-बार आने की बीमारी से छुटकारा मिलता है।

2 प्रमेह (वीर्य प्रमेह) :: - 


अतिबला के बारीक चूर्ण को यदि दूध और मिश्री के साथ सेवन किया जाए तो यह प्रमेह को नष्ट करती है। महावला मूत्रकृच्छू को नष्ट करती है।

3 गीली खांसी :: - 


अतिबला, कंटकारी, बृहती, वासा (अड़ूसा) के पत्ते और अंगूर को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लेते हैं। इसे 14 से 28 मिलीमीटर की मात्रा में 5 ग्राम शर्करा के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से गीली खांसी ठीक हो जाती है।

4 सीने में घाव (उर:क्षत) :: - 


बलामूल का चूर्ण, अश्वगंधा, शतावरी, पुनर्नवा और गंभारी का फल समान मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार लेते हैं। इसे 1 से 3 ग्राम की मात्रा में 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से उर:क्षत नष्ट हो जाता है।

5 मलाशय का गिरना :: - 


अतिबला (खिरेंटी) की पत्तियों को एरंडी के तेल में भूनकर मलाशय पर रखकर पट्टी बांध दें।

6 बांझपन दूर करना :: - 


अतिबला के साथ नागकेसर को पीसकर ऋतुस्नान (मासिक-धर्म) के बाद, दूध के साथ सेवन करने से लम्बी आयु वाला (दीर्घजीवी) पुत्र उत्पन्न होता है।

7 मसूढ़ों की सूजन :: - 


अतिबला (कंघी) के पत्तों का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन 3 से 4 बार कुल्ला करें। रोजाना प्रयोग करने से मसूढ़ों की सूजन व मसूढ़ों का ढीलापन खत्म होता है।

8 नपुंसकता (नामर्दी) :: - 


अतिबला के बीज 4 से 8 ग्राम सुबह-शाम मिश्री मिले गर्म दूध के साथ खाने से नामर्दी में पूरा लाभ होता है।

9 दस्त :: - 


अतिबला (कंघी) के पत्तों को देशी घी में मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पित्त के उत्पन्न दस्त में लाभ होता है।

10 पेशाब के साथ खून आना :: - 


अतिबला की जड़ का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से पेशाब में खून का आना बंद हो जाता है।

11 बवासीर :: - 


अतिबला (कंघी) के पत्तों को पानी में उबालकर उसे अच्छी तरह से मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में उचित मात्रा में ताड़ का गुड़ मिलाकर पीयें। इससे बवासीर में लाभ होता है।

12 रक्तप्रदर :: - 


*खिरैंटी और कुशा की जड़ के चूर्ण को चावलों के साथ पीने से रक्तप्रदर में फायदा होता है।

*खिरेंटी के जड़ का मिश्रण (कल्क) बनाकर उसे दूध में डालकर गर्म करके पीने से रक्त प्रदर में लाभ होता है।

*रक्तप्रदर में अतिबला (कंघी) की जड़ का चूर्ण 6 ग्राम से 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम चीनी और शहद के साथ देने से लाभ मिलता है।

*अतिबला की जड़ का चूर्ण 1-3 ग्राम, 100-250 मिलीलीटर दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से रक्तप्रदर में लाभ मिलता है।"

13 श्वेतप्रदर : : - 

*अतिबला की जड़ को पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ 3 ग्राम की मात्रा में दूध में मिलाकर सेवन करने से श्वेतप्रदर में लाभ प्राप्त होता है।

*खिरैटी की जड़ की राख दूध के साथ देने से प्रदर में आराम मिलता है।"

14 दर्द व सूजन में :: - दर्द भरे स्थानों पर अतिबला से सेंकना फायदेमंद होता है।

15 पित्त ज्वर :: - खिरेटी की जड़ का शर्बत बनाकर पीने से बुखार की गर्मी और घबराहट दूर हो जाती है।

16 रुका हुआ मासिक-धर्म :: - खिरैटी, चीनी, मुलहठी, बड़ के अंकुर, नागकेसर, पीले फूल की कटेरी की जड़ की छाल इनको दूध में पीसकर घी और शहद मिलाकर कम से कम 15 दिनों तक लगातार पिलाना चाहिए। इससे मासिकस्राव (रजोदर्शन) आने लगता है।

17 पेट में दर्द होने पर :: - खिरैंटी, पृश्नपर्णी, कटेरी, लाख और सोंठ को मिलाकर दूध के साथ पीने से `पित्तोदर´ यानी पित्त के कारण होने वाले पेट के दर्द में लाभ होगा।

18 मूत्ररोग :: - 


*अतिबला के पत्तों या जड़ का काढ़ा लेने से मूत्रकृच्छ (सुजाक) रोग दूर होता है। सुबह-शाम 40 मिलीलीटर लें। इसके बीज अगर 4 से 8 ग्राम रोज लें तो लाभ होता है।

*खिरैटी के पत्ते घोटकर छान लें, इसमें मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है।

*खिरैटी के बीजों के चूर्ण में मिश्री मिलाकर दूध के साथ लेने से मूत्रकृच्छ मिट जाती है।"

19 फोड़ा (सिर का फोड़ा) : : - अतिबला या कंघी के फूलों और पत्तों का लेप फोड़ों पर करने से लाभ मिलता है।

20 शरीर को शक्तिशाली बनाना : : - 


*शरीर में कम ताकत होने पर खिरैंटी के बीजों को पकाकर खाने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।

*खिरैंटी की जड़ की छाल को पीसकर दूध में उबालें। इसमें घी मिलाकर पीने से शरीर में शक्ति का विकास होता है।"


हनुमान चलिषा चमत्कार



मेरे पास कई लोग आते हें और कहते हें की में दिन में ७ हनुमान चलिषा करता हू, कई लोग कहते हें में हर शनिवार और मंगलवार को २७ या १०८ बार हनुमान चलिषा करता हू परन्तु उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता तो मेने उनसे पूछा की आप किस प्रकार हनुमान चलिषा करते हें, तो उन्हों ने बताया की बस हम सिर्फ हनुमानजी के आगे दिया और धुप जला कर बैठ जाते हें और ज्यादा से ज्यादा आक के फूलो की माला चढाते हें और बाद में निश्चित संख्या में हनुमान चलिषा करते हें 

 फिर मेने उन लोगो से कहा आपने शायद रामायण या सुन्दरकाण्ड में पढ़ा होगा की हनुमानजी बचपन में बहोत शरारत करते थे तो ऋषि मुनियो ने उन्हें श्राप दिया था की जब तक आपको आपकी शक्तिओ को कोई (जागृत ) याद नहीं करवाएगा तब तक आप अपनी शक्ति का उपयोग नहीं कर पाएंगे – यही वजह से जब समुद्र को लांग कर श्री रामजी की मुद्रिका ले कर माँ सीता के पास जाना था तब ...कोई जायेगा ये सवाल था – तब श्री जामवंत जी ( रींछ पति ) ने श्री हनुमानजी की स्तुति कर उन्हें अपनी शक्तिया राम काज के लिए याद करवाई थी – ठीक उसी प्रकार हमें हमारे काज के लिए श्री हनुमाजी को स्तुति कर प्रसन्न कर उनकी शक्तिया याद करवानी चाहिए – तब जाके वो आपकी पूजा अवश्य स्वीकार करेंगे – तो आपको भी हनुमान चलिषा करने से या हनुमानजी का कोई भी पूजन करने से पहले निन्म मंत्र स्तुति में दे रहा हू वो आपको कम से कम २७ बार अवश्य करनी हें – देखे फिर चमत्कारिक फल की प्राप्ति अवश्य होगी 

( ध्यान रहे गलत कर्मो के लिए हनुमानजी किसी को सहाय नहीं करते )  

हरी ओम तत्सत ... 

स्तुति मन्त्र : 

|| कहइ रीछपति सुनु हनुमाना काचुप साधी रहेहु बलवाना पवन तनय बल पवन समना बुद्धि बिबेक बिज्ञान निधाना, कवन सो काज कठिन जग माहि जो नहीं होय तात तुम पाहि ||

!!! आयुर्वेदिक दोहे !!!


1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय। दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।

2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल। मुँह में छाले हों अगर,दूर होंयतत्काल।।

3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम। खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।

4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम। सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।

5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय। बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ जाय।।

6.गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार। सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।।

7.खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय। दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।।

8.रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल। खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।

9.भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय। चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।।

10.मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम। तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।।

11.दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय। पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।।

12.आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय। पथरी से आराम हो, रोगी 
प्रतिदिन खाय।।

13.सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम। दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।

14.एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ। चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।

15.खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम। लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।

16.बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय। गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।

17.लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय। इसको नियमित खाय 
तो,पथरी बाहर आय।।

18.दामिड़(अनार) छिलका सुखाकर,पीसे चूर बनाय। सुबह-शाम जल डाल कम, पी मुँह बदबू जाय।।

19. चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय। बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि लगाय।।

20. गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय। तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट जाय।।

21. अदरक रस मधु(शहद) भाग सम, करें अगर उपयोग। दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी रोग।।

22. ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम। पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का आराम।।

23.बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय। मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।

24.रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव। जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।

25.नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम। गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से आराम।।

26.दो-दो चम्मच शहद औ, रस ले नीम का पात। रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो प्रात।।

27.मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम। पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई हकीम।।

28.हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय, पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥

29.सावन में गुड खावै, सो मौहर बराबर पावै॥


09 November 2012

अदरक




सामान्य परिचय : भोजन को स्वादिष्ट व पाचन युक्त बनाने के लिए अदरक का उपयोग आमतौर पर हर घर में किया जाता है। वैसे तो यह सभी प्रदेशों में पैदा होती है, लेकिन अधिकांश उत्पादन केरल राज्य में किया जाता है। 

भूमि के अंदर उगने वाला कन्द आर्द्र अवस्था में अदरक, व सूखी अवस्था में सोंठ कहलाता है। 

गीली मिट्टी में दबाकर रखने से यह काफी समय तक ताजा बना रहता है। इसका कन्द हल्का पीलापन लिए, बहुखंडी और सुगंधित होता है।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

संस्कृत आद्रक, आर्द्रशाक।
हिंदी अदरक, आदी, सौंठ।
मराठी आलें।
गुजराती आदु।
बंगाली आदा, सूंठ।
तेलगू सल्लम, शोंठि।
द्राविड़ी हमिशोठ।
अंग्रेजी जिंजर रूट
लैटिन जिंजिबर आफिशिनेल।


गुण :


अदरक में अनेक औषधीय गुण होने के कारण आयुर्वेद में इसे महा औषधि माना गया है। यह गर्म, तीक्ष्ण, भारी, पाक में मधुर, भूख बढ़ाने वाला, पाचक, चरपरा, रुचिकारक, त्रिदोष मुक्त यानी वात, पित्त और कफ नाशक होता है।

वैज्ञानिकों के मतानुसार अदरक की रसायनिक संरचना में 80 प्रतिशत भाग जल होता है, जबकि सोंठ में इसकी मात्रा लगभग 10 प्रतिशत होती है। इसके अलावा स्टार्च 53 प्रतिशत, प्रोटीन 12.4 प्रतिशत, रेशा (फाइबर) 7.2 प्रतिशत, राख 6.6 प्रतिशत, तात्विक तेल (इसेन्शियल ऑइल) 1.8 प्रतिशत तथा औथियोरेजिन मुख्य रूप में पाए जाते हैं।

सोंठ में प्रोटीन, नाइट्रोजन, अमीनो एसिड्स, स्टार्च, ग्लूकोज, सुक्रोस, फ्रूक्टोस, सुगंधित तेल, ओलियोरेसिन, जिंजीवरीन, रैफीनीस, कैल्शियम, विटामिन `बी` और `सी`, प्रोटिथीलिट एन्जाइम्स और लोहा भी मिलते हैं। प्रोटिथीलिट एन्जाइम के कारण ही सोंठ कफ हटाने व पाचन संस्थान में 
विशेष गुणकारी सिद्ध हुई है।

अदरक तत्व मात्रा


प्रोटीन 2.30%

वसा 0.90%

जल 80.90%

सूत्र 2.40%
कार्बोहाइड्रेट 12.30%
खनिज 1.20%


कैल्शियम लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100
फास्फोरस लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /00
लौह लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /00

सोंठ
जल 9% ,प्रोटीन 15.40%,सूत्र 6.20%, स्टार्च 5.30%, कुल भस्म 6.60%,
उडनशील तेल 2%

बाहरी स्वरूप : यह उर्वरा और रेत मिश्रित मिट्टी में पैदा होने वाला गुल्म जाति की वनस्पति का कन्द है, इसके पत्ते बांस के पत्तों से मिलते-जुलते तथा एक या डेढ़ फीट ऊंचे लगते हैं।

हानिकारक प्रभाव : अदरक की प्रकृति गर्म होने के कारण जिन व्यक्तियों को ग्रीष्म ऋतु में गर्म प्रकृति का भोजन न पचता हो, कुष्ठ, पीलिया, रक्तपित्त, घाव, ज्वर, शरीर से रक्तस्राव की स्थिति, मूत्रकृच्छ, जलन जैसी बीमारियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। खून की उल्टी होने पर और गर्मी के मौसम में अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए और यदि आवश्यकता हो तो कम से कम मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।

मात्रा :अदरक 5 से 10 ग्राम, सोंठ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम, रस 5 से 10 से मिलीलीटर, रस और शर्बत 10 से 30 मिलीलीटर।

विभिन्न रोगों में अदरक से उपचार:

1 हिचकी :- 


*सभी प्रकार की हिचकियों में अदरक की साफ की हुई छोटी डली चूसनी चाहिए।

*अदरक के बारीक टुकड़े को चूसने से हिचकी जल्द बंद हो जाती है। घी या पानी में सेंधानमक पीसकर मिलाकर सूंघने से हिचकी बंद हो जाती है।

*एक चम्मच अदरक का रस लेकर गाय के 250 मिलीलीटर ताजे दूध में मिलाकर पीने से हिचकी में फायदा होता है।

*एक कप दूध को उबालकर उसमें आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण डाल दें और 
ठंडा करके पिलाएं।

*ताजे अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके चूसने से पुरानी एवं नई तथा लगातार उठने वाली हिचकियां बंद हो जाती हैं। समस्त प्रकार की असाध्य हिचकियां दूर करने का यह एक प्राकृतिक उपाय है।"

2 पेट दर्द :- 


*अदरक और लहसुन को बराबर की मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में पानी से सेवन कराएं।

*पिसी हुई सोंठ एक ग्राम और जरा-सी हींग और सेंधानमक की फंकी गर्म पानी से लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है। एक चम्मच पिसी हुई सोंठ और सेंधानमक एक गिलास पानी में गर्म करके पीने से पेट दर्द, कब्ज, अपच ठीक हो जाते हैं।

*अदरक और पुदीना का रस आधा-आधा तोला लेकर उसमें एक ग्राम सेंधानमक डालकर पीने से पेट दर्द में तुरन्त लाभ होता है।

*अदरक का रस और तुलसी के पत्ते का रस 2-2 चम्मच थोड़े से गर्म पानी के साथ पिलाने से पेट का दर्द शांत हो जाता है।

*एक कप गर्म पानी में थोड़ा अजवायन डालकर 2 चम्मच अदरक का रस डालकर पीने से लाभ होता है।

*अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर उस पर कालीमिर्च का पिसा हुआ चूर्ण डालकर चाटने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।

*अदरक का रस 5 मिलीलीटर, नींबू का रस 5 मिलीलीटर, कालीमिर्च का चूर्ण 1 ग्राम को मिलाकर पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।"

3 मुंह की दुर्गध :- एक चम्मच अदरक का रस एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुख की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।

4 दांत का दर्द:- 


*महीन पिसा हुआ सेंधानमक अदरक के रस में मिलाकर दर्द वाले दांत पर लगाएं।

*दांतों में अचानक दर्द होने पर अदरक के छोट-छोटे टुकड़े को छीलकर दर्द वाले दांत के नीचे दबाकर रखें।

*सर्दी की वजह से दांत के दर्द में अदरक के टुकड़ों को दांतों के बीच दबाने से लाभ होता है। "

5 भूख की कमी:- अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को नींबू के रस में भिगोकर इसमें सेंधानमक मिला लें, इसे भोजन करने से पहले नियमित रूप से खिलाएं।

6 सर्दी-जुकाम:- पानी में गुड़, अदरक, नींबू का रस, अजवाइन, हल्दी को बराबर की मात्रा में डालकर उबालें और फिर इसे छानकर पिलाएं।

7 गला खराब होना:- अदरक, लौंग, हींग और नमक को मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां तैयार करें। दिन में 3-4 बार एक-एक गोली चूसें।

8 पक्षाघात (लकवा):- 


*घी में उड़द की दाल भूनकर, इसकी आधी मात्रा में गुड़ और सोंठ मिलाकर पीस लें। इसे दो चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार खिलाएं।

*उड़द की दाल पीसकर घी में सेकें फिर उसमें गुड़ और सौंठ पीसकर मिलाकर लड्डू बनाकर रख लें। एक लड्डू प्रतिदिन खाएं या सोंठ और उड़द उबालकर इनका पानी पीयें। इससे भी लकवा ठीक हो जाता है।"

9 पेट और सीने की जलन :- एक गिलास गन्ने के रस में दो चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच पुदीने का रस मिलाकर पिलाएं।

10 वात और कमर के दर्द:- अदरक का रस नारियल के तेल में मिलाकर मालिश करें और सोंठ को देशी घी में मिलाकर खिलाएं।

11 पसली का दर्द :- 30 ग्राम सोंठ को आधा किलो पानी में उबालकर और छानकर 4 बार पीने से पसली का दर्द खत्म हो जाता है।

12 चोट लगना, कुचल जाना:- चोट लगने, भारी चीज उठाने या कुचल जाने से पीड़ित स्थान पर अदरक को पीसकर गर्म करके आधा इंच मोटा लेप करके पट्टी बॉंध दें। दो घण्टे के बाद पट्टी हटाकर ऊपर सरसो का तेल लगाकर सेंक करें। यह प्रयोग प्रतिदिन एक बार करने से दर्द शीघ्र ही दूर हो जाता है।

13 संग्रहणी (खूनी दस्त) :- सोंठ, नागरमोथा, अतीस, गिलोय, इन्हें समभाग लेकर पानी के साथ काढ़ा बनाए। इस काढे़ को सुबह-शाम पीने से राहत मिलती है।

14 ग्रहणी (दस्त) :- गिलोय, अतीस, सोंठ नागरमोथा का काढ़ा बनाकर 20 से 25 मिलीलीटर दिन में दो बार दें।

15 भूखवर्द्धक :- 


*दो ग्राम सोंठ का चूर्ण घी के साथ अथवा केवल सोंठ का चूर्ण गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-सुबह खाने से भूख बढ़ती है।

*प्रतिदिन भोजन से पहले नमक और अदरक की चटनी खाने से जीभ और गले की शुद्धि होती है तथा भूख बढ़ती है।

*अदरक का अचार खाने से भूख बढ़ती है।

*सोंठ और पित्तपापड़ा का पाक (काढ़ा) बुखार में राहत देने वाला और भूख बढ़ाने वाला है। इसे पांच से दस ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करें।

*सोंठ, चिरायता, नागरमोथा, गिलोय का काढ़ा बनाकर सेवन करने से भूख बढ़ती है और बुखार में भी लाभदायक है।"

16 अजीर्ण :- 


*यदि प्रात:काल अजीर्ण (रात्रि का भोजन न पचने) की शंका हो तो हरड़, सोंठ तथा सेंधानमक का चूर्ण जल के साथ लें। दोपहर या शाम को थोड़ा भोजन करें।

*अजवायन, सेंधानमक, हरड़, सोंठ इनके चूर्णों को एक समान मात्रा में एकत्रित करें। एक-एक चम्मच प्रतिदिन सेवन करें।

*अदरक के 10-20 मिलीलीटर रस में समभाग नींबू का रस मिलाकर पिलाने से मंदाग्नि दूर होती है।"

17 उदर (पेट के) रोग :- सोंठ, हरीतकी, बहेड़ा, आंवला इनको समभाग लेकर कल्क बना लें। गाय का घी तथा तिल का तेल ढाई किलोग्राम, दही का पानी ढाई किलोग्राम, इन सबको मिलाकर विधिपूर्वक घी का पाक करें, तैयार हो जाने पर छानकर रख लें। इस घी का सेवन 10 से 20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम करने से सभी प्रकार के पेट के रोगों का नाश होता है।

18 बहुमूत्र :- अरदक के दो चम्मच रस में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।

19 बवासीर के कारण होने वाला दर्द :- दुर्लभा और पाठा, बेल का गूदा और पाठा, अजवाइन व पाठा अथवा सौंठ और पाठा इनमें से किसी एक योग का सेवन करने से बवासीर के कारण होने वाले दर्द में राहत मिलती है।

20 मूत्रकृच्छ (पेशाब करते समय परेशानी) :- 


*सोंठ, कटेली की जड़, बला मूल, गोखरू इन सबको दो-दो ग्राम मात्रा तथा 10 ग्राम गुड़ को 250 मिलीलीटर दूध में उबालकर सुबह-शाम पीने से मल-मूत्र के समय होने वाला दर्द ठीक होता है।

*सोंठ पीसकर छानकर दूध में मिश्री मिलाकर पिलाएं।"

21 अंडकोषवृद्धि :- इसके 10-20 मिलीलीटर रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से वातज अंडकोष की वृद्धि मिटती है।

22 कामला (पीलिया) :- अदरक, त्रिफला और गुड़ के मिश्रण का सेवन करने से लाभ होता है।

23 अतिसार (दस्त):- 


*सोंठ, खस, बेल की गिरी, मोथा, धनिया, मोचरस तथा नेत्रबाला का काढ़ा दस्तनाशक तथा पित्त-कफ ज्वर नाशक है।

*धनिया 10 ग्राम, सोंठ 10 ग्राम इनका विधिवत काढ़ा बनाकर रोगी को सुबह-शाम सेवन कराने से दस्त में काफी राहत मिलती है।"

24 वातरक्त :- अंशुमती के काढ़ा में 640 मिलीलीटर दूध को पकाकर उसमें 80 ग्राम मिश्री मिलाकर पीने के लिए दें। उसी प्रकार पिप्पली और सौंठ का काढ़ा तैयार करके 20 मिलीलीटर प्रात:-शाम वातरक्त के रोगी को पीने के लिए दें।

25 वातशूल :- सोंठ तथा एरंड के जड़ के काढे़ में हींग और सौवर्चल नमक मिलाकर पीने से वात शूल नष्ट होता है।

26 सूजन :- 

*सोंठ, पिप्पली, जमालगोटा की जड़, चित्रकमूल, बायविडिंग इन सभी को समान भाग लें और दूनी मात्रा में हरीतकी चूर्ण लेकर इस चूर्ण का सेवन तीन से छ: ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ सुबह करें।

*सोंठ, पिप्पली, पान, गजपिप्पली, छोटी कटेरी, चित्रकमूल, पिप्पलामूल, हल्दी, जीरा, मोथा इन सभी द्रव्यों को समभाग लेकर इनके कपडे़ से छानकर चूर्ण को मिलाकर रख लें, इस चूर्ण को दो ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से त्रिदोष के कारण उत्पन्न सूजन तथा पुरानी सूजन नष्ट होती है।

*अदरक के 10 से 20 मिलीलीटर रस में गुड़ मिलाकर सुबह-सुबह पी लें। इससे सभी प्रकार की सूजन जल्दी ही खत्म हो जाती है।"

27 शूल (दर्द) :- सोंठ के काढ़े के साथ कालानमक, हींग तथा सोंठ के मिश्रित चूर्ण का सेवन करने से कफवातज हृदयशूल, पीठ का दर्द, कमर का दर्द, जलोदर, तथा विसूचिका आदि रोग नष्ट होते हैं। यदि मल बंद होता है तो इसके चूर्ण को जौ के साथ पीना चाहिए।

28 संधिपीड़ा (जोड़ों का दर्द) :- 

*अदरक के एक किलोग्राम रस में 500 मिलीलीटर तिल का तेल डालकर आग पर पकाना चाहिए, जब रस जलकर तेल मात्र रह जाये, तब उतारकर छान लेना चाहिए। इस तेल की शरीर पर मालिश करने से जोड़ों की पीड़ा मिटती है।

*अदरक के रस को गुनगुना गर्म करके इससे मालिश करें।"29 बुखार में बार-बार प्यास लगना :- सोंठ, पित्तपापड़ा, नागरमोथा, खस लाल चंदन, सुगन्ध बेला इन सबको समभाग लेकर बनाये गये काढ़े को थोड़ा-थोड़ा पीने से बुखार तथा प्यास शांत होती है। यह उस रोगी को देना चाहिए जिसे बुखार में बार-बार प्यास लगती है।

30 कुष्ठ (कोढ़) :- सोंठ, मदार की पत्ती, अडूसा की पत्ती, निशोथ, बड़ी इलायची, कुन्दरू इन सबका समान-समान मात्रा में बने चूर्ण को पलाश के क्षार और गोमूत्र में घोलकर बने लेप को लगाकर धूप में तब तक बैठे जब तक वह सूख न जाए, इससे मण्डल कुष्ठ फूट जाता है और उसके घाव शीघ्र ही भर जाते हैं।

31 बुखार में जलन :- सोंठ, गन्धबाला, पित्तपापड़ा खस, मोथा, लाल चंदन इनका काढ़ा ठंडा करके सेवन करने से प्यास के साथ उल्टी, पित्तज्वर तथा जलन आदि ठीक हो जाती है।

32 हैजा :- अदरक का 10 ग्राम, आक की जड़ 10 ग्राम, इन दोनों को खरल (कूटकर) इसकी कालीमिर्च के बराबर गोली बना लें। इन गोलियों को गुनगुने पानी के साथ देने से हैजे में लाभ पहुंचता है इसी प्रकार अदरक का रस व तुलसी का रस समान भाग लेकर उसमें थोड़ी सी शहद अथवा थोड़ी सा मोर के पंख की भस्म मिलाने से भी हैजे में लाभ पहुंचता है।

33 इन्फ्लुएंजा :- 6 मिलीलीटर अदरक रस में, 6 ग्राम शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार सेवन करें।

34 सन्निपात ज्वर :- 


*त्रिकुटा, सेंधानमक और अदरक का रस मिलाकर कुछ दिनों तक सुबह-शाम चटायें।

*सन्निपात की दशा में जब शरीर ठंडा पड़ जाए तो इसके रस में थोड़ा लहसुन का रस मिलाकर मालिश करने से गरमाई आ जाती है।"

35 गठिया :- 10 ग्राम सोंठ 100 मिलीलीटर पानी में उबालकर ठंडा होने पर शहद या शक्कर मिलाकर सेवन करने से गठिया रोग दूर हो जाता है।

36 वात दर्द, कमर दर्द तथा जांघ और गृध्रसी दर्द :- एक चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच घी मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।

37 मासिक-धर्म का दर्द से होना (कष्टर्त्तव) :- इस कष्ट में सोंठ और पुराने गुड़ का काढ़ा बनाकर पीना लाभकारी है। ठंडे पानी और खट्टी चीजों से परहेज रखें।

38 प्रदर :- 10 ग्राम सोंठ 250 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें और शीशी में छानकर रख लें। इसे 3 सप्ताह तक पीएं।

39 हाथ-पैर सुन्न हो जाना :- सोंठ और लहसुन की एक-एक गांठ में पानी डालकर पीस लें तथा प्रभावित अंग पर इसका लेप करें। सुबह खाली पेट जरा-सी सोंठ और लहसुन की दो कली प्रतिदिन 10 दिनों तक चबाएं।

40 मसूढ़े फूलना (मसूढ़ों की सूजन) :- 


*मसूढ़े फूल जाएं तो तीन ग्राम सोंठ को दिन में एक बार पानी के साथ फांकें। इससे दांत का दर्द ठीक हो जाता है। यदि दांत में दर्द सर्दी से हो तो अदरक पर नमक डालकर पीड़ित दांतों के नीचे रखें।

*मसूढ़ों के फूल जाने पर 3 ग्राम सूखा अदरक दिन में 1 बार गर्म पानी के साथ खायें। इससे रोग में लाभ होता है।

*अदरक के रस में नमक मिलाकर रोजाना सुबह-शाम मलने से सूजन ठीक होती है।"

41 गला बैठना, श्वांस-खांसी और जुकाम :- अदरक का रस और शहद 30-30 ग्राम हल्का गर्म करके दिन में तीन बार दस दिनों तक सेवन करें। दमा-खांसी के लिए यह परमोपयोगी है। यदि गला बैठ जाए, जुकाम हो जाए तब भी यह योग लाभकारी है। दही, खटाई आदि का परहेज रखें।

42 खांसी-जुकाम :- अदरक को घी में तलकर भी ले सकते हैं। 12 ग्राम अदरक के टुकड़े करके 250 मिलीलीटर पानी में दूध और शक्कर मिलाकर चाय की भांति उबालकर पीने से खांसी और जुकाम ठीक हो जाता है। घी को गुड़ में डालकर गर्म करें। जब यह दोनों मिलकर एक रस हो जाये तो इसमें 12 ग्राम पिसी हुई सोंठ डाल दें। (यह एक मात्रा है) इसको सुबह खाने खाने के बाद प्रतिदिन सेवन करने से खांसी-जुकाम ठीक हो जाता है।

43 खांसी-जुकाम, सिरदर्द और वात ज्वर :- सोंठ तीन ग्राम, सात तुलसी के पत्ते, सात दाने कालीमिर्च 250 मिलीलीटर पानी में पकाकर, चीनी मिलाकर गमागर्म पीने से इन्फ्लुएंजा, खांसी, जुकाम और सिरदर्द दूर हो जाता है अथवा एक चम्मच सौंठ, चौथाई चम्मच सेंधानमक पीसकर चौथाई चम्मच तीन बार गर्म पानी से लें।

44 गर्दन, मांसपेशियों एवं आधे सिर का दर्द :- यदि उपरोक्त कष्ट अपच, पेट की गड़बड़ी से उत्पन्न हुए हो तो सोंठ को पीसकर उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर लुग्दी बनाकर तथा हल्का-सा गर्म करके पीड़ित स्थान पर लेप करें। इस प्रयोग से आरम्भ में हल्की-सी जलन प्रतीत होती है, बाद में शाघ्र ही ठीक हो जाएगा। यदि जुकाम से सिरदर्द हो तो सोंठ को गर्म पानी में पीसकर लेप करें। पिसी हुई सौंठ को सूंघने से छीके आकर भी सिरदर्द दूर हो जाता है।

45 गले का बैठ जाना :- अदरक में छेद करके उसमें एक चने के बराबर हींग भरकर कपड़े में लपेटकर सेंक लें। उसके बाद इसको पीसकर मटर के दाने के आकार की गोली बना लें। दिन में एक-एक करके 8 गोलियां तक चूसें अथवा अदरक का रस शहद के रस में मिलाकर चूसने से भी गले की बैठी हुई आवाज खुल जाती है। आधा चम्मच अदरक का रस प्रत्येक आधा-आधा घंटे के अन्तराल में सेवन करने से खट्टी चीजें खाने के कारण बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। अदरक के रस को कुछ समय तक गले में रोकना चाहिए, इससे गला साफ हो जाता है।

46 कफज बुखार :- 


*आधा चम्मच पिसी हुई सोंठ एक कप पानी में उबालें, जब आधा पानी शेष बचे तो मिश्री मिलाकर सेवन कराएं।

*अदरक और पुदीना का काढ़ा देने से पसीना निकलकर बुखार उतर जाता है। शीत ज्वर में भी यह प्रयोग हितकारी है। अदरक और पुदीना वायु तथा कफ प्रकृति वाले के लिए परम हितकारी है।"

47 अपच :- ताजे अदरक का रस, नींबू का रस और सेंधानमक मिलाकर भोजन से पहले और बाद में सेवन करने से अपच दूर हो जाती है। इससे भोजन पचता है, खाने में रुचि बढ़ती है और पेट में गैस से होने वाला तनाव कम होता है। कब्ज भी दूर होती है। अदरक, सेंधानमक और कालीमिर्च की चटनी भोजन से आधा घंटे पहले तीन दिन तक निरन्तर खाने से अपच नहीं रहेगा।

48 पाचन संस्थान सम्बन्धी प्रयोग :- 


*6 ग्राम अदरक बारीक काटकर थोड़ा-सा नमक लगाकर दिन में एक बार 10 दिनों तक भोजन से पूर्व खाएं। इस योग के प्रयोग से हाजमा ठीक होगा, भूख लगेगी, पेट की गैस कब्ज दूर होगी। मुंह का स्वाद ठीक होगा, भूख बढे़गी और गले और जीभ में चिपका बलगम साफ होगा।

*सोंठ, हींग और कालानमक इन तीनों का चूर्ण गैस बाहर निकालता है। सोंठ, अजवाइन पीसकर नींबू के रस में गीला कर लें तथा इसे छाया में सुखाकर नमक मिला लें। इस चूर्ण को सुबह-शाम पानी से एक ग्राम की मात्रा में खाएं। इससे पाचन-विकार, वायु पीड़ा और खट्टी डकारों आदि की परेशानियां दूर हो जाती हैं।

*यदि पेट फूलता हो, बदहजमी हो तो अदरक के टुकड़े देशी घी में सेंक करके स्वादानुसार नमक डालकर दो बार प्रतिदिन खाएं। इस प्रयोग से पेट के समस्त सामान्य रोग ठीक हो जाते हैं।

*अदरक के एक लीटर रस में 100 ग्राम चीनी मिलाकर पकाएं। जब मिश्रण कुछ गाढ़ा हो जाए तो उसमें लौंग का चूर्ण पांच ग्राम और छोटी इलायची का चूर्ण पांच ग्राम मिलाकर शीशे के बर्तन में भरकर रखें। एक चम्मच उबले दूध या जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पाचन संबधी सभी परेशानी ठीक होती है।"

49 कर्णनाद :- एक चम्मच सोंठ और एक चम्मच घी तथा 25 ग्राम गुड़ मिलाकर गर्म करके खाने से लाभ होता है।

50 आंव (कच्चा अनपचा अन्न) :- आंव अर्थात् कच्चा अनपचा अन्न। जब यह लम्बे समय तक पेट में रहता है तो अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। सम्पूर्ण पाचनसंस्थान ही बिगड़ जाता है। पेट के अनेक रोग पैदा हो जाते हैं। कमर दर्द, सन्धिवात, अपच, नींद न आना, सिरदर्द आदि आंव के कारण होते हैं। ये सब रोग प्रतिदिन दो चम्मच अदरक का रस सुबह खाली पेट सेवन करते रहने से ठीक हो जाते हैं।

51 बार-बार पेशाब आने की समस्या :- अदरक का रस और खड़ी शक्कर मिलाकर पीने से बहुमूत्र रोग की बीमारी नष्ट हो जाती है।

52 शीतपित्त :- 


*अदरक का रस और शहद पांच-पांच ग्राम मिलाकर पीने से सारे शरीर पर कण्डों की राख मलकर, कम्बल ओढ़कर सो जाने से शीतपित्त रोग तुरन्त दूर हो जाता है।
*अदरक का रस 5 मिलीलीटर चाटने से शीत पित्त का निवारण होता है।"

53 आधासीसी (आधे सिर का दर्द) :- 


*अदरक और गुड़ की पोटली बनाकर उसके रसबिन्दु को नाक में डालने से आधासीसी के दर्द में लाभ होता है।
*आधे सिर में दर्द होने पर नाक में अदरक के रस की बूंदें टपकाने से बहुत लाभ होता है।"

54 गले की खराश :- ठंडी के मौसम में खांसी के कारण गले में खराश होने पर अदरक के सात-आठ ग्राम रस में शहद मिलाकर, चाटकर खाने से बहुत लाभ होता है। खांसी का प्रकोप भी कम होता है।

55 अस्थमा के कारण उत्पन्न खांसी :- अदरक के 10 मिलीलीटर रस में 

50 ग्राम शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चाटकर खाने से सर्दी-जुकाम से उत्पन्न खांसी नष्ट होती है। चिकित्सकों के अनुसार अस्थमा के कारण उत्पन्न खांसी में भी अदरक से लाभ होता है।

56 तेज बुखार :- पांच ग्राम अदरक के रस में पांच ग्राम शहद मिलाकर चाटकर खाने से बेचैनी और गर्मी नष्ट होती है।

57 बहरापन :- 


*अदरक का रस हल्का गर्म करके बूंद-बूंद कान में डालने से बहरापन नष्ट होता है।
*अदरक के रस में शहद, तेल और थोड़ा सा सेंधानमक मिलाकर कान में डालने से बहरापन और कान के अन्य रोग समाप्त हो जाते हैं।"

58 जलोदर :- प्रतिदिन सुबह-शाम 5 से 10 मिलीलीटर अदरक का रस पानी में मिलाकर पीने से जलोदर रोग में बहुत लाभ होता है।

59 ठंड के मौसम में बार-बार मूत्र के लिए जाना :- दस ग्राम अदरक के रस में थोड़ा-सा शहद मिलाकर सेवन करने से बहुत लाभ होता है।

60 ज्वर (बुखार) :- 


*अदरक का रस पुदीने के क्वाथ (काढ़ा) में डालकर पीने से बुखार में राहत मिलती है।
*एक चम्मच शहद के साथ समान मात्रा में अदरक का रस मिलाकर दिन में 3-4 बार पिलायें।"

61 ठंडी के मौसम में आवाज बैठना :- अदरक के रस में सेंधानमक मिलाकर चाटने से बहुत लाभ होता है।

62 संधिशोथ (जोड़ों की सूजन) :- 


*अदरक को पीसकर संधिशोथ (जोड़ों की सूजन) पर लेप करने से सूजन और दर्द जल्द ही ठीक होते हैं।
*अदरक का 500 मिलीलीटर रस और 250 मिलीलीटर तिल का तेल दोनों को देर तक आग पर पकाएं। जब रस जलकर खत्म हो जाए तो तेल को छानकर रखें। इस तेल की मालिश करने से जोड़ों की सूजन में बहुत लाभ होता है। अदरक के रस में नारियल का तेल भी पकाकर इस्तेमाल कर सकते हैं।"

63 अम्लपित्त (खट्टी डकारें) :- 


*अदरक का रस पांच ग्राम मात्रा में 100 मिलीलीटर अनार के रस में मिलाकर कुछ दिनों तक सुबह-शाम सेवन करने से अम्लपित्त (खट्टी डकारें) की समस्या नहीं होती है।
*अदरक और धनिया को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ पीने से लाभ होता है।।
*एक चम्मच अदरक का रस शहद में मिलाकर प्रयोग करने से आराम मिलता है।"

64 वायु विकार के कारण अंडकोष वृद्धि :- वायु विकार के कारण अंडकोष की वृद्धि होने पर अदरक के पांच ग्राम रस में शहद मिलाकर तीन-चार सप्ताह प्रतिदिन सेवन करने से बहुत लाभ होता है।

65 दमा :- 


*लगभग एक ग्राम अदरक के रस को एक ग्राम पानी से सुबह-शाम लेने से दमा और श्वास रोग ठीक हो जाते हैं।
*अदरक के रस में शहद मिलाकर खाने से सभी प्रकार के श्वास, खांसी, जुकाम तथा अरुचि आदि ठीक हो जाते हैं।
*अदरक के रस में कस्तूरी मिलाकर देने से श्वास-रोग ठीक हो जाता है।
*लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग जस्ता-भस्म में 6 मिलीलीटर अदरक का रस और 6 ग्राम शहद मिलाकर रोगी को देने से दमा और खांसी दूर हो जाती है।
*अदरक का रस शहद के साथ खाने से बुढ़ापे में होने वाला दमा ठीक हो जाता है।
*अदरक की चासनी में तेजपात और पीपल मिलाकर चाटने से श्वास-नली के रोग दूर हो जाते हैं।
*अदरक का छिलका उतारकर खूब महीन पीस लें और छुआरे के बीज निकालकर बारीक पीस लें। अब इन दोनों को शहद में मिलाकर किसी साफ बड़े बर्तन में अच्छी तरह से मिला लेते हैं। अब इसे हांडी में भरकर आटे से ढक्कन बंद करके रख दें। जमीन में हांडी के आकार का गड्ढा खोदकर इस गड्ढे में इस हांडी को रख दें और 36 घंटे बाद सावधानी से मिट्टी हटाकर हांडी को निकाल लें। इसके सुबह नाश्ते के समय तथा रात में सोने से पहले एक चम्मच की मात्रा में सेवन करें तथा ऊपर से एक गिलास मीठा, गुनगुने दूध को पी लेने से श्वास या दमा का रोग ठीक हो जाता है। इसका दो महीने तक लगातार सेवन करना चाहिए।
*अदरक का रस, लहसुन का रस, ग्वारपाठे का रस और शहद सभी को 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर चीनी या मिट्टी के बर्तन में भरकर उसका मुंह बंद करके जमीन में गड्ढा खोदकर गाड़कर मिट्टी से ढक देते हैं। 3 दिन के बाद उसे जमीन से बाहर निकाल लेते हैं। इसे 3-3 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन रोगी को सेवन कराने से 15 से 30 दिन में ही यह दमा मिट जाता है।"

66 ब्रोंकाइटिस :- 15 ग्राम अदरक, चार बादाम, 8 मुनक्का- इन सभी को पीसकर सुबह-शाम गर्म पानी से सेवन करने से ब्रोंकाइटिस में लाभ मिलता है।

67 गीली खांसी :- *अदरक का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर एक-एक चम्मच की मात्रा में लेकर थोड़ा सा गर्म करके दिन में 3-4 बार चाटने से 3-4 दिनों में कफ वाली गीली खांसी दूर हो जाती है।
*अदरक का रस 14 मिलीमीटर लेकर बराबर मात्रा में शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेना चाहिए।"

68 काली खांसी :- अदरक के रस को शहद में मिलाकर 2-3 बार चाटने से काली खांसी का असर खत्म हो जाता है।

69 बालों के रोग :- 


*अदरक और प्याज का रस सेंधानमक के साथ मिलाकर गंजे सिर पर मालिश करें, इससे गंजेपन से राहत मिलती है।
*अदरक के टुकडे़ को गंजे सिर पर मालिश करने से बालों के रोग मिट जाते हैं।"

70 साधारण खांसी :- 


*साधारण खांसी में अदरक का रस निकालकर उसमें थोड़ा शहद और थोड़ा सा काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है।
*अदरक का रस और तालीस-पत्र को मिलाकर चाटने से खांसी ठीक हो जाती है।
*बिना खांसी के कफ बढ़ा हो तो अदरक, नागरबेल का पान और तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर सेवन करने से कफ दूर हो जाता है।
*अदरक के रस में इलायची का चूर्ण और शहद मिलाकर हल्का गर्म करके चाटने से सांस के रोग की खांसी दूर हो जाती है।
*एक चम्मच अदरक के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर चाटने से खांसी मे बहुत ही जल्द आराम आता है।"

71 इंफ्लुएन्जा के लिए :- 


*अदरक, तुलसी, कालीमिर्च तथा पटोल (परवल) के पत्ते का काढ़ा बनाकर सेवन करें।
*3 ग्राम अदरक या सोंठ, 7 तुलसी के पत्ते, 7 कालीमिर्च, जरा-सी दालचीनी आदि को 250 मिलीलीटर पानी में उबालकर चीनी मिलाकर गर्म-गर्म पीने से इंफ्लुएन्जा, जुकाम, खांसी और सिर में दर्द दूर होता है।"

72 कफयुक्त खांसी, दमा :- 


*अदरक का रस रोजाना 3 बार 10 दिन तक पियें। खांसी, दमा के लिए यह बहुत उपयोगी होता है। परहेज- खटाई और दही का प्रयोग न करें। 12 ग्राम अदरक के टुकड़े करके एक गिलास पानी में, दूध, शक्कर, मिलाकर चाय की तरह उबालकर पीने से खांसी, जुकाम ठीक हो जाता है। आठ कालीमिर्च स्वादानुसार नमक और गुड़, चौथाई चम्मच पिसी हुई सोंठ एक गिलास पानी में उबालें। गर्म होने पर आधा रहने पर गर्म-गर्म सुहाता हुआ पियें। इससे खांसी ठीक हो जाएगी। 10 ग्राम अदरक को बारीक-बारीक काट कर कटोरी में रखें और इसमें 20 ग्राम गुड़ डालकर आग पर रख दें। थोड़ी देर में गुड़ पिघलने लगेगा। तब चम्मच से गुड़ को हिलाकर-मिलाकर रख लेते हैं। जब अच्छी तरह पिघलकर दोनों पदार्थ मिल जाएं तब इसे उतार लेते हैं। इसे थोड़ा सा गर्म रहने पर एक या दो चम्मच चाटने से कफयुक्त खांसी में आराम होता है। इसे खाने के एक घंटे बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए या सोते समय चाटकर गुनगुने गर्म पानी से कुल्ला करके मुंह साफ करके सो जाना चाहिए। यह बहुत ही लाभप्रद उपाय है।
*5 मिलीलीटर अदरक के रस में 3 ग्राम शहद को मिलाकर चाटने से खांसी में बहुत ही लाभ मिलता है।
*6-6 मिलीलीटर अदरक और तुलसी के पत्तों का रस तथा 6 ग्राम शहद को मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से सूखी खांसी में लाभ मिलता है।"

73 निमोनिया :- 


*एक-एक चम्मच अदरक और तुलसी का रस शहद के साथ देने ये निमोनिया का रोग दूर होता है।
*अदरक रस में एक या दो वर्ष पुराना घी व कपूर मिलाकर गर्म कर छाती पर मालिश करें।"

74 अफारा (गैस का बनना) :- अदरक 3 ग्राम, 10 ग्राम पिसा हुआ गुड़ के साथ सेवन करने से आध्यमान (अफारा, गैस) को समाप्त करता है।

75 सर्दी, जुकाम और खांसी :- 


*अदरक की चाय जुखाम, खांसी, और सर्दी के दिनों में बहुत लाभप्रद है। तीन ग्राम अदरक और 10 ग्राम गुड़ दोनों को पाव भर पानी में उबालें, 50 मिलीलीटर शेष रह जाने पर छान लें और थोड़ा गर्म-गर्म ही पीकर कंबल ओढ़कर सो जायें। Note: यह चाय काफी गर्म होती है। अत: प्रतिदिन इसका सेवन नहीं करना चाहिए। साधारण दशा में गुड़ के स्थान पर बूरा या चीनी डाल सकते हैं तथा दूध भी मिला सकते हैं।
*अदरक 10 ग्राम काटकर लगभग 200 मिलीलीटर गर्म पानी में उबालकर एक चौथाई रह जाने पर छान लेते हैं। इसमें खांड मिले एक कप कम गर्म दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से जुकाम और खांसी नष्ट हो जाती है।"

76 रतौंधी :- अदरक और प्याज का रस मिलाकर सलाई से दिन में 3 बार आंखों में डालने से रतौंधी का रोग दूर हो जाता है।

77 मसूढ़ों से खून आना :- मसूढ़े में सूजन हो या मसूढ़ों से खून निकल रहा हो तो अदरक का रस निकालकर इसमें नमक मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मसूढ़ों पर मलें। इससे खून का निकलना बंद हो जाता है।

78 कब्ज (कोष्ठबद्वता) :- 


*अदरक का रस 10 मिलीलीटर को थोड़े-से शहद में मिलाकर सुबह पीने से शौच खुलकर आती है।
*एक कप पानी में एक चम्मच भर अदरक को कूटकर पानी में 5 मिनट तक उबाल लें। छानकर पीने से कब्ज नहीं रहती है।
*अदरक, फूला हुआ चना और सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।"

79 वमन (उल्टी) :- *एक चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच प्याज का रस और एक चम्मच पानी को मिलाकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।

*5 मिलीलीटर अदरक के रस में थोड़ा सा सेंधानमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
*एक चम्मच अदरक का रस लेकर उसमें थोड़ा सा सेंधानमक और कालीमिर्च डाल लें और चाटने से उल्टी आना रुक जाती है। अगर जरूरत पड़े तो 1 घंटे के बाद पहले की तरह 1 बार और लें।

*10 मिलीलीटर अदरक के रस में 10 मिलीलीटर प्याज का रस मिलाकर पीने से जी मिचलाना (उबकाई) और उल्टी आने का रोग दूर हो जाता है।

*अदरक का रस, तुलसी का रस, शहद और मोरपंख के चंदोवे की राख को एक साथ मिलाकर खाने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
*अदरक और प्याज के रस को बराबर मात्रा में लेकर पीने से उल्टी होना बंद हो जाती है।
*20-20 ग्राम अदरक, प्याज, लहसुन और नींबू के रस को मिलाकर इनका 2 चम्मच रस 125 मिलीलीटर पानी में मिलाकर इसके अंदर 1 ग्राम मीठा सोड़ा डालकर पीने से उल्टी के रोग में लाभ होता है।"

80 अतिक्षुधा भस्मक (भूख अधिक लगना) :- 50-50 मिलीलीटर अदरक, नींबू के रस में लाहौरी नमक पिसा मिलाकर तीन दिन धूप में रख दें। भोजन के बाद सुबह-शाम 1-1 चम्मच पीने से भूख लगने लगती है और भोजन पच जाता है।

81 गैस :- अदरक का रस एक चम्मच, नींबू का रस का आधा चम्मच और शहद को डालकर खाने से पेट की गैस में धीरे-धीरे लाभ होता है।

82 दस्त :- 


*रात को सोने से पहले अदरक को पानी में डाल दें, सुबह इसे निकालकर साफ पानी के साथ पीसकर घोल बनाकर 1 दिन में 3 से 4 बार पीने से अतिसार (दस्त) समाप्त हो जाता है।
*एक चम्मच अदरक के रस को उतना गर्म करके पीना चाहिए जितना पिया जा सके ऐसा करने से पतले दस्त का आना बंद हो जाता है।
*अदरक का रस नाभि पर लगाने से दस्त में राहत मिलती है।
*एक चम्मच अदरक के रस को आधा कप उबाले हुऐ पानी में डालकर 1 घण्टे के अन्तराल के बाद पीने से पतले दस्त का आना बंद हो जाता है।
*अदरक के रस में सेंधानमक मिलाकर चाटें।
*2 मिलीलीटर अदरक के रस को आधे कप गर्म पानी के साथ पीने से दस्त में लाभ मिलता है।
*उड़द के आटे को नाभि के चारों लगाकर उसमें अदरक का रस भरने से रोगी को लाभ मिलता है।"

83 गर्भवती स्त्री की उल्टी और जी का मिचलाना :- अदरक का रस 10 मिलीलीटर, प्याज का रस 10 मिलीलीटर मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से उल्टी और जी का मिचलाना बंद हो जाता है।

84 कान का दर्द :- 


*अदरक, सहजन की छाल, करेला, लहसुन में से किसी भी चीज का रस निकालकर गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।


ॐ शंखनाद की औषधीय विशेषता ॐ



हिंदू मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय प्राप्त चौदह रत्नों में से एक शंख की उत्पत्ति छठे स्थान पर हुई। शंख में भी वही अद्भुत गुण मौजूद हैं, जो अन्य तेरह रत्नों में हैं। दक्षिणावर्ती शंख के अद्भुत गुणों के कारण ही भगवान विष्णु ने उसे अपने हस्तकमल में धारण किया हुआ है।


शंख मुख्यतः दो प्रकार के होते ह्रैं : वामावर्ती और दक्षिणावर्ती। इन दोनों की पूजा का विशेष महत्व है। दैनिक पूजा-पाठ एवं कर्मकांड अनुष्ठानों के आरंभ में तथा अंत में वामावर्ती शंख का नाद किया जाता है। इसका मुख ऊपर से खुला होता है। इसका नाद प्रभु के आवाहन के लिए किया जाता है। इसकी ध्वनि से क्क शब्द निकलता है। यह ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। वैज्ञानिक भी इस बात पर एकमत हैं कि शंख की ध्वनि से होने वाले वायु-वेग से वायुमंडल में फैले वे अति सूक्ष्म किटाणु नष्ट हो जाते हैं, जो मानव जीवन के लिए घातक होते हैं।

उक्त अवसरों के अतिरिक्त अन्य मांगलिक उत्सवों के अवसर पर भी शंख वादन किया जाता है। महाभारत के युद्ध के अवसर पर भगवान कृष्ण ने पांचजन्य निनाद किया था। कोई भी शुभ कार्य करते समय शंख ध्वनि से शुभता का अत्यधिक संचार होता है। शंख की आवाज को सुन कर लोगों को ईश्वर का स्मरण हो आता है।

शंख वादन के अन्य लाभ भी हैं। इसे बजाने से सांस की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से शंख बजाना विशेष लाभदायक है। शंख बजाने से पूरक, कुंभक और प्राणायाम एक ही साथ हो जाते हैं। पूरक सांस लेने, कुंभक सांस रोकने और रेचक सांस छोड़ने की प्रक्रिया है। आज की सबसे घातक बीमारी हृदयाघात, उच्च रक्त चाप, सांस से संबंधित रोग, मंदाग्नि आदि शंख बजाने से ठीक हो जाते हैं।

घर में शंख वादन से घर के बाहर की आसुरी शक्तियां भीतर नहीं आ सकतीं। यही नहीं, घर में शंख रखने और बजाने से वास्तु दोष दूर हो जाते हैं।

दक्षिणावर्ती शंख सुख-समृद्धि का प्रतीक है। इसका मुख ऊपर से बंद होता है। घर के मंदिर में इसकी स्थापना करने पर लक्ष्मी की प्राप्ति और व्यवसाय में लाभ होता है। दक्षिणावर्ती शंख से भगवान सूर्य को जल का अर्य देने से मानसिक तथा शारीरिक कष्टों का निवारण होता है और नेत्र विकार से मुक्ति मिलती है।

अगर आपको खांसी, दमा, पीलिया, ब्लड प्रेशर या दिल से संबंधित मामूली से लेकर गंभीर बीमारी है तो इससे निजात पाने का एक सरल और आसान सा उपाय है- प्रतिदिन शंख बजाइए।


करते हैं कि शंखनाद से आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

शंख से निकलने वाली ध्वनि जहां तक जाती है वहां तक बीमारियों के कीटाणुओं का नाश हो जाता है।

शंखनाद से सकारात्मक ऊर्जा का सर्जन होता है जिससे आत्मबल में वृद्धि होती है।

शंख में प्राकृतिक कैल्शियम, गंधक और फास्फोरस की भरपूर मात्रा होती है।

प्रतिदिन शंख फूंकने वाले को गले और फेफड़ों के रोग नहीं हो सकते।
शंख से मुख के तमाम रोगों का नाश होता है।

शंख बजाने से चेहरे, श्वसन तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का भी व्यायाम हो जाता है।

शंख वादन से स्मरण शक्ति भी बढ़ती है।


ॐ पेट कि बीमारी का इलाज ॐ


राजीव भाई कहते है अगर आपकी पेट ख़राब है दस्त हो गया है , बार बार आपको टॉयलेट जाना पड़ रहा है तो इसकी सबसे अछि दावा है जीरा | अध चम्मच जीरा चबाके खा लो पीछे से गुनगुना पानी पी लो तो दस्त एकदम बंध हो जाते है एक ही खुराख में |

अगर बहुत जादा दस्त हो ... हर दो मिनिट में आपको टॉयलेट जाना पड़ रहा है तो आधा कप कच्चा दूध ले लो बिना गरम किया हुआ और उसमे निम्बू डालके जल्दी से पी लो | दूध फटने से पहले पीना है और बस एक ही खुराक लेना है बस इतने में ही खतरनाक दस्त ठीक हो जाते है |

और एक अछि दावा है ये जो बेल पत्र के पेड़ पर जो फल होते है उसका गुदा चबाके खा लो पीछे से थोडा पानी पी लो ये भी दस्त ठीक कर देता है | बेल का पाउडर मिलता है बाज़ार में उसका एक चम्मच गुनगुना पानी के साथ पी लो ये भी दस्त ठीक कर देता है |

पेट अगर आपका साफ़ नही रहता कब्जियत रहती है तो इसकी सबसे अछि दावा है अजवाईन | इसको गुड में मिलाके चबाके खाओ और पीछे से गरम पानी पी लो तो पेट तुरंत साफ़ होता है , रात को खा के सो जाओ सुबह उठते ही पेट साफ होगा |

और एक अछि दावा है पेट साफ करने की वो है त्रिफला चूर्ण , रात को सोते समय एक चम्मच त्रिफला चूर्ण ले लो पानी के साथ पेट साफ हो जायेगा |

पेट जुडी दो तिन ख़राब बिमारिय है जैसे बवासीर, पाईल्स, हेमोरोइड्स, फिसचुला, फिसर .. ये सब बिमारिओ में अछि दावा है मुली का रस | एक कप मुली का रस पियो खाना खाने के बाद दोपहर को या सबेरे पर शाम को मत पीना तो हर तरेह का बवासीर ठीक हो जाता है , भगंदर ठीक होता है फिसचुला, फिसर ठीक होता है .. अनार का रस पियो तो भी ठीक हो जाता है